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Quick revision notes

पञ्चदशः अतिरिक्तम् अध्ययनम्: धातुरूपाणि एवं सन्धिः (परिशिष्टम् २) (Dhāturūpāṇi Evaṃ Sandhiḥ) Notes with Hindi Explanation Class 7th Sanskrit (दीपकम्)

Class 7 · Sanskrit (दीपकम्) · Appendix : धातुरूपाणि (Dhāturūpāṇi) · All Board · All Medium · 3 views

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⚙️ धातुरूपाणि — परिचय
Dhatu roop tables for path likh kara bhasha
✏️ धातुरूप तालिकाएँ — पठ्, लिख्, कृ, भाष्
सामान्यतः संस्कृतभाषायाम् २००० धातवः सन्ति । तेभ्यः 'तिङ्' प्रत्ययान् योजयामः चेत् ते एव तिङन्ताः भवन्ति ।
🔵 हिन्दी/अर्थ: सामान्यतः संस्कृत भाषा में लगभग 2000 धातुएँ (Root Verbs) हैं। उनमें 'तिङ्' प्रत्यय लगाने पर 'तिङन्त' शब्द बनते हैं — यानी क्रियापद।
💡 धातु = Verb Root. तिङन्त = Conjugated Verb. जैसे पठ् → पठति (पढ़ता है)।

🔢 धातुओं के तीन प्रकार:

  • परस्मैपदि: दूसरों के लिए क्रिया (पठ्, लिख्, गम् आदि) → 'ति, तः, न्ति' अंत
  • आत्मनेपदि: अपने लिए क्रिया (भाष्, यत् आदि) → 'ते, एते, न्ते' अंत
  • उभयपदि: दोनों रूपों में (जैसे कृ)
  • लकार = काल/अर्थ बताने वाला प्रत्यय
  • लट् = वर्तमान काल (Present)
  • लटृ् = भविष्यकाल (Future)
  • लङ् = भूतकाल (Past)
  • लोट् = आज्ञार्थ (Imperative)
  • विधिलिङ् = विध्यर्थ (Should/May)
✦ ✦ ✦
📋 लट्-लकार — वर्तमानकाल (Present Tense)
परस्मैपदि-धातूनां लट्-लकारस्य रूपाणि — पठ् धातुः
🔵 हिन्दी/अर्थ: परस्मैपदी धातुओं का वर्तमान काल (Present Tense) — पठ् (पढ़ना) धातु के रूप:
💡 पठ् = पढ़ना। इसी के साथ लिख्, खाद्, वद्, चल्, हस् आदि धातुएँ भी ऐसे ही चलती हैं।
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन हिन्दी
प्रथमपठतिपठतःपठन्तिपढ़ता है / पढ़ते हैं
मध्यमपठसिपठथःपठथतुम पढ़ते हो
उत्तमपठामिपठावःपठामःमैं/हम पढ़ते हैं
एवम् — लिख्, खाद्, वद्, मिल्, हस्, चल्, त्यज्, क्रीड्, नी(नय्), पा(पिब्), गम्(गच्छ्), दृश्(पश्य्), भू(भव्)
📋 आत्मनेपदि — भाष् धातु (Present)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन हिन्दी
प्रथमभाषतेभाषेतेभाषन्तेबोलता है
मध्यमभाषसेभाषेथेभाषध्वेतुम बोलते हो
उत्तमभाषेभाषावहेभाषामहेमैं/हम बोलते हैं
एवम् — स्पर्ध्, यत्, वृध्(वर्ध्), कूर्द्, कम्प्, राज्
✦ ✦ ✦
📋 लटृ्-लकार — भविष्यकाल (Future Tense)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन हिन्दी
प्रथमपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्तिपढ़ेगा
मध्यमपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथतुम पढ़ोगे
उत्तमपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामःमैं/हम पढ़ेंगे

विशेष धातुएँ — भविष्यकाल: अस् → भविष्यति | कृ → करिष्यति | श्रु → श्रोष्यति | दा → दास्यति

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📋 लङ्-लकार — भूतकाल (Past Tense)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन हिन्दी
प्रथमअपठत्अपठताम्अपठन्पढ़ा था
मध्यमअपठःअपठतम्अपठततुमने पढ़ा था
उत्तमअपठम्अपठावअपठाममैंने/हमने पढ़ा था

भूतकाल के विशेष धातु: अस् → आसीत् | कृ → अकरोत् | श्रु → अश्रृणोत् | दा → अददात्

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📋 लोट्-लकार — आज्ञार्थ (Imperative)
लोट्-लकारः — आज्ञार्थे, प्रार्थनार्थे, विध्यर्थे, निमन्त्रणार्थे, आमन्त्रणार्थे उपयुज्यते ।
🔵 हिन्दी/अर्थ: लोट् लकार का उपयोग: आज्ञा देने में, प्रार्थना करने में, विधि बताने में, निमंत्रण में और आह्वान करने में।
💡 जैसे: 'पठतु' = पढ़े (3rd person) | 'पठ' = पढ़ो (तुम/2nd person) | 'पठानि' = मैं पढूँ।
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन हिन्दी
प्रथमपठतुपठताम्पठन्तुपढ़े/पढ़ें
मध्यमपठपठतम्पठतपढ़ो
उत्तमपठानिपठावपठाममैं पढूँ / हम पढ़ें
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🔗 सन्धि — परिचय
Sandhi rules examples of swarnadirgh guna vriddhi yan
✏️ स्वर सन्धि के नियम और उदाहरण
उच्चारणसमये परस्परं वर्णानाम् अत्यन्तं सामीप्यं 'संहिता' भवति । यदा संहिता भवति तदा वर्णेषु परिवर्तनं भवति — एषः एव 'सन्धिः' ।
🔵 हिन्दी/अर्थ: जब बोलते समय दो वर्ण एक-दूसरे के बहुत पास आते हैं तो उन्हें 'संहिता' कहते हैं। जब संहिता होती है तो वर्णों में परिवर्तन होता है — इसी को 'सन्धि' कहते हैं।
💡 सन्धि = दो वर्णों के मिलने पर होने वाला परिवर्तन। जैसे: राम + अयन = रामायण।

1️⃣ सवर्णदीर्घ सन्धि

नियम: समान स्वर मिले तो दीर्घ बनता है।
अ + अ = आ → तत्र + अपि = तत्रापि
इ + इ = ई → रवि + इन्द्र = रवीन्द्र
उ + उ = ऊ → गुरु + उपदेश = गुरूपदेशः

2️⃣ गुण सन्धि

नियम: अ/आ + इ/ई = ए
पर + उपकार = परोपकारः (अ+उ=ओ)
देव + इन्द्र = देवेन्द्रः (अ+इ=ए)
महा + उत्सव = महोत्सवः (आ+उ=ओ)

3️⃣ वृद्धि सन्धि

नियम: अ/आ + ए/ऐ = ऐ
एक + एकम् = एकैकम् (अ+ए=ऐ)
तथा + एव = तथैव (आ+ए=ऐ)
अ/आ + ओ/औ = औ

4️⃣ यण् सन्धि

नियम: इ/ई + असवर्ण = य्
इति + अपि = इत्यपि (इ+अ=य)
सु + आगतम् = स्वागतम् (उ+आ=वा)
उ/ऊ + असवर्ण = व्

⚡ Quick Revision — सन्धि याद करें
  • सवर्णदीर्घ: अ+अ=आ | इ+इ=ई | उ+उ=ऊ (समान + समान = दीर्घ)
  • गुण: अ+इ=ए | अ+उ=ओ | अ+ऋ=अर् (गुण वर्ण: ए, ओ, अर्)
  • वृद्धि: अ+ए=ऐ | अ+ओ=औ (वृद्धि वर्ण: ऐ, औ)
  • यण्: इ→य् | उ→व् | ऋ→र् | ऌ→ल् (यण् वर्ण: य्, व्, र्, ल्)
🌟 विशेष धातुओं के रूप — एक नज़र में

अस् (होना) — वर्तमान

पुरुषएकद्विबहु
प्रथमअस्तिस्तःसन्ति
मध्यमअसिस्थःस्थ
उत्तमअस्मिस्वःस्मः

कृ (करना) — वर्तमान

पुरुषएकद्विबहु
प्रथमकरोतिकुरुतःकुर्वन्ति
मध्यमकरोषिकुरुथःकुरुथ
उत्तमकरोमिकुर्वःकुर्मः
📚 @edugrown | दीपकम् | कक्षा ७

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