उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
1️⃣ पाठ का स्रोत
यह कथा पञ्चतन्त्र के प्रथम तन्त्र "मित्रभेदः" से ली गई है। लेखक — विष्णुशर्मा। इसमें एक माँ अपने बालक को नीतिशिक्षा देने के लिए यह कथा सुनाती है।
2️⃣ कथा-सार (Story Summary) — क्रमवार
बुद्धिमान व्यक्ति को कार्य करते समय लाभ (उपाय) के साथ-साथ हानि (अपाय) की भी पहले से चिन्ता/योजना करनी चाहिए। छल-कपट अंततः स्वयं का ही विनाश करता है।
3️⃣ महत्त्वपूर्ण श्लोक
मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्। आत्मवत्सर्वभूतेषु वीक्षन्ते धर्मबुद्धयः॥
अर्थ — धर्मबुद्धि वाले लोग दूसरे की स्त्री को माता के समान, दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले के समान और सभी प्राणियों को अपने समान देखते हैं।
4️⃣ व्याकरण बिंदु (Grammar Notes)
(अ) नित्यबहुवचनान्त शब्द
कुछ संस्कृत शब्द सदैव बहुवचन में ही प्रयुक्त होते हैं — जैसे: आपः (जल), दाराः (पत्नी), लाजाः, अक्षतानि, गृहाः, प्राणाः, असवः, वर्षाः, समाः, सिकताः, कति, यति, तति आदि।
(ब) विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध
विशेषण और विशेष्य के बीच लिंग, विभक्ति और वचन तीनों में सामंजस्य (agreement) होना चाहिए। सर्वनाम शब्द भी विशेषण की तरह प्रयुक्त होते हैं (एनं धर्मबुद्धिम्, यः चौरः आदि)।
(स) तत्पुरुष समास (पुनरावृत्ति)
पूर्वपद की विभक्ति का लोप होकर एकपद बनता है — शरणम् आगतः = शरणागतः (द्वितीयातत्पुरुष), देशस्य भक्तः = देशभक्तः (षष्ठीतत्पुरुष) आदि।
5️⃣ याद रखने योग्य शब्द (Vocabulary)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अटव्याम् | वन में |
| अपायम् | विघ्न/समस्या/संकट |
| खनित्वा | खोदकर |
| निक्षिप्य | रखकर |
| वञ्चयित्वा | ठग कर |
| उत्फुल्ललोचनाः | आश्चर्य से फटी हुई आँखों वाले |
| प्रहृष्टमनाः | प्रसन्न मन वाला |
© Arivihan Class 9 Sanskrit Notes — सप्तमः पाठः : उपायं चिन्तयेत्