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NCERT Solution

Chapter 1 : स्वदेश (कविता) (Swadesh) (NCERT Solution) class 8th hindi

Class 8 · Hindi (Malhar) · Chapter 1 : स्वदेश (कविता) (Swadesh) · All Board · All Medium · 4 views

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भारत
कक्षा 8 • मल्हार • पाठ 1

स्वदेश

कवि — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972)

देश-प्रेम का आह्वान गीत सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर सरल व विस्तृत व्याख्या
भाग 1
📖

पाठ से

पाठ पर आधारित अभ्यास प्रश्न

मेरी समझ से

क-1“वह हृदय नहीं है पत्थर है” — इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
  • सामाजिकता से
  • संवेदनहीनता से
  • कठोरता से
  • नैतिकता से
व्याख्या

पत्थर कठोर और भावशून्य होता है। उसमें कोई संवेदना या कोमलता नहीं होती। कवि कहना चाहता है कि जिस व्यक्ति के हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह हृदय पत्थर के समान कठोर और संवेदनहीन है। इसीलिए ‘संवेदनहीनता’ और ‘कठोरता’ दोनों सही उत्तर हैं।

क-2निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
  • देश की प्रगति
  • देश के प्रति प्रेम
  • देश की सुरक्षा
  • देश की स्वतंत्रता
व्याख्या

पूरी कविता में बार-बार यह टेक (पंक्ति) दोहराई गई है — “जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” कवि का सारा बल इसी बात पर है कि हृदय में देश के प्रति प्रेम होना चाहिए। प्रगति, सुरक्षा व स्वतंत्रता तो इसी प्रेम के परिणाम हैं, परन्तु कविता का मुख्य भाव देश-प्रेम ही है।

क-3“हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
  • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
  • देश की शासन व्यवस्था के लिए
  • देश के समस्त नागरिकों के लिए
  • देश के सभी प्राणियों के लिए
व्याख्या

कवि कहता है कि इस देश के सभी नागरिक ही इसके राजा-रानी हैं। अर्थात् यह देश किसी एक का नहीं, बल्कि हम सबका अपना है और इसकी देखभाल व उन्नति का दायित्व हम सब नागरिकों पर है।

क-4कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
  • जिसमें साहस की कमी है
  • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
  • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
  • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
व्याख्या

कविता की मूल टेक है — “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” अतः कवि के अनुसार वही हृदय पत्थर के समान है जिसमें देश-प्रेम (स्वदेश का प्यार) का भाव नहीं है।

हो सकता है आपके साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। आपने ये उत्तर ही क्यों चुने — चर्चा कीजिए।
आदर्श उत्तर

मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कविता के मूल भाव से सीधे जुड़ते हैं — पत्थर का अर्थ है कठोरता व संवेदनहीनता; कविता की हर पंक्ति देश-प्रेम की ओर संकेत करती है; तथा ‘हम’ शब्द देश के सभी नागरिकों के स्वामित्व को दर्शाता है। कुछ साथियों ने “स्नेह का भाव नहीं” भी चुना होगा, जो आंशिक रूप से सही है, परन्तु कविता का केंद्रीय बल ‘देश-प्रेम’ पर है, इसलिए मेरा उत्तर अधिक उपयुक्त है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव/संदर्भ से सही मिलान:
स्तंभ 1 — (1)जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
स्तंभ 2 — (3)जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
स्तंभ 1 — (2)जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
स्तंभ 2 — (4)जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
स्तंभ 1 — (3)जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
स्तंभ 2 — (1)जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
स्तंभ 1 — (4)सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
स्तंभ 2 — (2)जैसे युद्ध में तोप-तलवार चाहिए, वैसे ही मनुष्य की प्रगति के लिए साहस व इच्छाशक्ति चाहिए।
सही जोड़े: 1 → 3,   2 → 4,   3 → 1,   4 → 2

पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”
भाव / व्याख्या

कवि कहता है कि यह बात निश्चित और निःसंदेह है कि प्राण (जान) एक न एक दिन इस संसार से चले ही जाएँगे — अर्थात् मृत्यु अटल है। जैसे ‘काल रूपी दीपक’ निरंतर जलता रहता है और परवाने (पतंगे) उस पर जलकर मर मिटते हैं, वैसे ही मनुष्य का जीवन भी क्षणभंगुर है। इसलिए कवि प्रेरणा देता है कि जब मरना निश्चित ही है, तो क्यों न देश के लिए जीवन समर्पित करके सार्थक मृत्यु को गले लगाया जाए।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
भाव / व्याख्या

कवि कहता है कि देश की उन्नति और रक्षा का सारा दायित्व हमारे अपने हाथों में है। इसके लिए हमें तोप-तलवार जैसे हथियारों की आवश्यकता नहीं — हमारा साहस, परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति ही हमारे सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं। अंत में कवि फिर दोहराता है कि जिस हृदय में देश का प्यार नहीं, वह तो पत्थर के समान निर्जीव व कठोर है।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
भाव / व्याख्या

जिस हृदय में कोमल भावनाएँ, प्रेम, करुणा और संवेदना का प्रवाह (रस-धार) नहीं बहता, वह हृदय जीवित होते हुए भी पत्थर के समान निर्जीव है। सच्चा मनुष्य वही है जिसका हृदय भावनाओं से परिपूर्ण हो और जिसमें अपने देश के प्रति गहरा प्रेम हो।

सोच-विचार के लिए

“हम हैं जिसके राजा-रानी” — पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर

‘राजा-रानी’ देश के सभी नागरिकों को कहा गया है। ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि यह देश हम सबका अपना है, इस पर हमारा अधिकार है और हम ही इसके स्वामी हैं। जैसे राजा-रानी अपने राज्य की देखभाल व रक्षा करते हैं, वैसे ही प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश की उन्नति व रक्षा का दायित्व निभाए।

‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता?
उत्तर

‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है — समय और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना, प्रगति करना तथा मिल-जुलकर रहना। जो व्यक्ति समय व समाज के साथ नहीं चलता, वह पीछे छूट जाता है और लोग उसे भुला देते हैं। इसी कारण संसार उसका नहीं हो पाता — अर्थात् समाज में उसका कोई महत्व या स्थान नहीं रह जाता।

“उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर

‘पसीजना’ का अर्थ है — द्रवित होना, हृदय का पिघलना। कवि कहता है कि जिस व्यक्ति का हृदय अपने देश के दुख-दर्द को देखकर पिघलता नहीं, जो देश के लिए कोई करुणा या प्रेम महसूस नहीं करता, वह व्यक्ति इस धरती (भू) पर केवल बोझ है। ऐसे संवेदनहीन व्यक्ति का जीवित रहना निरर्थक है।

आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं?
आदर्श उत्तर

देश-प्रेम का अर्थ केवल सीमा पर युद्ध करना नहीं है। अपने देश की मिट्टी, संस्कृति, भाषा और प्राकृतिक संसाधनों से प्रेम करना, देश की उन्नति में योगदान देना, स्वच्छता बनाए रखना, नियमों का पालन करना, ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना, ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना — यह सब देश-प्रेम के ही रूप हैं। संक्षेप में, अपने आचरण से देश को बेहतर बनाना ही सच्चा देश-प्रेम है।

यह रचना एक आह्वान गीत है। इसकी अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर

इस आह्वान गीत की मुख्य विशेषताएँ हैं —

ओज व जोश से भरी भाषा जो पाठक के मन में देश-प्रेम जगाती है।
‘नहीं’ शब्द की पुनरावृत्ति तथा टेक का बार-बार दोहराव, जिससे भाव गहराता है।
तुकांत व लयात्मकता (सार-पार-भार, रानी-पानी आदि) से गेयता आई है।
प्रश्न-शैली का प्रयोग, जो पाठक को सोचने व झकझोरने के लिए प्रेरित करती है।
• सरल खड़ी बोली में बलिदान, साहस व आत्मविश्वास का संदेश।

अनुमान और कल्पना से

“जिसने कि खजाने खोले हैं” — इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
प्राचीन गुफा-चित्र
भारत की प्राचीन धरोहर — गुफा-चित्र (ज्ञान व संस्कृति का खजाना)
अनुमानित उत्तर

यहाँ ‘खजाने’ से तात्पर्य भारत की प्राकृतिक संपदा (सोना, खनिज, रत्न, उपजाऊ भूमि, नदियाँ, वन) तथा ज्ञान-संपदा (वेद, शास्त्र, विज्ञान, कला व संस्कृति) से है। भारत ने सदियों से विश्व को अनेक बहुमूल्य रत्न — चाहे वे ज्ञान के हों या प्रकृति के — खुले हृदय से दिए हैं। इसीलिए कहा गया कि इस देश ने ‘खजाने खोल दिए हैं’।

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” — ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर

‘उगे-बढ़े’ शब्द देश के नागरिकों (हम सब मनुष्यों) के लिए कहा गया है। हम इसी देश की मिट्टी में जन्मे, इसी का अन्न-जल पाकर पले-बढ़े। यह कहकर कवि यह भाव जगाना चाहता है कि जिस धरती ने हमें जीवन व पोषण दिया, उसके प्रति हमारे मन में गहरा लगाव और कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए।

“वह हृदय नहीं है पत्थर है” — ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर

पत्थर कठोर, भावहीन और संवेदनाशून्य होता है। जिस हृदय में देश-प्रेम और कोमल भावनाएँ नहीं हैं, वह भी पत्थर जैसा ही कठोर व निर्जीव होता है। इस तुलना (रूपक) द्वारा कवि संवेदनहीन हृदय पर तीखा कटाक्ष करता है और देश-प्रेम के महत्व को और अधिक प्रभावशाली ढंग से उभारता है।

कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वह आपसे क्या कहेगा और आप उसे क्या कहेंगे?
कल्पनात्मक उत्तर

पत्थर कहता है — “जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी, रगड़-रगड़कर मुझे चिकना बनाती थी। मैं इधर-उधर लुढ़कता रहता था। फिर एक दिन किसी ने मुझे उठाकर भवन की नींव में रख दिया। मैं कठोर हूँ, चुपचाप सबका भार सहता हूँ, पर बोल नहीं सकता।”

मैं उससे कहूँगा — “हे पत्थर! तुम कठोर ज़रूर हो, पर इमारतों की नींव बनकर तुम बहुत उपयोगी हो। फिर भी मैं चाहूँगा कि मनुष्य का हृदय तुम्हारे जैसा कठोर कभी न बने; उसमें तो प्रेम, करुणा और अपने देश के लिए संवेदना का प्रवाह सदा बहता रहना चाहिए।”

देश के किन-किन संसाधनों/वस्तुओं को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर

संरक्षण की आवश्यकता वाले संसाधन — जल, वन व पेड़-पौधे, वन्य-जीव, नदियाँ, स्वच्छ वायु, उपजाऊ मिट्टी, ऐतिहासिक स्मारक/धरोहरें, ऊर्जा (बिजली) तथा खनिज।

क्यों — ये सभी संसाधन सीमित हैं और प्रदूषण व अति-उपयोग के कारण तेज़ी से घट रहे हैं। इन्हें बचाना पर्यावरण-संतुलन, देश की सुंदरता-पहचान तथा आने वाली पीढ़ियों के सुखद भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कविता की रचना

शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर

‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ की भाँति तुक मिलाने से कविता में लय, संगीतात्मकता और मधुरता आ गई है। इससे कविता पढ़ने-सुनने में मधुर व प्रवाहपूर्ण लगती है, याद रखना आसान हो जाता है और भाव अधिक प्रभावशाली ढंग से मन तक पहुँचते हैं।

कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर

तुकांत व अनुप्रास से लय।
• टेक की पुनरावृत्ति — “वह हृदय नहीं है पत्थर है”।
ओजपूर्ण शब्दावली व सरल खड़ी बोली।
प्रश्न-शैली — “क्या तोप नहीं तलवार नहीं?”।
• सुंदर बिंब/प्रतीक — काल-दीप, परवाने, पत्थर, खजाने।
• ‘है’ को पंक्ति के आरंभ में रखकर लयात्मकता।

📝 आपकी कविता — देश-प्रेम पर कविता को आगे बढ़ाइए।
नमूना (आदर्श) पंक्तियाँ
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो माटी का कर्ज़ न चुका सके,
ऐसा कोई किरदार नहीं॥

हम मिलकर देश सजाएँगे,
घर-घर ज्ञान का दीप जलाएँगे।
हर कोना स्वच्छ बनाएँगे,
यह वतन हमें है प्यारा रे॥
विद्यार्थी अपने विचारों से ऐसी ही तुकांत पंक्तियाँ जोड़कर कविता आगे बढ़ा सकते हैं।

भाषा की बात

शब्द से जुड़े शब्द — ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।
स्वदेशीस्वराजस्वतंत्रता स्वदेश मातृभूमिराष्ट्रप्रेमदेशभक्ति स्वाभिमानस्वावलंबनवतन जन्मभूमिराष्ट्रध्वजदेशवासी
विराम चिह्नों को समझें — योजक चिह्न (-) के स्थान पर का / की / के / में में से उपयुक्त शब्द जोड़िए।
संसार-संगजो चल न सका संसार के संग
रस-धारबहती जिसमें रस की धार नहीं
दाना-पानीपाया जिसमें दाना और पानी
माता-पिताहैं माता पिता बंधु जिसमें
राजा-रानीहम हैं जिसके राजा और रानी
जाति-उद्धारजिससे न जाति का उद्धार हुआ
योजक चिह्न दो शब्दों के बीच परस्पर संबंध स्पष्ट करने और उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।
शब्द-मित्र — ‘है/हैं’ को पंक्ति के आरंभ में रखकर पंक्तियों को पुनः लिखिए और सौंदर्य में परिवर्तन देखिए।
मूल: “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी॥”
पुनर्लेखन

“जिस पर हैं मरते ज्ञानी भी, जिस पर है दुनिया दीवानी॥”

परिवर्तन: जब ‘है/हैं’ पंक्ति के आरंभ में आता है तो कविता में लयात्मकता व गेयता बढ़ जाती है और वह अधिक मधुर लगती है। यदि ‘है’ को अंत में रखें (“ज्ञानी भी मरते हैं जिस पर”) तो वह गद्य जैसी लगने लगती है तथा उसका काव्य-सौंदर्य कम हो जाता है।

समानार्थी शब्द — दिए गए शब्दों के समानार्थी छाँटकर लिखिए।
भू
धरा, पृथ्वी
दीप
प्रदीप, दीपक
हृदय
दिल, जी
तलवार
कृपाण, असि
दुनिया
संसार, जग
पत्थर
पाहन, पाषाण
🏷️ कविता का शीर्षक — यदि किसी एक पंक्ति को नया शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
आदर्श उत्तर

मैं शीर्षक चुनूँगा — “वह हृदय नहीं है पत्थर है” अथवा “जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं”

कारण: यही पंक्ति पूरी कविता की केंद्रीय भाव-रेखा (टेक) है और बार-बार दोहराई गई है। यह सीधे-सीधे देश-प्रेम के महत्व को व्यक्त करती है तथा पाठक के हृदय को झकझोरती है, इसलिए यह सबसे उपयुक्त शीर्षक होगा।

भाग 2
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पाठ से आगे

विस्तार / सृजनात्मक प्रश्न

आपकी बात

नीचे दिए चित्रों में से उन पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश-प्रेम’ की श्रेणी में रखेंगे (✗ = देश-प्रेम नहीं)।
पौधों को पानी देना
पौधों को पानी देनापर्यावरण व प्रकृति का संरक्षण — देश-प्रेम।
रेल में कूड़ा फैलाना
रेल में कूड़ा फैलानासार्वजनिक स्थान को गंदा करना — देश-प्रेम नहीं।
खेल-प्रतियोगिता (कुश्ती)
खेल-प्रतियोगिता (कुश्ती)खेल भावना से देश का नाम रोशन करना — देश-प्रेम।
हैंडपंप पर एक-दूसरे की मदद
हैंडपंप पर एक-दूसरे की मददआपसी सहयोग व दिव्यांग की सहायता — देश-प्रेम।
सैनिक का सम्मान करना
सैनिक का सम्मान करनादेश के रक्षक का आदर — देश-प्रेम।
बगीचे की सफ़ाई करना
बगीचे की सफ़ाई करनास्वच्छता बनाए रखना — देश-प्रेम।
किसान का खेत जोतना
किसान का खेत जोतनाअन्न उत्पादन व देश की सेवा — देश-प्रेम।
बुज़ुर्ग को सड़क पार कराना
बुज़ुर्ग को सड़क पार करानासहायता व सेवा-भाव — देश-प्रेम।
वृद्धजन की सहायता करना
वृद्धजन की सहायता करनाबड़ों के प्रति आदर व सेवा — देश-प्रेम।
स्मारक पर लिखना/गंदा करना
स्मारक पर लिखना/गंदा करनाऐतिहासिक धरोहर को नुकसान — देश-प्रेम नहीं।
तिरंगे को सलामी देना
तिरंगे को सलामी देनाराष्ट्रध्वज का सम्मान — देश-प्रेम।
कतार में अनुशासन से लगना
कतार में अनुशासन से लगनाअनुशासन व नियम-पालन — देश-प्रेम।
मना करने पर भी फूल तोड़ना
मना करने पर भी फूल तोड़नानियम तोड़ना व पौधों को हानि — देश-प्रेम नहीं।
खाली कमरे में बत्ती/पंखा चालू छोड़ना
खाली कमरे में बत्ती/पंखा चालू छोड़नाबिजली की बर्बादी — देश-प्रेम नहीं।
नल खुला छोड़कर पानी बहाना
नल खुला छोड़कर पानी बहानाजल की बर्बादी — देश-प्रेम नहीं।
अब अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
तर्क

देश-प्रेम केवल झंडे को सलामी देने तक सीमित नहीं है। पौधों को पानी देना, सफ़ाई करना, बुज़ुर्गों व ज़रूरतमंदों की मदद करना, अनुशासन से कतार में लगना, खेल में देश का नाम रोशन करना और सैनिकों का सम्मान करना — ये सभी कार्य देश व समाज को बेहतर बनाते हैं, इसलिए ये देश-प्रेम हैं।

इसके विपरीत, सार्वजनिक स्थान को गंदा करना, स्मारकों को नुकसान पहुँचाना, नियम तोड़कर फूल तोड़ना तथा पानी-बिजली की बर्बादी करना देश के संसाधनों व सौंदर्य को हानि पहुँचाते हैं, इसलिए ये देश-प्रेम के विरुद्ध हैं।

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” — विभिन्न स्वदेश-प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
सीमा पर तैनात सैनिक
सीमा पर तैनात सैनिक — तोप, बंदूक व तलवार उनके अस्त्र-शस्त्र हैं
विद्यार्थीपुस्तक, कलम, ज्ञान, लगन व अनुशासन
अध्यापकशिक्षा, ज्ञान, पुस्तक व उत्तम चरित्र-निर्माण
कृषकहल, फावड़ा, बीज, खेत व परिश्रम
चिकित्सकऔषधि, चिकित्सा-उपकरण व सेवा-भावना
वैज्ञानिकअनुसंधान, प्रयोग, नई खोजें व तर्कशक्ति
श्रमिकमेहनत, औज़ार व अथक परिश्रम
पत्रकारकलम, लेखनी, सच्ची ख़बर व निर्भीकता
🎵 अपनी भाषा अपने गीत
गतिविधि

यह कक्षा-गतिविधि है — सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं/गीतों का संकलन करें और किसी एक गीत की संगीतात्मक प्रस्तुति दें।

उदाहरण देशभक्ति गीत: ‘सारे जहाँ से अच्छा’, ‘वंदे मातरम्’, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’, ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’।

तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास

किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न होगा और किन से उदास?
आदर्श उत्तर

तिरंगा प्रसन्न होगा जब — मैंने मन लगाकर पढ़ाई की, स्वच्छता रखी, किसी ज़रूरतमंद की मदद की, सच बोला, समय का सदुपयोग किया, पानी-बिजली बचाई और राष्ट्रध्वज तथा बड़ों का सम्मान किया।

तिरंगा उदास होगा जब — मैंने गंदगी फैलाई, किसी से झगड़ा किया, झूठ बोला, समय व संसाधनों (पानी, बिजली) की बर्बादी की, या किसी सार्वजनिक संपत्ति/धरोहर को नुकसान पहुँचाया।

झरोखे से · साझी समझ

‘स्वदेश’ और ‘खादी गीत’ — दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है?
चरखा — खादी का प्रतीक
चरखा — स्वदेशी वस्त्र ‘खादी’ व आत्मनिर्भरता का प्रतीक
तुलनात्मक उत्तर

दोनों ही कविताएँ स्वतंत्रता-आंदोलन के समय राष्ट्रप्रेम जगाने के लिए लिखी गईं।

‘स्वदेश’ में कवि कहता है कि जिसके हृदय में देश का प्यार नहीं, वह पत्थर के समान है — यहाँ देश-प्रेम सीधे हृदय की भावना व बलिदान के रूप में व्यक्त हुआ है।

‘खादी गीत’ में देश-प्रेम स्वदेशी वस्त्र खादी के प्रति गर्व, अपनेपन व आत्मनिर्भरता के रूप में प्रकट हुआ है — खादी के धागे-धागे में माँ का मान, भाई का प्यार और नवजीवन की ज्योति का भाव भरा है।

अर्थात् एक कविता देश-प्रेम को भावना के रूप में और दूसरी उसे स्वदेशी आचरण व आत्मनिर्भरता के रूप में व्यक्त करती है।

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