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NCERT Solution

Chapter 3 : एक आशीर्वाद (Ek Aashirvad) (NCERT Solution) class 8th hindi

Class 8 · Hindi (Malhar) · Chapter 3 : एक आशीर्वाद (Ek Aashirvad) · All Board · All Medium · 8 views

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कक्षा 8 • मल्हार • पाठ 3

एक आशीर्वाद

कवि — दुष्यंत कुमार (1933–1975)

सपनों व आत्मनिर्भरता का गीत सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर सरल व विस्तृत व्याख्या
सपनों में उड़ता बच्चा — तारे, ग्रह, वाद्य, लैपटॉप
“जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” — असीम संभावनाओं की ओर उड़ान
भाग 1
📖

पाठ से

कविता पर आधारित अभ्यास प्रश्न

मेरी समझ से

क-1कविता में किसे संबोधित किया गया है?
  • युवा वर्ग को
  • नागरिकों को
  • बच्चों को
  • श्रमिकों को
व्याख्या

यह कविता एक आशीर्वाद के रूप में बच्चे (बढ़ती हुई नई पीढ़ी) को संबोधित है। “भावना की गोद से उतरकर... चलना सीखें” और “अपने पाँवों पर खड़े हों” जैसी पंक्तियाँ एक नन्हे शिशु के बढ़ने व आत्मनिर्भर होने का संकेत देती हैं। कवि चाहता है कि वह बच्चा बड़े सपने देखे और स्वावलंबी बने।

क-2“तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है?
  • कल्पना की उड़ान भरना
  • आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना
  • बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना
  • बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
व्याख्या

यहाँ ‘स्वप्न’ का अर्थ नींद में देखे जाने वाले सपने नहीं, बल्कि जीवन की ऊँची आकांक्षाएँ, अभिलाषाएँ व बड़े लक्ष्य हैं। “स्वप्न बड़े हों” अर्थात् व्यक्ति बड़ी सोच रखे और जीवन में बड़े लक्ष्य तय करे।

क-3“उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है—
  • चुनौतियों को स्वीकार करना
  • प्रकाश का प्रसार करना
  • अग्नि के ताप का अनुभव करना
  • कष्टों से नहीं घबराना
व्याख्या

बच्चा हर दीये की रोशनी देखकर ललचाता है और उसे छूने के लिए उँगली तक जला बैठता है। इसका भाव है कि नई पीढ़ी चुनौतियों को स्वीकार करे और कष्ट सहकर भी सीखने/पाने से न घबराए। अनुभव व ज्ञान के लिए जोखिम उठाने का साहस रखे।

क-4“अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है?
  • अपने पैरों पर खड़े होना
  • सफलता प्राप्त करना
  • कठिनाइयों का सामना करना
  • आत्मनिर्भर होना
व्याख्या

यह एक मुहावरेदार अभिव्यक्ति है। ‘अपने पाँवों पर खड़े होना’ का आशय है आत्मनिर्भर बनना — दूसरों पर निर्भर न रहकर स्वयं के बल पर जीवन में आगे बढ़ना। कवि का आशीर्वाद है कि बच्चा स्वावलंबी बने।

हो सकता है आपके साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
आदर्श उत्तर

मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कविता के मूल भाव से सीधे मेल खाते हैं — कविता एक बच्चे को बड़े सपने (आकांक्षाएँ/लक्ष्य) देखने, चुनौतियों से न घबराने और आत्मनिर्भर बनने का आशीर्वाद देती है। कुछ साथियों ने ‘युवा वर्ग’ या ‘कल्पना की उड़ान’ भी चुना होगा, जो व्यापक अर्थ में स्वीकार्य है, पर कविता का सीधा संबोधन बच्चे/नई पीढ़ी से है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 — (1)भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
स्तंभ 2 — (3)भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना
स्तंभ 1 — (2)हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
स्तंभ 2 — (1)विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना
स्तंभ 1 — (3)चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें
स्तंभ 2 — (4)असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना
स्तंभ 1 — (4)...हँसें / मुसकराएँ / गाएँ
स्तंभ 2 — (2)सपनों को आनंद व मुस्कुराहटों में बदलें; कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें
सही जोड़े: 1 → 3,   2 → 1,   3 → 4,   4 → 2

पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“जा, तेरे स्वप्न बड़े हों”
भाव

कवि नई पीढ़ी को आशीर्वाद देते हुए कहता है — “जाओ, और तुम्हारे सपने बड़े हों।” अर्थात् व्यक्ति छोटी सोच में न बँधे, बल्कि बड़ी आकांक्षाएँ व ऊँचे लक्ष्य रखे। बड़े सपने ही व्यक्ति को बड़ी सफलता की ओर ले जाते हैं।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”
भाव

कवि चाहता है कि बच्चा केवल कल्पनाओं व भावनाओं में न खोया रहे, बल्कि शीघ्र ही धरती की वास्तविकता (यथार्थ) को समझे और व्यावहारिक जीवन में आगे बढ़ना सीखे। सपने देखने के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत पर चलना भी ज़रूरी है।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए / रूठना-मचलना सीखें”
भाव

जैसे बच्चा चाँद-तारों (जो पहुँच से बाहर हैं) को पाने के लिए रूठता व मचलता है, वैसे ही व्यक्ति को असंभव-से लगने वाले ऊँचे लक्ष्यों के लिए भी हठ व निरंतर प्रयास करना चाहिए। कठिन से कठिन लक्ष्य के लिए जिद ठानने से ही बड़ी उपलब्धियाँ संभव होती हैं।

अनुमान और कल्पना से

बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
चट्टान पर चढ़ती लड़की
बड़े सपने = ऊँचे लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास
आदर्श उत्तर

बड़े सपने वे हो सकते हैं जैसे — डॉक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षक या इंजीनियर बनना, देश की सेवा करना, समाज से गरीबी/अशिक्षा मिटाना, पर्यावरण की रक्षा करना या कोई बड़ी खोज करना। ये सपने इसलिए बड़े हैं क्योंकि इन्हें पूरा करने में कठिन परिश्रम लगता है और इनसे स्वयं के साथ-साथ समाज व देश का भी भला होता है।

“हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ / उँगली जलाएँ” — ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों?
उत्तर

केवल ललक (इच्छा) से सपने पूरे नहीं होते। ललक के साथ आवश्यक हैं — स्पष्ट योजना, निरंतर परिश्रम व प्रयास, धैर्य, लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प। क्योंकि इच्छा तो दिशा दिखाती है, पर मंज़िल तक योजना बनाकर लगातार मेहनत करने से ही पहुँचा जा सकता है। बिना प्रयास के केवल इच्छा अधूरी रह जाती है।

कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। उससे क्या बात करेंगे?
कल्पनात्मक उत्तर

मैं अपने सपने से कहूँगा — “प्यारे मित्र! तुम मेरी आँखों में बसे हो और मुझे रात-दिन प्रेरित करते हो। कभी-कभी रास्ता कठिन लगता है और मैं थक जाता हूँ, पर तुम मुझे हिम्मत देते रहना, मेरा साथ कभी मत छोड़ना। मैं वादा करता हूँ कि कठिन परिश्रम करके तुम्हें ज़रूर सच कर दिखाऊँगा।”

यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहें तो किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?
आदर्श उत्तर

मैं अपने छोटे भाई/बहन को यह आशीर्वाद दूँगा कि वह स्वस्थ रहे, खूब पढ़े, बड़े सपने देखे और आत्मनिर्भर बने। साथ ही वह सदा सच्चा, मेहनती व दयालु बने रहे। ऐसा इसलिए, क्योंकि अच्छी शिक्षा, परिश्रम और अच्छे संस्कार ही जीवन को सफल व सार्थक बनाते हैं।

✨ कविता की रचना — इस कविता की विशेषताएँ
उत्तर

इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते व गाते हुए दिखाया गया है — यह मानवीकरण (personification) है। अन्य विशेषताएँ —

आशीर्वाद/संबोधन शैली — “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों”।
सुंदर बिंब/प्रतीक — चाँद-तारे, दीये की रोशनी, उँगली जलाना।
प्रेरणादायी व सकारात्मक भाव — आत्मनिर्भरता, साहस, बड़े लक्ष्य।
सरल, प्रवाहपूर्ण मुक्त छंद (बिना कठिन तुकबंदी के) तथा क्रिया-शब्दों की लड़ी (चलना, रूठना, मचलना, हँसना, गाना)।
• आरंभ व अंत में “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” की पुनरावृत्ति से भाव की गहराई।

🖊️ सृजन — एक संज्ञा शब्द के साथ क्रिया शब्दों से कविता बनाइए
बादल
उदाहरण — ‘बादल’ को केंद्र में रखकर
नमूना कविता
बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
उमड़ते-घुमड़ते देखा है,
प्यासी धरती को
हँसते-झूमते देखा है॥
इसी प्रकार विद्यार्थी ‘नदी’, ‘सूरज’, ‘चिड़िया’ आदि किसी एक संज्ञा को केंद्र में रखकर क्रिया-शब्दों से अपनी कविता बना सकते हैं।
🏷️ कविता का शीर्षक — ‘एक आशीर्वाद’ कविता में कहीं प्रयुक्त नहीं हुआ। किसी पंक्ति/शब्द को शीर्षक बनाना हो तो कौन-सा और क्यों?
आदर्श उत्तर

मैं शीर्षक चुनूँगा — “तेरे स्वप्न बड़े हों” अथवा केवल “स्वप्न”

कारण: यही पंक्ति पूरी कविता की केंद्रीय भावना है और आरंभ व अंत दोनों में दोहराई गई है। पूरी कविता ‘स्वप्न’ शब्द के इर्द-गिर्द ही बुनी गई है, इसलिए यह शीर्षक कविता के भाव को सबसे सही ढंग से व्यक्त करेगा।

भाषा की बात

‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द लिखिए।
सपनाकल्पनाअरमान स्वप्न आकांक्षाअभिलाषाइच्छा लक्ष्यउम्मीदमनोकामना साधख्वाबकामना
उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ देते हों (नीचे लाल रंग व काट से दर्शाए गए हैं)।
पृथ्वीधरावसुधाअवनिसुता
चाँदमधुकरशशिनिशाकरमयंक
तारेनक्षत्रसोमतारकउडुगण
रोशनीप्रकाशलालिमाउजालाआलोक
स्वप्नसपनाइच्छायथार्थकल्पना
दीयादीनज्योतिदीपकप्रदीप
घेरा (असमान अर्थ): सुता (=पुत्री), मधुकर (=भौंरा), सोम (=चन्द्रमा), लालिमा (=लाली), यथार्थ (=वास्तविकता), दीन (=गरीब)।
🔁 आना-जाना — दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य (नमूना)
वाक्य
आनाअतिथि के आने से घर में रौनक आ गई।
आनापरीक्षा का परिणाम कल आने वाला है।
जानामैं प्रतिदिन समय पर विद्यालय जाता हूँ।
जानासूरज ढलते ही पक्षी अपने घोंसलों को चले जाते हैं।
भाग 2
🚀

पाठ से आगे

विस्तार / सृजनात्मक प्रश्न
📔 डायरी — हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
गतिविधि (नमूना)

यह व्यक्तिगत डायरी-गतिविधि है — दिनभर की गतिविधियों पर ध्यान देकर लिखिए कि आप कब-कब हँसे, मुसकराए, गाए, रूठे और मचले। उदाहरण —

हँसादोस्त के मज़ेदार चुटकुले पर सुबह जोर से हँसा।
मुसकरायाअध्यापक ने मेरी कॉपी पर ‘शाबाश’ लिखा तो मुसकरा दिया।
गायाशाम को खेलते-खेलते अपना प्रिय गीत गुनगुनाया।
रूठाभाई ने मेरी पेंसिल नहीं दी तो थोड़ी देर रूठ गया।

आपकी बात

दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको माता-पिता, अध्यापक व परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं?
आदर्श उत्तर

मुझे प्रायः ये आशीर्वाद मिलते हैं — “खूब पढ़ो और बड़े बनो”, “स्वस्थ व खुश रहो”, “हमेशा सच बोलो और अच्छे काम करो”, “परीक्षा में सफल हो”, “दीर्घायु हो व नाम रोशन करो।” ये आशीर्वाद मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा व आत्मविश्वास देते हैं।

आप अपने से छोटों के प्रति किस प्रकार शुभेच्छा प्रकट करते हैं?
आदर्श उत्तर

मैं अपने छोटों से कहता हूँ — “खूब मन लगाकर पढ़ो”, “हमेशा खुश व स्वस्थ रहो”, “बड़ों का आदर करो”, “अपने सपनों को पूरा करो।” कभी-कभी उन्हें प्यार से सिर पर हाथ रखकर या प्रोत्साहन के दो मीठे शब्द कहकर भी मैं अपनी शुभकामना व्यक्त करता हूँ।

सपनों की बातें

आप क्या करना/पाना चाहते हैं? सपनों को पूरा करने के लिए योजना व चुनौतियाँ।
ट्रॉफियाँ — सफलता
मेहनत व योजना से सपने साकार होते हैं
आदर्श उत्तर (नमूना)

मेरा सपना: एक अच्छा वैज्ञानिक बनना। इसे पूरा करने के लिए —

प्रयत्न: रोज़ नियमित अध्ययन, विज्ञान के प्रयोग व पुस्तकें पढ़ना।
योजना: कक्षावार लक्ष्य तय करना, समय-सारणी बनाना, कमज़ोर विषयों पर अधिक ध्यान।
सहयोग: माता-पिता, शिक्षकों व पुस्तकालय/इंटरनेट से मार्गदर्शन।
संभावित चुनौतियाँ: समय का अभाव, संसाधनों की कमी, असफलता का डर — जिन्हें धैर्य, परिश्रम व आत्मविश्वास से पार किया जा सकता है।

🏡 हमारे सपने — परिजनों के सपने (नमूना तालिका)
साइकिल चलाती लड़की और पहाड़
हर व्यक्ति का अपना सपना व अपनी राह
गतिविधि (नमूना)
माताबच्चे अच्छे संस्कारी व पढ़े-लिखे बनें।
पितापरिवार सुखी रहे और अपना घर बने।
दादा-दादीपोते-पोतियाँ नाम रोशन करें व सब साथ रहें।
बहन/भाईअपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ें।
सबके सपने: शाक-विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक आदि का साक्षात्कार लेकर उनके सपने जानिए — प्रश्न जैसे: “आपका बचपन का सपना क्या था?”, “आप अपने बच्चों के लिए क्या चाहते हैं?”, “आपकी सबसे बड़ी इच्छा क्या है?”

झरोखे से · साझी समझ

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का प्रेरक उद्बोधन — ‘सपनों की उड़ान’
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — मिसाइल मैन व पूर्व राष्ट्रपति
सारांश

डॉ. कलाम कहते हैं कि सच्चे सपने वे होते हैं जो हमें चैन से सोने नहीं देते। सपनों को पूरा करने के लिए पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना पड़ता है, यानी सतत प्रयासरत रहना होता है।

इक्कीसवीं सदी में पहले से कहीं अधिक संभावनाएँ हैं, पर समय सीमित है। हर युवा को सब अनुभव मिल सकें, इसके लिए दो उपाय हैं — या तो उपलब्ध समय को बढ़ाएँ, या उतने ही समय में अधिक काम/उपलब्धि की मात्रा बढ़ाएँ। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को समझ लेने से प्रगति के अनेक द्वार स्वयं खुल जाते हैं — यही वह ‘लंबी छलांग’ है जो मानवता को विकास के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।

साझी समझ: ‘एक आशीर्वाद’ बड़े सपने देखने को कहती है और कलाम का उद्बोधन उन्हें योजना व निरंतर प्रयास से पूरा करने का रास्ता दिखाता है — दोनों मिलकर सिखाते हैं कि सपना + परिश्रम = सफलता।
🔎 खोजबीन के लिए
गतिविधि

कला, विज्ञान, राजनीति, खेल व मनोरंजन आदि क्षेत्रों के सफल व्यक्तियों ने अपने सपनों को साकार करने के लिए कैसे योजना बनाई व संघर्ष किया — पुस्तकालय या इंटरनेट से इनके बारे में पढ़िए। (उदाहरण — डॉ. कलाम, मैरी कॉम, ध्यानचंद, लता मंगेशकर, सी.वी. रमन आदि की संघर्ष-यात्रा प्रेरणादायी है।)

👤 लेखक परिचय — दुष्यंत कुमार
दुष्यंत कुमार
दुष्यंत कुमार (1933–1975)
संक्षेप में

दुष्यंत कुमार हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक थे। इनका जन्म बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। बहुत कम समय में ही इन्होंने हिंदी साहित्य को विविध रचनाओं व जीवंत भाषा से समृद्ध किया। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल-संग्रह है, और इनका संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली (चार खंडों) में प्रकाशित है।

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