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NCERT Solution

Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 10 | Bharati Jai Vijay Kare | NCERT Solutions भारति, जय, विजय करे!

Class 9 · Hindi (Ganga) · Chapter-10 भारती, जय, विजय करो! (Bharati, Jai, Vijay Karo!) · All Board · ENGLISH · 8 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD
10

भारति, जय, विजयकरे!

संपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण हल · काव्य खंड · कक्षा गंगा (हिंदी)

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
कवि — सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जन्म: 1899, महिषादल (बंगाल) · मूल निवासी: गढ़ाकोला, उन्नाव (उ.प्र.) · निधन: 1961 · छायावाद के स्तंभ; मुक्त छंद के प्रवर्तक
भारत का प्राकृतिक सौंदर्य — हिमालय, सूर्य, गंगा, हरे खेत
कविता का दृश्य — हिमालय (मुकुट), गंगा (हार), वन-खेत (वस्त्र)
🎯

मेरे उत्तर मेरे तर्क

सटीक उत्तर चुनिए और कारण भी समझिए
1“भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से—
  • (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है।
  • (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है।
  • (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
  • (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
🧠 तर्क

कविता में भारत के ज्ञान (प्राण प्रणव ओंकार की गूँज), प्रकृति (हिमालय, गंगा, वन, सागर) और संपन्नता (कनक-शस्य = सोने जैसी फसलें) — तीनों की प्रशंसा एक साथ की गई है। इसलिए (ग) सबसे व्यापक व सही उत्तर है।

2“कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है—
  • (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता
  • (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य
  • (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता
  • (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास
🧠 तर्क

‘कनक-शस्य’ का अर्थ है — सोने जैसी (सुनहरी, लहलहाती) फसलें। यह भारत की उपजाऊ धरती व धन-धान्य की संपन्नता को दर्शाता है। ‘कमलधरे’ अर्थात् कमल धारण करने वाली — यह श्री व समृद्धि का प्रतीक है।

3समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं—
  • (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण/ धवल धार हार गले
  • (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल/ धोता शुचि चरण युगल
  • (ग) भारति, जय, विजयकरे/ कनक-शस्य-कमलधरे!
  • (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार/ शतमुख-शतरव-मुखरे!
🧠 तर्क

“ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!” अर्थात् भारत की वाणी/कीर्ति सैकड़ों मुखों व सैकड़ों स्वरों में गूँजकर सभी दिशाओं में फैल रही है। यह विश्वभर में भारत के महत्व व गौरव के उद्घोष को व्यक्त करता है।

4कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
  • (क) सरल, बोल-चाल की भाषा
  • (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त
  • (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण
  • (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक
🧠 तर्क

कविता में ‘कनक-शस्य’, ‘गर्जितोर्मि’, ‘ज्योतिर्जल’, ‘प्रणव ओंकार’, ‘शतमुख-शतरव’ जैसे संस्कृतनिष्ठ व समासयुक्त शब्दों की भरमार है, जो इसे ओजपूर्ण व भव्य बनाती है।

5‘तरु-तृण-वन-लता’ को वस्त्र और ‘गंगा-धारा’ को गले का हार चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
  • (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक
  • (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम
  • (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक
  • (घ) सामाजिक और राजनीतिक
🧠 तर्क

वन-वृक्ष-लता को भारत के वस्त्र और पवित्र गंगा को गले का हार बताकर कवि प्रकृति को राष्ट्र की देह का अभिन्न अंग व आभूषण मानते हैं। इससे प्रकृति के संरक्षण (पर्यावरणीय) और उसकी पवित्रता/गौरव (सांस्कृतिक) — दोनों प्रकार की चेतना का संदेश मिलता है।

📜

अर्थ और भाव

“लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल, धोता शुचि चरण युगल!”
📖 अर्थ व भाव

अर्थ — भारत-रूपी देवी के चरणों के नीचे लंका शतदल (सौ पंखुड़ियों वाले कमल) के समान शोभित है; और गरजती लहरों वाला सागर अपने जल से उसके दोनों पवित्र चरणों को धोता रहता है।

भाव — कवि भारत को एक दिव्य देवी के रूप में कल्पित करते हैं, जिसके चरण इतने पवित्र हैं कि समुद्र भी श्रद्धापूर्वक उन्हें धोता है। इससे भारत की भव्यता, पवित्रता व विशाल भौगोलिक गरिमा प्रकट होती है।

“प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!”
📖 अर्थ व भाव

अर्थ — भारत के प्राणों में ‘ॐ’ (प्रणव/ओंकार) की पवित्र ध्वनि बसी है; उसकी उदार दिशाएँ इस नाद से गूँज रही हैं, और वह सैकड़ों मुखों व सैकड़ों स्वरों से मुखरित (ध्वनित) है।

भाव — भारत केवल भूमि नहीं, बल्कि ज्ञान, अध्यात्म व अनेक स्वरों-विचारों से समृद्ध एक चेतन सत्ता है। ‘शतमुख-शतरव’ भारत की विविधता में एकता तथा उसकी कीर्ति के विश्वव्यापी प्रसार का संकेत देता है।

💭

मेरी समझ मेरे विचार

1कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
✒️ उत्तर

कविता में कवि की गहरी देशभक्ति व राष्ट्रप्रेम की भावना अभिव्यक्त हुई है। कवि भारत के प्रति श्रद्धा व गौरव रखते हुए उसकी विजय की कामना करते हैं तथा उसकी प्रकृति, ज्ञान-परंपरा व समृद्धि का ओजपूर्ण गुणगान करते हैं। भारत को देवी रूप में चित्रित करना उनकी मातृभूमि के प्रति पूज्य भावना को दर्शाता है।

2कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या प्रकृति का संरक्षण भी देशप्रेम है? क्यों?
✒️ उत्तर

प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन — कवि ने भारत को देवी रूप में कल्पित कर उसकी प्राकृतिक शोभा को उसके अंग-वस्त्र के रूप में दिखाया है — हिमालय उसका मुकुट, गंगा गले का हार, वन-वृक्ष-लता उसके वस्त्र, फूल आँचल में जड़े रत्न, और सागर उसके चरण धोता हुआ।

हाँ, प्रकृति का संरक्षण भी देशप्रेम है — क्योंकि नदी, पर्वत, वन हमारे देश की पहचान, धरोहर व जीवन-आधार हैं। इनका संरक्षण करना अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के समान है। प्रदूषित नदियाँ व कटते वन देश को कमज़ोर करते हैं, इसलिए इनकी रक्षा सच्चे देशप्रेम का ही रूप है।

3“कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत करती है?
✒️ उत्तर
  • कृषि-संपन्नता — ‘कनक-शस्य’ = सोने जैसी लहलहाती फसलें, यानी उपजाऊ धरती।
  • श्रम का सौंदर्य — खेतों की सुनहरी फसल किसानों के परिश्रम का प्रतीक है।
  • श्री व समृद्धि — ‘कमलधरे’ (कमल धारण करने वाली) — समृद्धि व पवित्रता का संकेत।
4“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट क्यों बताया गया है?
✒️ उत्तर

हिमालय भारत के उत्तर में सबसे ऊँचाई पर, सिर के स्थान पर स्थित है — जैसे राजा के सिर पर मुकुट सुशोभित होता है। उसकी श्वेत बर्फ़ीली चोटियाँ चमकते मुकुट-सी दिखती हैं, जो भारत की शोभा, गौरव व भव्यता को बढ़ाती हैं। साथ ही हिमालय शत्रुओं से रक्षा करने वाला प्रहरी भी है। इन्हीं कारणों से कवि ने उसे भारत का मुकुट कहा है।

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कविता का सौंदर्य

विशेषता दर्शाती पंक्तियाँ
✒️ उत्तर
विशेषताकविता की पंक्तियाँ
प्रकृति का मानवीकरण“धोता शुचि चरण युगल” (सागर भारत के चरण धोता है); भारत को देवी रूप में मुकुट, हार, वस्त्र पहनाए गए हैं।
आलंकारिक प्रयोग“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” (रूपक); “शतमुख-शतरव-मुखरे” (अनुप्रास); “गंगा… धवल धार हार गले” (रूपक)
समस्त पद / सामासिक पदकनक-शस्य, कमलधरे, गर्जितोर्मि, शतदल, ज्योतिर्जल, शतमुख, शतरव, हिम-तुषार
संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग“प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार”; “गर्जितोर्मि सागर-जल”
🗣️

विषयों से संवाद

1वर्तमान संदर्भ में भारत को नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो किन विशेषताओं व विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
✒️ नमूना उत्तर
  • विज्ञान व तकनीक — अंतरिक्ष अभियान (इसरो), डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप।
  • सांस्कृतिक विविधता — अनेक भाषाएँ, पर्व, नृत्य, खान-पान व ‘अनेकता में एकता’।
  • प्रकृति — हिमालय से समुद्र तक का सौंदर्य व जैव-विविधता।
  • लोकतंत्र व मूल्य — विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, समानता व सहिष्णुता।
  • युवा-शक्ति व खेल — ओलंपिक उपलब्धियाँ, युवाओं का योगदान।
2“शतमुख-शतरव-मुखरे!” — भारत के विविध पर्व, उत्सव व रीति-रिवाज ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ को कैसे साकार करते हैं?
✒️ नमूना उत्तर

‘शतमुख-शतरव’ अर्थात् सैकड़ों मुख व सैकड़ों स्वर — यह भारत की विविधता का प्रतीक है। दीवाली, ईद, क्रिसमस, पोंगल, बिहू, बैसाखी, ओणम जैसे अनेक पर्व अलग-अलग रूपों में मनाए जाते हैं, फिर भी सबमें प्रेम, सौहार्द व उल्लास का एक ही स्वर गूँजता है। यही विविधता में एकता ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती है।

3भारत को सुदृढ़ करने में प्रकृति, संस्कृति व ज्ञान-परंपरा के महत्व पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
✒️ नमूना लेख

भारत की त्रिवेणी — प्रकृति, संस्कृति व ज्ञान

भारत की शक्ति उसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा में निहित है। हिमालय, गंगा, उपजाऊ खेत व विशाल वन हमें जल, अन्न व जीवन देते हैं — यही प्राकृतिक संपदा देश का आधार है। हमारी संस्कृति अनेक भाषाओं, पर्वों व परंपराओं के बावजूद ‘अनेकता में एकता’ का संदेश देती है, जो समाज को जोड़े रखती है। वहीं वेद, उपनिषद, योग, गणित व आयुर्वेद जैसी प्राचीन ज्ञान-परंपरा ने विश्व को राह दिखाई है। जब हम इन तीनों — प्रकृति, संस्कृति व ज्ञान — का संरक्षण व विकास करते हैं, तभी भारत सच्चे अर्थों में सुदृढ़ व श्रेष्ठ बनता है।

4वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन ने नदियों व हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
✒️ नमूना उत्तर
  • नदियाँ — औद्योगिक कचरे व गंदगी से गंगा-यमुना जैसी नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं; जल-जीव व पेयजल संकट में हैं।
  • हिमालय — बढ़ते तापमान से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे बाढ़ व जल-संकट का खतरा बढ़ा है।
  • जलवायु — अनियमित वर्षा, सूखा व बाढ़ की घटनाएँ बढ़ी हैं; जैव-विविधता को क्षति पहुँची है।

अतः जिस गंगा को कवि ने भारत का ‘हार’ और हिमालय को ‘मुकुट’ कहा, उनकी रक्षा आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।

🧩

समास — समस्त पद व विग्रह

✒️ समास-विग्रह
समस्त पदसमास-विग्रहसमास का प्रकार
शतदलशत (सौ) दल → सौ पंखुड़ियों (दलों) वाला, अर्थात् कमलद्विगु (कमल के अर्थ में बहुव्रीहि भी)
ज्योतिर्जलज्योति (प्रकाश) रूपी जलकर्मधारय
शतमुखशत (सौ) मुखद्विगु
सागरजलसागर का जलतत्पुरुष (संबंध)

समास = संक्षेप। दो या अधिक शब्दों के मेल से बने शब्द को ‘समस्त पद’ और उसे अलग करने की प्रक्रिया को ‘समास-विग्रह’ कहते हैं।

अलंकार — समझ और प्रयोग

कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को लिखिए।
✒️ उत्तर — अनुप्रास
  • “शतमुख-तरव-ुखरे” — ‘श’ व ‘म’ की आवृत्ति।
  • वल ार ार गले” — ‘ध’ की आवृत्ति।
  • रु-तृण-वन-लता” — ‘त’ की आवृत्ति।
  • प्राण प्रणव” — ‘प्र’ की आवृत्ति।
रूपक अलंकार वाली पंक्तियाँ खोजिए तथा बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य/वस्तु को भारत का रूप माना है।
✒️ उत्तर — रूपक
पंक्तिप्राकृतिक दृश्य → भारत का रूप
“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार”हिमालय → भारत का मुकुट
“गंगा ज्योतिर्जल-कण, धवल धार हार गले”गंगा की धारा → भारत के गले का हार
“तरु-तृण-वन-लता वसन”वन-वृक्ष-लता → भारत के वस्त्र
“अंचल में खचित सुमन”फूल → आँचल में जड़े रत्न/आभूषण

इस प्रकार कवि ने हिमालय, गंगा, वन व पुष्प जैसे प्राकृतिक/भौगोलिक दृश्यों को भारत-रूपी देवी के अंगों व आभूषणों के रूप में चित्रित किया है।

🖋️

सृजन

1भारत को मनुष्य रूप में कल्पित कर सुसज्जित करने का अवसर मिले तो अपने राज्य के किन सांस्कृतिक तत्वों से साज-सज्जा करेंगे?
✒️ नमूना उत्तर
  • वेशभूषा — अपने राज्य का पारंपरिक परिधान (जैसे साड़ी/धोती/पगड़ी)।
  • आभूषण — क्षेत्रीय गहने व लोक-कला के नमूने।
  • पुष्प/चिह्न — राज्य का राजकीय पुष्प, पक्षी व प्रतीक।
  • हाथ में — लोक-वाद्य या पारंपरिक कला का प्रतीक।

(आप अपने राज्य — जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, बंगाल आदि — की विशेषताओं से इसे सजा सकते हैं।)

2भारत पर आधारित डाक टिकट / पोस्टर / पुस्तक का आवरण-पृष्ठ बनाइए — कौन-से प्रतीक व क्यों?
✒️ नमूना उत्तर
  • तिरंगा व अशोक चक्र — राष्ट्रीय एकता व सत्य-धर्म का प्रतीक।
  • हिमालय व गंगा — प्रकृति व पवित्रता।
  • कमल व मोर — राष्ट्रीय पुष्प व पक्षी।
  • लहलहाते खेत — कृषि-संपन्नता।

ये प्रतीक भारत की एकता, प्रकृति, संस्कृति व समृद्धि को एक झलक में प्रस्तुत करते हैं।

3नदी की यात्रा — गंगा की उद्गम से बंगाल की खाड़ी तक की यात्रा का रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
✒️ नमूना यात्रा-वृत्तांत

गंगा की कहानी — गंगोत्री से गंगासागर तक

मेरी यात्रा गंगोत्री के हिमनद से शुरू होती है, जहाँ बर्फ़ पिघलकर मैं एक नन्ही धारा के रूप में जन्म लेती हूँ। पहाड़ों से कूदती-फाँदती मैं ऋषिकेश व हरिद्वार पहुँचती हूँ, जहाँ संध्या-आरती की घंटियाँ गूँजती हैं। फिर मैदानों में बहती हुई मैं कानपुर, प्रयागराज (जहाँ संगम होता है) और काशी से गुज़रती हूँ — यहाँ मेरे घाटों पर संस्कृति, संगीत व आस्था का संगम दिखता है। अनेक भाषाएँ, अनेक वेशभूषाएँ मेरे किनारे बसती हैं। पटना होते हुए मैं बंगाल पहुँचती हूँ और अंत में गंगासागर में सागर से मिलकर अपनी यात्रा पूरी करती हूँ। पूरे रास्ते मैं करोड़ों लोगों को जल, अन्न व जीवन देती हूँ — यही मेरी सार्थकता है।

🌐

भाषा संगम

‘शस्य / उपज’ शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में
✒️ ‘उपज’ शब्द — भाषावार
भाषाशब्दभाषाशब्द
हिंदीउपज, पैदावार, फसलनेपालीउब्जाबाली, उपज
संस्कृतशस्यम्बांग्लाफसल
पंजाबीउपज, पैदावारअसमियाशस्य, खेति, फचल
उर्दूपैदावारमणिपुरीमहै मरोङ्थाबा पोत्थोक
कश्मीरीपॉदावारओड़िआफसल, खेति
सिंधीउपज, पैदावारतेलुगुपंट
मराठीपीकतमिलविळैच्चल्
गुजरातीऊपज, पेदाशमलयालमविळव
कोंकणीपीककन्नड़बेळॆ, फसलु

अन्य भाषाओं में — अंग्रेज़ी: Crop / Produce। आप ‘शस्य/उपज’ व यह वाक्य अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

🪟

झरोखे से — मैथिलीशरण गुप्त

‘जय जय भारतमाता’ — तुलना
✒️ संक्षिप्त परिचय व तुलना
जय जय भारतमाता — प्रकृति-दृश्य
मातृभूमि का मनोरम चित्र

निराला की भाँति मैथिलीशरण गुप्त ने भी ‘जय जय भारतमाता’ में भारत का ओजस्वी गुणगान किया है। इसमें हिमालय को माता का ‘ऊँचा हृदय’ बताया गया है, जो दर्द सहकर भी सौ स्रोतों से जल बहाकर देश को हरा-भरा रखता है।

समानता — दोनों कवि भारत को माता/देवी रूप में पूजते हैं, प्रकृति (विशेषकर हिमालय) का मानवीकरण करते हैं और देशप्रेम जगाते हैं। अंतर — निराला की भाषा संस्कृतनिष्ठ व समासयुक्त है, जबकि गुप्त की भाषा अपेक्षाकृत सरल व भावपूर्ण है। (पूरी कविता पुस्तकालय से ढूँढ़कर पढ़िए।)

🔎

खोजबीन व गतिविधियाँ

📎 गतिविधि-मार्गदर्शन
  • विविध रंग भारत के — भारत/किसी राज्य की सांस्कृतिक विविधता पर पावरपॉइंट/पोस्टर/चार्ट/कोलाज बनाकर कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
  • मिलकर लें शपथ (वन संरक्षण) — वन व पर्यावरण संरक्षण के नियम/अधिनियम जानिए — जैसे वन संरक्षण अधिनियम 1980, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986; और वृक्षारोपण की शपथ लीजिए।
  • बहुभाषी देश हमारा / मातृभाषा और भाव — समाज, पर्यावरण व संस्कृति पर अपनी मातृभाषा व हिंदी में संवाद लिखिए; तथा अपनी मातृभाषा में भारत-स्तुति की एक कविता रचकर उसका हिंदी भावार्थ लिखिए।
  • देशप्रेम की कविताएँ — अन्य देशभक्ति कविताएँ तथा निराला की ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय/इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए व कक्षा में वाचन कीजिए।

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