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Quick revision notes

अष्टमः पाठः: हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः (Hitaṃ Manohāri Cha Durlabhaṃ Vacaḥ) Quick Revision Notes Class 8th Sanskrit (दीपकम्)

Class 7 · Sanskrit (दीपकम्) · Chapter 8 : हितं मनोहारी च दुर्लभं वचः (Hitaṁ Manohārī Cha Durlabhaṁ Vacaḥ) · All Board · All Medium · 1 views

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💬 सूक्ति का परिचय
Children embracing globe Earth Mata Bhoomi
✏️ माता भूमिः — बच्चे पृथ्वी को माँ की तरह प्यार कर रहे हैं
आचार्य ! 'सूक्तिः' इत्युक्ते कः अभिप्रायः ?
सूक्तिः इत्युक्ते 'सुन्दरं वचनम्' । सूक्तिषु जीवनमूल्यानि निहितानि भवन्ति ।
🔵 हिन्दी: आचार्य! 'सूक्ति' का क्या मतलब है?
सूक्ति का मतलब है 'सुन्दर वचन'। सूक्तियों में जीवन के मूल्य निहित होते हैं।
💡 सूक्ति = सु + उक्ति = सुन्दर वचन। ये हमें सही मार्ग दिखाते हैं।
न केवलं पठामः अपितु स्मरामः, जीवने आचरामः च ।
🔵 हिन्दी: केवल पढ़ें नहीं बल्कि याद करें और जीवन में आचरण भी करें।
💡 सूक्तियाँ पढ़कर भूलने के लिए नहीं — उन्हें जीवन में उतारने के लिए।
✦ ✦ ✦
📜 सूक्ति १ — माता भूमिः
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः ।।१।।
भूमि माता है, मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ।
अथर्ववेद से लिया गया — भारत का सबसे प्राचीन भूमि-वन्दन।
भावार्थः — पृथ्वी अस्मान् माता इव लालयति पालयति च । अतः भूमिः अस्माकं सर्वेषां माता अस्ति । वयं सर्वे अस्याः पृथिव्याः सन्तानाः स्मः ।
🔵 हिन्दी: अर्थात् — पृथ्वी हमें माँ की तरह पालती है, लालन-पालन करती है। इसलिए पृथ्वी हम सबकी माता है। हम सब इस पृथ्वी की सन्तान हैं।
💡 पृथ्वी हमें अन्न, जल, वायु — सब देती है। इसलिए वह माता है।
📜 सूक्ति २ — रत्न की महिमा
न रत्नमन्विष्यति, मृग्यते हि तत् ।।२।।
रत्न ग्राहक नहीं ढूंढता — ग्राहक रत्न को ढूंढते हैं।
यदि आपमें गुण हैं तो लोग आपको खुद ढूंढेंगे।
भावार्थः — हीरे-मोती जैसे रत्न ग्राहक की खोज नहीं करते, बल्कि ग्राहक ही रत्नों की खोज में आते हैं। वैसे ही यदि हम में गुण हैं तो गुणज्ञ (गुण पहचानने वाले) स्वयं आकर हमें ढूंढेंगे।
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: खुद को इतना काबिल बनाओ कि दुनिया तुम्हें ढूंढे — तुम्हें दुनिया को ढूंढने की जरूरत न पड़े।
💡 #BF360C
📜 सूक्ति ३ — शरीर = धर्म का साधन
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ।।३।।
शरीर ही निश्चित रूप से धर्म का प्रथम साधन है।
स्वस्थ शरीर = सब कुछ संभव।
भावार्थः — यदि अस्माकं शरीरं स्वस्थम् अस्ति तर्हि वयं स्वकर्तव्यस्य पालनं कर्तुं शक्नुमः । अतः अस्माभिः स्वशरीरस्य रक्षा सर्वथा करणीया यतः शरीरम् एव धर्मपालनस्य प्रथमं साधनम् अस्ति ।
🔵 हिन्दी: अर्थात् — यदि हमारा शरीर स्वस्थ है तो हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं। इसलिए हमें हमेशा शरीर की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि शरीर ही धर्म-पालन का प्रथम साधन है।
💡 पहले स्वास्थ्य, फिर बाकी सब। 'पहले शरीर' — यही आधुनिक विज्ञान भी कहता है।
📜 सूक्ति ४ — एक-एक से सब बनता है
क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् ।।४।।
एक-एक क्षण से विद्या और एक-एक कण से धन कमाना चाहिए।
धैर्य और निरन्तर प्रयास — यही सफलता का रहस्य।
भावार्थः — ज्ञान प्राप्त करने के लिए समय का निरन्तर उपयोग करना चाहिए। एक भी क्षण नष्ट नहीं करना चाहिए। वैसे ही धन का संग्रह करना हो तो निरन्तर रूपये का संचय करें। 'क्षणत्यागे कुतो विद्या, कणत्यागे कुतो धनम्।'
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: पल-पल पढ़ो = विद्या मिलेगी। पैसा-पैसा बचाओ = धन मिलेगा। छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर बड़ी सफलता बनती हैं।
💡 #BF360C
📜 सूक्ति ५ — हितकारी बोल
हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः ।।५।।
हितकारी और मनोहर वचन — दोनों एक साथ — दुर्लभ होते हैं।
यही इस पाठ का नाम भी है।
भावार्थः — जो बात हित (फायदेमन्द) हो और साथ ही मन को अच्छी लगे — ऐसा वचन बोलना बहुत कठिन होता है। कई बार हितकारी बात कड़वी होती है, और मनोहर बात हितकारी नहीं होती। दोनों का मेल दुर्लभ है।
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: सच और मीठा — दोनों एक साथ बोलना कठिन है। पर यही सर्वोत्तम वचन है।
💡 #BF360C
📚 @edugrown | दीपकम् | कक्षा ७

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