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NCERT Solution

Chapter 8 : नए मेहमान (Naye mehmaan) (NCERT Solution) class 8th hindi

Class 8 · Hindi (Malhar) · Chapter 8 : नए मेहमान (Naye mehmaan) · All Board · All Medium · 4 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD All Medium ENGLISH HINDI
पाठ 8 · एकांकी · मल्हार

नए मेहमान

किराये के तंग मकान, भीषण गरमी और दो अनजान मेहमान — एक शहरी मध्यवर्गीय परिवार का जीवंत चित्रण
— उदयशंकर भट्ट (1898 – 1966)
पाठ से
😊

मेरी समझ से (क)

सही उत्तर के सामने तारा ★ — कुछ के एक से अधिक उत्तर
1आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
  • अतिथियों की सेवा करने के कारण
  • किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
  • आज्ञाकारिता के भाव के कारण
  • गरमी को चुपचाप सहने के कारण
स्पष्टीकरण

प्रमोद और किरण ने बिना कोई सवाल किए चुपचाप ठंडा पानी व बरफ लाई और पंखा किया। तभी नन्हेमल कहता है “कितने सीधे लड़के हैं” और बाबूलाल जोड़ता है “शहर के हैं न!”। अर्थात् सेवा-भाव, आज्ञाकारिता और बिना प्रश्न किए काम कर देने के कारण उन्हें सीधा कहा गया। चौथा विकल्प इस कथन का प्रत्यक्ष कारण नहीं है।

2“एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी...” — विश्वनाथ ने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
  • उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
  • पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
  • लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
  • अतिथियों का अपमान करते हैं
स्पष्टीकरण

खाली छत पड़ी रहने पर भी पड़ोसी बच्चों के लिए एक खाट तक नहीं बिछाने देते। रेवती के अनुसार “वे तो हमको मुसीबत में देखकर प्रसन्न होते हैं।” इसी असहयोग और दूसरों के कष्ट में खुश होने वाले स्वभाव के कारण विश्वनाथ उन्हें निर्दयी कहता है।

3“ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” — रेवती ऐसी कामना क्यों कर रही है?
  • मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
  • रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
  • अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
  • उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
स्पष्टीकरण

छोटा-तंग किराये का मकान, भीषण गरमी, तीन मंजिल तक पानी ढोना और रेवती का पंद्रह दिन से सिरदर्द — ऐसी हालत में मेहमान आना ठहरने व खाना बनाने का बोझ बढ़ा देगा। अंत में अपने भाई के लिए वह खुशी-खुशी खाना बनाती है, अतः ‘अतिथि नापसंद हैं’ वाला विकल्प गलत है।

4“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” — रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
  • पानी की कमी होने की
  • पड़ोसियों के चिल्लाने की
  • मेहमानों के आने की
  • गरमी के कारण बीमारी की
स्पष्टीकरण

दरवाज़ा खटखटाते ही रेवती घबरा जाती है। पहले ही वह कह चुकी है “ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” इसलिए यहाँ ‘मुसीबत’ का अर्थ है किसी मेहमान के आ जाने का डर

5इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
  • संवाद
  • कथा
  • वर्णन
  • मंचन
स्पष्टीकरण

नाटक/एकांकी मुख्य रूप से संवादों के माध्यम से आगे बढ़ता है — पात्र आपस में बातचीत करते हैं और इसी से कथा खुलती है। पाठ में भी स्पष्ट किया गया है कि एकांकी संवादों से आगे बढ़ती है। (मंचन इसका प्रस्तुतीकरण है, पर रचना को ‘नाटक’ रूप देने वाला तत्त्व संवाद है।)

आपने जो उत्तर चुने, उन पर सहपाठियों से चर्चा कीजिए कि ये उत्तर ही क्यों चुने।
यह कक्षा-चर्चा (समूह गतिविधि) है। ऊपर दिए स्पष्टीकरण आपके तर्क का आधार बनेंगे — हर विकल्प को पाठ के संवादों से जोड़कर बताइए।
💬

पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का आपको क्या अर्थ समझ आया?
“पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
आशय

गरमी इतनी भयंकर है कि बार-बार पानी पीने से पेट तो भर गया (फूल गया) पर प्यास फिर भी नहीं बुझती। यह तपन की अधिकता और बेचैनी को व्यंजित करता है।

“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
आशय

पूरे शहर में लू और तपन इतनी तेज़ है मानो आसमान से आग बरस रही हो। यह अतिशयोक्ति गरमी की प्रचंडता को सजीव बनाती है।

“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
आशय

जैसे भाड़ (भट्टी) में चने भुनते हैं, वैसे ही गरीब-मध्यवर्गीय लोग गरमी में तपते रहते हैं — जबकि संपन्न लोग पहाड़ चले जाते हैं। यह सामाजिक विषमता और गरीबों की विवशता पर व्यंग्य है।

“आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
आशय

ठंडा पानी पीकर राहत मिलने पर कहा गया — भीषण गरमी में ठंडा पानी ही प्राणों को बचाने/चैन देने वाला सहारा है। पानी के महत्व को रेखांकित करता है।

🔗

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के सही भाव से जोड़िए
1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए।3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है
2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है
3. माल-मसाला तो अंटी में है न?5. धनराशि सुरक्षित तो है न!
4. खाने में क्या देर-दार है।1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी
5. पहले आत्मा फिर परमात्मा2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम
स्मरण सूत्र: 1→3, 2→4, 3→5, 4→1, 5→2
🧠

सोच-विचार के लिए

एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए
“शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” — नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
उत्तर

आशय है शहरों के छोटे, तंग, हवादार-रहित किराये के मकान — जहाँ आगे एक कमरा, पीछे छोटा-सा आँगन और ऊपर एक छत होती है, और जिनमें कई परिवार ठुँसकर रहते हैं। नन्हेमल कहना चाहता है कि बड़े शहरों में जगह की कमी के कारण प्रायः इसी तरह के संकरे मकान मिलते हैं।

पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित।
शिकायत

मेहमानों ने उसकी छत पर हाथ धोकर गंदा पानी फैला दिया; पहले एक मेहमान ने उसकी खाट बिछाकर लेट लिया था; और “आपके यहाँ इतने मेहमान आते ही क्यों हैं?” कहकर रोज़-रोज़ की असुविधा पर नाराज़गी जताई।

मेरा मत (तर्क सहित)

पड़ोसी का व्यवहार अधिकतर अनुचित है। अनजान व्यक्ति से छोटी-मोटी गलती हो ही जाती है, जिसे क्षमा किया जा सकता है; विश्वनाथ बार-बार माफ़ी माँग रहा है। बार-बार ताना मारना (“बस एक ही बात याद कर ली है — क्षमा!”) और सहयोग के बदले रूखापन दिखाना पड़ोसी-धर्म के विरुद्ध है। हालाँकि अपनी छत की सफ़ाई और निजता की चिंता करना स्वाभाविक है — इतना भर उचित कहा जा सकता है, पर रूखा-कटु व्यवहार नहीं।

विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता, फिर भी उन्हें घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर

इसके पीछे भारतीय ‘अतिथि देवो भव’ का संस्कार और शिष्टाचार है। मेहमान बड़े आत्मविश्वास से “हम तो आपके पास के हैं”, संपतराम–जगदीशप्रसाद जैसे परिचितों के नाम लेकर अपनापन जता देते हैं। संकोची और सभ्य विश्वनाथ सीधे मना नहीं कर पाता और यह सोचकर कि कहीं कोई परिचित न हो, उन्हें भीतर आने देता है।

उन संवादों को लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल–नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं।
संकेत-संवाद
  • विश्वनाथ — “क्षमा कीजिएगा आप कहाँ से पधारे हैं?” / “मैं संपतराम को नहीं जानता।”
  • “कौन-सी गली में बताया था?... याद ही नहीं रहा।”
  • “जिसके यहाँ आपको जाना है, उसका नाम भी तो बताया होगा?” — नन्हेमल: “नाम तो याद नहीं आता।”
  • विश्वनाथ — “लेकिन मैं कविराज तो नहीं हूँ?”
  • अंत में स्पष्ट होता है वे कविराज रामलाल वैद्य के यहाँ आना चाहते थे — विश्वनाथ के यहाँ नहीं।
उन वाक्यों को लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर
  • “ओफ, बड़ी गरमी है! ... मकान है कि भट्टी!”
  • “पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी।”
  • “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
  • “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”
  • “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
  • “प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
गरमी का प्रकोप ☀
दृश्य — तपता शहर, घड़े का पानी और पुराना पंखा (एकांकी का परिवेश)

अनुमान और कल्पना से

समूह में चर्चा कीजिए
विश्वनाथ पत्नी से खाना बनाने को कहता है, बाजार से मँगाने का सुझाव भी देता है — पर स्वयं खाना बनाने के बारे में क्यों नहीं सोचता?
उत्तर

उस समय के समाज में रसोई/खाना बनाना ‘स्त्री का काम’ मान लिया जाता था और पुरुष इस ज़िम्मेदारी से अलग रहते थे। इसी रूढ़िगत सोच के कारण विश्वनाथ को स्वयं भोजन बनाने का विचार ही नहीं आता — उसे केवल दो ही विकल्प सूझते हैं: पत्नी से कहना या बाजार से मँगाना।

प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का ध्यान रखता है। उसे ऐसे उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर

प्रमोद घर का बड़ा बेटा है। सीमित साधनों वाले मध्यवर्गीय परिवार में, जहाँ नौकर नहीं टिकता और माता अस्वस्थ है, बड़ों का हाथ बँटाना ज़रूरी हो जाता है। इसलिए पानी-बरफ लाना और छोटी बहन उषा को सँभालना जैसे काम उसे सौंपे गए — ताकि वह जिम्मेदारी और पारिवारिक सहयोग सीखे।

“कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ” — सिरदर्द व गरमी के बावजूद रेवती खाना बनाने को क्यों तैयार हो गई?
उत्तर

क्योंकि अब आने वाला अतिथि उसका अपना सगा भाई है। अपने भाई के प्रति स्नेह और कर्तव्य-भावना इतनी प्रबल है कि वह अपनी थकान-पीड़ा भूल जाती है — “भैया भूखे नहीं सो सकते।” अपरिचित मेहमानों पर झुँझलाने वाली रेवती का अपने भाई के लिए ममता दिखाना उसके मन के स्वाभाविक भेद को उजागर करता है।

गरमी की भीषणता वाली पंक्तियों के स्थान पर सर्दी व वर्षा की भीषणता के वाक्य बनाइए।
नीचे कल्पना-आधारित नमूने हैं — आप अपने शब्दों में और भी बना सकते हैं।
गरमी की भीषणतासर्दी की भीषणतावर्षा की भीषणता
1. यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में ठिठुर रहा है।यह वर्षा में भीग रहा है।
2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।पर रजाई भी कोई कहाँ तक ओढ़े।पर छाता भी कोई कहाँ तक ताने।
3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।सारे शहर में जैसे बरफ गिर रही हो।सारे शहर में जैसे आसमान फट पड़ा हो।
4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।ठंड है कि कम होने का नाम नहीं लेती।बारिश है कि थमने का नाम नहीं लेती।
5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।चारों तरफ दीवारें बरफ-सी ठंडी पड़ी हैं।चारों तरफ दीवारें सीलन से टपक रही हैं।
6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।गरम-गरम चाय पिलाओ दोस्त, हाथ अकड़े जा रहे हैं।कुछ गरम पिलाओ दोस्त, कपड़े भीगे जा रहे हैं।
7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।सचमुच सर्दी में आग (धूप) ही तो जान है।सचमुच वर्षा में सूखी छत ही तो जान है।
8. चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।बरफ की तरह ठिठुरते-काँपते रहते हैं।भीगी बिल्ली की तरह सिकुड़े रहते हैं।
9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।फिर भी ठंड से काँप गया हूँ।फिर भी बारिश में भीग गया हूँ।
🎭

एकांकी की रचना

रंगमंच-निर्देश, संवाद और एकांकी की विशेषताएँ
इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर
  • एक ही अंक — संक्षिप्त कथा एक ही भाग में।
  • सीमित पात्र (विश्वनाथ, रेवती, दो मेहमान, बच्चे, पड़ोसी, आगंतुक)।
  • एक ही स्थान (विश्वनाथ का घर) और कम समय में घटना।
  • कथा मुख्य रूप से संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।
  • रंगमंच-निर्देश — कोष्ठक में अभिनय, हाव-भाव, प्रवेश-प्रस्थान के संकेत।
  • आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान, समय और वेशभूषा का उल्लेख।
  • मंचन योग्य — अभिनय के लिए लिखी गई।
नीचे दिए वाक्य सही लगें तो ‘हाँ’, सही न लगें तो ‘नहीं’ लिखिए।
वाक्यहाँ / नहीं
1. पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँ ✔
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहीं ✘
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँ ✔
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहीं ✘
5. घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहीं ✘
6. कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँ ✔
7. पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ ✔
अभिनय की बारी: यह मंचन-गतिविधि है — समूह में पात्र बाँटकर, कुर्सी-मेज जैसी आस-पास की वस्तुओं से, 10–15 मिनट की प्रस्तुति तैयार करें। चाहें तो वेशभूषा (पगड़ी, धोती, बंडी) जोड़कर रोचक बनाएँ।
🔤

भाषा की बात

विशेष प्रयोग, मुहावरे, ‘ही’ व ‘तो’ से बल
विशेष प्रभाव उत्पन्न करने वाले शब्द-प्रयोग (छाँटकर लिखिए)
उदाहरण
  • “मकान है कि भट्टी!” — गरमी की तीव्रता।
  • “इस जेलखाने में सड़ना होगा।” — घुटन व विवशता।
  • “शरीर मारे गरमी के उबल उठा।” / “दीवारें तप रही हैं।”
  • प्राण सूखे जा रहे हैं।” / “जान में जान आई।”
  • “साँस बंद हो जाएगी।” / “सिर फटा जा रहा है।”
मुहावरे — पहचान, अर्थ और वाक्य-प्रयोग
मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
दिन-रात एक करनाबहुत कठिन परिश्रम करनाकिसान दिन-रात एक करके फसल उगाता है।
खाक में मिलनापूरी तरह नष्ट/बरबाद हो जानाआग लगने से उसका सारा कारोबार खाक में मिल गया।
जान में जान आनाराहत/चैन मिलनाबेटे का फोन आते ही माँ की जान में जान आई।
प्राण सूखनाबहुत घबरा जानापरिणाम सुनते ही उसके प्राण सूख गए।
सिर फटनातेज़ सिरदर्द होनाइतने शोर से मेरा सिर फटा जा रहा है।
बात पर बल देना — ‘ही’

“वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा।” — यहाँ ‘ही’ इस बात पर बल देता है कि ‘अंततः ढूँढ़कर ही माना/रहा’ — दृढ़ता और निश्चय का भाव। ‘ही’ हटाते ही (“ढूँढ़कर रहा”) यह विशेष बल समाप्त हो जाता है, वाक्य सामान्य कथन बन जाता है।

ख — ‘ही’ का उचित प्रयोग
  • विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे (और किसी के नहीं)।
  • विश्वनाथ के अतिथि यहीं रुकेंगे (यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं)।
  • विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही (यहाँ रुकना निश्चित है)।
‘तो’ का स्थान बदलने से अर्थ-परिवर्तन
उत्तर
  • “तुम नहाने तो जाओ।” → कम-से-कम नहाने की क्रिया पर बल/प्रेरणा।
  • “तुम तो नहाने जाओ।” → ‘तुम’ (कर्ता) पर बल — बाकी की बात बाद में।
  • “तुम नहाने जाओ तो।” → शर्त/प्रतीक्षा का भाव (जाओ तो सही!)।
नए वाक्य: “मैं ही जाऊँगा।” · “आज तो ज़रूर बारिश होगी।”
पाठ से आगे
‘मान न मान, मैं तेरा मेहमान’
नन्हेमल और बाबूलाल — बिस्तर व संदूक लेकर पहुँचे ‘नए मेहमान’
🗣️

आपकी बात

अपने अनुभव साझा कीजिए
विश्वनाथ दुविधा में है — क्या आपके सामने कभी ऐसी दुविधा आई जब सही-गलत समझने में समय लगा?
मार्गदर्शन

यह व्यक्तिगत अनुभव वाला प्रश्न है। उदाहरण — “एक बार दोस्त ने नक़ल करने को कहा; मैं समझ नहीं पा रहा था कि दोस्ती निभाऊँ या ईमानदारी। कुछ देर सोचकर मैंने मना कर दिया।” अपना सच्चा अनुभव सरल भाषा में लिखें।

आपके अच्छे मित्र कौन हैं? वे क्यों प्रिय हैं?
मार्गदर्शन

मित्र का नाम और गुण लिखें — जैसे विश्वास, सहायक स्वभाव, ईमानदारी, साथ खेलना-पढ़ना। नन्हेमल–बाबूलाल की तरह अच्छे मित्र सुख-दुख में साथ देते हैं।

किसी संबंधी/मित्र के घर जाने से पहले आप क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर (संकेत)
  • पहले से फोन/संदेश द्वारा सूचना देना।
  • सही पता व रास्ता मालूम करना।
  • छोटा-सा उपहार/मिठाई ले जाना।
  • उचित समय चुनना, ज़रूरी सामान साथ रखना।
आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार सहयोग करते हैं?
उत्तर (संकेत)

आवश्यकता पर सामान देना, बीमारी में सहायता, बच्चों/बुज़ुर्गों का ध्यान, त्योहारों में मेल-जोल, उनके न होने पर घर का ध्यान रखना — एकांकी के निर्दयी पड़ोसी के विपरीत व्यवहार।

सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर

पहले से सूचना देकर आना, मेज़बान को अनावश्यक कष्ट न देना, विनम्र व मर्यादित रहना, घर के काम में सहयोग करना और सीमित समय ठहरना — नन्हेमल–बाबूलाल की तरह बिन-बुलाए, बेपरवाह व बोझ बनने वाला व्यवहार नहीं।

🛡️

सावधानी और सुरक्षा

विश्वनाथ ने बिना परिचय पूछे अनजान लोगों को घर में आने दिया। आप उनके स्थान पर क्या करते?
उत्तर
  • पहले उनका परिचय व पहचान-पत्र पूछता।
  • “किसने भेजा है” — फोन से सत्यापन करता।
  • पुष्टि से पहले उन्हें घर के निजी हिस्से/कमरे तक न जाने देता।
  • संदेह होने पर विनम्रता से निकटवर्ती होटल/धर्मशाला का रास्ता बताता।
माता-पिता की अनुपस्थिति में कोई अपरिचित आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर
  • दरवाज़ा पूरा न खोलें; चेन/पीप-होल से बात करें।
  • अनजान को भीतर न आने दें; परिचय व उद्देश्य पूछें।
  • तुरंत माता-पिता/पड़ोसी को फोन से सूचित करें।
  • कोई निजी जानकारी (घर में कौन है, कब लौटेंगे) न बताएँ।
  • आपात स्थिति में हेल्पलाइन (112 / 1098) पर संपर्क करें।
✍️

सृजन

कहानी अपने शब्दों में
इस एकांकी में कही गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।
नमूना कहानी

एक दिन भीषण गरमी की रात मेरे घर में दो अनजान मेहमान आ गए। पसीने से तर वे बड़े आराम से अंदर आ बैठे और ठंडा पानी, बरफ माँगने लगे। पिताजी (विश्वनाथ) ने कई बार पूछा कि वे कौन हैं और कहाँ से आए, पर वे ठीक उत्तर नहीं देते — कभी ‘संपतराम’ तो कभी ‘जगदीशप्रसाद’ का नाम लेते और हमें ही अपना परिचित बताते। माँ सिरदर्द और गरमी से परेशान थीं, फिर भी मेहमान खाने और नहाने की फरमाइश करते रहे। उनकी वजह से पड़ोसी से कहासुनी भी हुई। आखिर पता चला कि वे तो पिछली गली के ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे — गलत घर आ गए थे! तभी असली मेहमान — माँ के भाई (मामा) — चार घंटे भटककर पहुँचे, जिनका तार समय पर नहीं मिला था। थकी-हारी माँ अब खुशी-खुशी भाई के लिए खाना बनाने उठ खड़ी हुईं। इस तरह ‘नए मेहमान’ की उलझन भरी रात हँसी और अपनेपन के साथ बीती।

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तार से संदेश

“क्या मेरा तार नहीं मिला?”
तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ — यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर

एकांकी में संदेश भेजने के लिए तार (टेलीग्राफ) का उपयोग हुआ है, जो बीसवीं सदी के मध्य में संदेश का प्रमुख व तेज़ साधन था। लेखक उदयशंकर भट्ट (1898–1966) को देखते हुए रचना लगभग 1940–1960 के दशक की मानी जा सकती है। अतः आज (2026) से यह लगभग 70–80 वर्ष पहले लिखी गई होगी। (भारत में तार सेवा 2013 में पूर्णतः बंद हो गई।)

आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर

मोबाइल फोन व SMS, WhatsApp/मैसेजिंग ऐप, ई-मेल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया तथा डाक/कूरियर सेवा।

आप संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
मार्गदर्शन

व्यक्तिगत उत्तर — सामान्यतः WhatsApp / मोबाइल फोन, क्योंकि यह तेज़, सस्ता और सुविधाजनक है।

किसी प्रिय व्यक्ति को पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।
यह लेखन-गतिविधि है — औपचारिक/अनौपचारिक पत्र के प्रारूप (स्थान-तिथि, संबोधन, विषय-वस्तु, अभिवादन, हस्ताक्षर) में पत्र लिखकर लिफ़ाफ़े पर पता-पिनकोड के साथ डाक में डालें।
📏

नाप, तौल और मुद्राएँ

“साढ़े नौ आने गज” — चरणबद्ध गणना
एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर
$$1\ \text{रुपया} \;=\; 16\ \text{आने}$$

पुरानी (दशमलव-पूर्व) भारतीय मुद्रा में एक रुपया सोलह आने का होता था।

चार आने में कितने पैसे होते हैं?
चरणबद्ध हल
$$1\ \text{रुपया} = 16\ \text{आने} = 100\ \text{पैसे (दशमलव)}$$ $$1\ \text{आना} = \frac{100}{16}\ \text{पैसे} = 6.25\ \text{पैसे}$$ $$\therefore\; 4\ \text{आने} = \frac{4}{16}\ \text{रुपया} = \frac{1}{4}\ \text{रुपया} = 25\ \text{पैसे}$$

अर्थात् चार आने = एक चवन्नी = 25 पैसे। (पुरानी प्रणाली में 4 आने = 16 पुराने पैसे होते थे।)

आपके आस-पास ‘गज’ शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में होता है?
उत्तर

‘गज’ लंबाई/कपड़ा नापने की इकाई है। आज भी कपड़े की दुकान व दर्जी “इतने गज कपड़ा” कहकर इसका प्रयोग करते हैं। (एकांकी में नन्हेमल “छह गज मलमल”, “साढ़े नौ आने गज” कहता है।)

एक गज में कितनी फीट होती हैं?
उत्तर
$$1\ \text{गज} \;=\; 3\ \text{फीट} \;=\; 36\ \text{इंच} \;\approx\; 0.9144\ \text{मीटर}$$
🌿

झरोखे · साझी समझ · खोजबीन

झरोखे से — निराला जी का आतिथ्य
सार

कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ सादगी भरे जीवन के बावजूद अपने आतिथ्य-भाव के लिए प्रसिद्ध थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक ‘पथ के साथी’ के अनुसार वे अतिथि के सत्कार में जी-जान से जुट जाते थे, भोजन बनाने से बर्तन माँजने तक सहर्ष करते थे — उनमें वही पुरातन ग्रामीण संस्कार था, जो आधुनिक दिखावटी आतिथ्य से भिन्न है।

साझी समझ — अतिथि का अभिवादन व पारंपरिक व्यंजन
मार्गदर्शन

भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा है। अभिवादन — हाथ जोड़कर “नमस्ते/प्रणाम”, बड़ों के पैर छूना, मुस्कुराकर स्वागत। राजस्थान/मध्यप्रदेश का पारंपरिक व्यंजन जो खिलाना चाहें — जैसे दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी, पोहा-जलेबी आदि (अपने क्षेत्र अनुसार लिखें)।

खोजबीन के लिए — ‘आने’, ‘गज’, ‘तार’
संक्षिप्त जानकारी
  • आना — पुरानी मुद्रा; 1 रुपया = 16 आने (1957 में दशमलव प्रणाली से समाप्त)।
  • गज — लंबाई की इकाई; 1 गज = 3 फीट; कपड़ा मापने में प्रचलित।
  • तार (टेलीग्राफ) — विद्युत संकेतों से तेज़ संदेश भेजने का यंत्र; भारत में सेवा 2013 में बंद।
और विस्तृत जानकारी के लिए अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता लें।

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