WHATSAPP Welcome to Edugrown – Your Learning Partner
← Back to Study Content
NCERT Solution

Chapter 5 : नहीं होना बीमार (Nahin Hona Beemar) (NCERT Solution) Class 7th Hindi

Class 7 · Hindi (Malhar) · Chapter 5 : नहीं होना बीमार (Nahin Hona Beemar) · All Board · All Medium · 2 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD All Medium ENGLISH HINDI
✦ पाठ 5 · मल्हार
कहानी

नहीं होना बीमार

एक बालक की सच्ची सीख की मज़ेदार कहानी

स्वयं प्रकाश
स्वयं प्रकाश
1947 – 2019 · प्रसिद्ध कथाकार

लेखक से परिचय

स्वयं प्रकाश हिंदी के जाने-माने लेखक थे। उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों के दिलों को छू जाती हैं — पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो वे हमारे ही जीवन के अनुभव लिख रहे हों। उन्होंने बच्चों के लिए कई मनोरंजक कहानियाँ लिखीं, जिनमें साहसिक कारनामे, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे पर महत्वपूर्ण पहलू रोचकता से प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी कहानियाँ पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो — वे मनोरंजन के साथ-साथ सोचने-समझने की नई दिशाएँ भी देती हैं। मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी, फीनिक्स आदि इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

पाठ से

कहानी पर आधारित समझ, शब्द-ज्ञान और सृजनात्मक गतिविधियाँ
सुधाकर काका को देखने अस्पताल पहुँचे नानीजी और बच्चा
नानीजी बच्चे के साथ अस्पताल में सुधाकर काका को देखने पहुँचीं
1

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

बच्चा गृहकार्य न करने के कारण उदास
गृहकार्य अधूरा — स्कूल जाने का मन नहीं
प्रश्न 1

बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?

उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था।
उसने गृहकार्य नहीं किया था।
उसे बुखार हो गया था।
व्याख्या

कहानी में स्पष्ट लिखा है — "मेरा स्कूल जाने का मन नहीं किया। मैंने होमवर्क भी नहीं किया था। स्कूल जाता तो जरूर सजा मिलती।" अर्थात न तो उसका मन था और न ही उसने गृहकार्य पूरा किया था, इसी वजह से सज़ा के डर से उसने बीमार बनने की योजना बनाई। बुखार होना झूठ था — वह असल में बीमार था ही नहीं।

प्रश्न 2

कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि—

घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती।
झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
व्याख्या

बच्चे ने सोचा था कि बीमार बनने पर उसे भी सुधाकर काका जैसी साबूदाने की खीर मिलेगी, लेकिन नानाजी ने उलटे उसे भूखे रहने और आराम करने की सलाह दी। पूरे दिन वह अकेला, भूखा और बोर होकर बिस्तर पर पड़ा रहा — यही कड़वा अनुभव उसे आगे कभी ऐसा बहाना न बनाने की सीख दे गया।

प्रश्न 3

"लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी" इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?

उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
व्याख्या

बच्चा असल में बीमार नहीं था, इसलिए पीठ दुखने का असली कारण बीमारी नहीं बल्कि घंटों बिना हिले-डुले लेटे रहने से आई बोरियत और बेचैनी थी। यह पंक्ति दिखाती है कि झूठा बहाना बनाना उसके लिए भी शारीरिक और मानसिक रूप से थकाऊ साबित हो रहा था।

प्रश्न 4

"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि—

बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
व्याख्या

अस्पताल में सुधाकर काका को साफ-सुथरे बिस्तर पर आराम से लेटे और चम्मच से प्यार से साबूदाने की खीर खिलाई जाते देखकर बच्चे को लगा कि बीमार लोगों को खूब आराम और स्वादिष्ट भोजन मिलता है — यही सोचकर उसके मन में यह विचार आया। स्कूल न जाने वाली बात यहाँ नहीं बल्कि बाद में आती है।

प्रश्न (ख)

हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। विद्यार्थी अपने साथियों के साथ चर्चा करते हुए कहानी की उन पंक्तियों का हवाला दे सकते हैं जिनके आधार पर उन्होंने अपने उत्तर चुने। जैसे प्रश्न 2 के लिए वे कहानी की अंतिम पंक्तियों "उस पूरे दिन मुझे भूखे पेट ही रहना पड़ा" का उदाहरण देकर बता सकते हैं। अलग-अलग तर्कसंगत उत्तर सही माने जा सकते हैं यदि वे कहानी के तथ्यों पर आधारित हों।

2

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुने गए शब्दों को उनके सही अर्थों से मिलाइए।

नानीजी सुधाकर काका के लिए खीर लेकर जाती हुई
नानीजी, सुधाकर काका के लिए साबूदाने की खीर लेकर अस्पताल जाते हुए
1. साबूदानासाबू नामक वृक्ष के तने का गूदा (सागूदाना), जो पहले आटे के रूप में होता है और फिर दानों के रूप में सुखाया जाता है।
2. वार्डकिसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।
3. नर्सवह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे।
4. रजाईएक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है।
5. थर्मामीटरशरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र।
6. काढ़ाकई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय, जो सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार में लाभदायक है।
7. ड्राइक्लीनररेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाज़ुक कपड़ों को पानी-साबुन के बिना मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति।
8. ताजमहलउत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित, 17वीं सदी में निर्मित सफेद संगमरमर का विश्व-प्रसिद्ध स्मारक।
9. अरहरएक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।
3

पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का आपको क्या अर्थ समझ में आया?

(क)

"मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।"

भावार्थ

बच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने गृहकार्य भी नहीं किया था, जिससे स्कूल में सज़ा मिलने का डर था। इसलिए वह जानबूझकर बीमार बनने की एक चतुर-सी योजना बना रहा है, ताकि पढ़ाई और सज़ा दोनों से बच सके — यह पंक्ति उसकी बालसुलभ चालाकी को दर्शाती है।

(ख)

"देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा?... लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। ... चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।"

भावार्थ

भूख से व्याकुल बच्चा अब गुस्से, चिढ़ और आत्म-दया में डूबा हुआ है। वह परिवार वालों को दोष दे रहा है, जबकि असल में यह उसी के झूठे बहाने का परिणाम है — क्योंकि नानाजी ने पहले ही कह दिया था कि आज उसे कुछ खाने को न दिया जाए। यह पंक्ति दिखाती है कि झूठ बोलने का नतीजा कभी-कभी खुद उसी व्यक्ति को भुगतना पड़ता है ("तुम खुद शिकार हो जाओ")।

4

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए —

बच्चा रजाई में लिपटा हुआ अकेला लेटा हुआ
बच्चा दिनभर रजाई में लिपटा, अकेला और ऊबा हुआ
(क)

अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?

उत्तर

बच्चे को बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास झूमते हरे-भरे पेड़, चारों ओर फैली शांति, न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी, और लोगों की धीमी-धीमी बातचीत की गुनगुन — ये सब बहुत अच्छा लगा। ऐसा इसलिए क्योंकि यह वातावरण उसके सामान्य शोर-शराबे भरे परिवेश से बिल्कुल अलग, स्वच्छ और सुकूनदायक था।

(ख)

कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?

उत्तर

हाँ, उसका निर्णय बिल्कुल सही था। झूठा बहाना बनाकर वह दिनभर अकेला, भूखा और बोर होकर बिस्तर पर पड़ा रहा — न दोस्त थे, न खेल, न स्वादिष्ट भोजन। जबकि स्कूल जाता तो पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों का साथ, खेल और रिसेस में स्वादिष्ट अमरूद खाने का भी आनंद मिलता। इसी अनुभव से उसे एहसास हुआ कि झूठ बोलकर बचना असल में एक बुरा सौदा साबित हुआ।

(ग)

जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?

उत्तर

शुरुआत में उसके मन में उत्साह और चालाकी भरी खुशी थी (योजना के सफल होने की)। फिर धीरे-धीरे बोरियत, बेचैनी और चिढ़ आने लगी। भूख लगने पर उसके मन में लालच और कुढ़न पैदा हुई; मुन्नू को आम खाते देखकर ईर्ष्या हुई। अंत में उसे गुस्सा, निराशा और हल्का पछतावा भी महसूस हुआ, जब उसे समझ आया कि उसकी योजना उसी के लिए हानिकारक साबित हुई।

(घ)

कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?

उत्तर

समानता: दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति बिस्तर पर आराम करता है और परिवार वाले उसकी देखभाल करते हैं।
अंतर: असली बीमार व्यक्ति को वास्तव में शारीरिक कष्ट, कमज़ोरी, दर्द और बेचैनी होती है, तथा उसे विशेष पौष्टिक भोजन (जैसे सुधाकर काका को खीर) प्यार से खिलाया जाता है। इसके विपरीत, झूठा बीमार बालक को न कोई वास्तविक तकलीफ होती है, न ही उसे स्वादिष्ट भोजन मिलता है — बल्कि उसे भूखे और अकेले पड़े रहकर सिर्फ बोरियत झेलनी पड़ती है।

(ङ)

नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उत्तर

हाँ, उन्होंने उचित ही किया, क्योंकि तबियत ढीली होने पर हल्का खाना या कुछ समय भूखे रहना एक सामान्य घरेलू सावधानी मानी जाती है, ताकि पेट पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। चूँकि उन्हें निश्चित रूप से नहीं पता था कि बच्चे को वास्तव में क्या हुआ है (बुखार जाँचने का थर्मामीटर भी नहीं मिला), इसलिए सावधानी बरतते हुए आराम और परहेज़ की सलाह देना समझदारी भरा कदम था।

5

अनुमान और कल्पना से

नानीजी, बच्चा और नानाजी
नानीजी की जगह आप होते तो क्या करते?
(क)

कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?

उत्तर

यदि बच्चा सच बता देता, तो शायद पहले नानाजी-नानीजी थोड़ा नाराज़ होते और उसे प्यार से समझाते कि झूठ बोलना और गृहकार्य टालना ठीक नहीं। लेकिन इसके बाद वे उसे माफ़ करके खाना दे देते और उसके साथ बैठकर गृहकार्य पूरा करने में मदद भी करते। इस तरह बच्चे को दिनभर भूखा-अकेला रहने की तकलीफ न झेलनी पड़ती, और वह जल्दी ही अपनी गलती सुधार पाता।

(ख)

कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?

उत्तर (नमूना)

मैं बच्चे के पास प्यार से बैठती/बैठता और धीरे-धीरे उससे बातें करती — जैसे उसके पसंदीदा खेल, दोस्तों या स्कूल की बातें पूछकर। फिर हल्के-से पूछती, "सच बताओ, कहीं तुम स्कूल से बचने के लिए तो बीमार नहीं बने?" — प्यार भरे और भरोसेमंद माहौल में बच्चा खुद ही सच बोल देता, बिना डाँट या सज़ा के डर के।

(ग)

कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?

उत्तर (नमूना)

मैं कोई रोचक किताब या कॉमिक पढ़ता/पढ़ती, कागज़ पर चित्र बनाता, अपने मनपसंद गाने गुनगुनाता, खिड़की से बाहर का नज़ारा देखता, या कोई पहेली सुलझाने की कोशिश करता — ताकि समय अच्छे से कट जाए और मन बोरियत में न डूबे।

(घ)

कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?

उत्तर (नमूना)

अगले दिन स्कूल पहुँचकर उसने सबसे पहले शिक्षक से माफी माँगकर बचा हुआ गृहकार्य जमा किया होगा, फिर कक्षा में दोस्तों के साथ पढ़ाई की होगी, रिसेस में नमक-मिर्च लगे अमरूद ठेले से खरीदकर खाए होंगे, और खेल के समय अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती की होगी। शाम को घर लौटकर उसने आगे से समय पर होमवर्क करने का निश्चय भी किया होगा।

(ङ)

कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?

उत्तर (नमूना)

मैं भी बच्चे को आराम करने और कुछ समय हल्का खाना न देने की सलाह देता, क्योंकि यह एक सामान्य घरेलू उपाय है। साथ ही मैं थोड़ी देर बाद उसकी तबियत की दोबारा जाँच करता, उसे प्यार से समझाता और यदि लक्षण ज्यादा देर तक रहते तो डॉक्टर को भी दिखाता, ताकि किसी वास्तविक समस्या की संभावना को नज़रअंदाज़ न किया जाए।

6

कहानी की रचना

लेखक ने कहानी को सरस और रोचक बनाने के लिए 'चित्रात्मक भाषा' व अन्य कई तरीकों का उपयोग किया है।

बच्चा बिस्तर पर लेटा हुआ
(क)

इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर (नमूना सूची)

यह कहानी प्रथम पुरुष (मैं) शैली में लिखी गई है, जिससे पाठक को ऐसा महसूस होता है मानो बच्चा स्वयं अपनी आपबीती सुना रहा हो। इसमें बोलचाल की सरल भाषा, हास्य-व्यंग्य, कल्पना, आत्म-संवाद (मन ही मन बातें करना) और चित्रात्मक वर्णन का सुंदर मेल है। कहानी में एक स्पष्ट मोड़ (twist) भी है — बच्चे की योजना असफल होकर उसे ही सीख देती है।

(ख)

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए —

बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना"फल या साबूदाने की खीर मिलने की उम्मीद की तो सुबह ही हत्या हो चुकी थी" — यह सुबह देखी खीर की याद को दोहराता है।
हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना"फल या साबूदाने की खीर मिलने की उम्मीद की तो सुबह ही हत्या हो चुकी थी।" — भूख को नाटकीय अंदाज़ में बताना हास्य पैदा करता है।
बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आनाशुरुआत में "काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता!" — अंत में "मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।"
कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होनानानाजी-नानीजी को नहीं पता था कि बच्चा असल में बीमार नहीं, बल्कि केवल बहाना बना रहा है।
बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना"क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?"
7

समस्या और समाधान

(क)

बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

उत्तर

समस्या: उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने गृहकार्य भी नहीं किया था, जिससे सज़ा मिलने का डर था।
समाधान: उसने झूठा बीमार बनने का बहाना बनाया ताकि स्कूल न जाना पड़े। परंतु यह समाधान असफल रहा — उसे दिनभर भूखा-अकेला रहना पड़ा, और अंततः उसने सीखा कि सच बोलना और स्कूल जाना ही असली समाधान है।

(ख)

नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

उत्तर

समस्या: बच्चा अचानक बीमार होने की शिकायत कर रहा था, पर घर में थर्मामीटर भी नहीं मिल रहा था, जिससे वे ठीक-ठीक जाँच नहीं कर पा रहे थे कि उसे वास्तव में क्या हुआ है।
समाधान: उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर उसे कड़वी पुड़िया और काढ़ा दिया, आराम करने की सलाह दी और उसे कुछ समय के लिए भूखा रहने को कहा, साथ ही शाम को दोबारा तबियत देखने का निर्णय लिया।

8

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में 'बीमार' से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए —

काढ़ा
बुखार
थर्मामीटर
पुड़िया (दवा)
नर्स
अस्पताल
वार्ड
बीमार
व्याख्या

कहानी में बीमारी से जुड़े कई शब्द आए हैं — काढ़ा (औषधीय पेय), बुखार (शरीर का ऊँचा तापमान), थर्मामीटर (तापमान नापने का यंत्र), पुड़िया (कड़वी दवा), नर्स (देखभाल करने वाली), अस्पताल और वार्ड (जहाँ रोगी भर्ती होते हैं)। ये सभी शब्द कहानी में बीमारी और उसके उपचार के प्रसंग में प्रयुक्त हुए हैं।

9

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि—

(क)

कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।

उत्तर

"मैं रजाई से निकला ही नहीं।" तथा "नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ" और "मुझे कड़वी पुड़िया खानी पड़ी और काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ी" — रजाई और गरम काढ़े का उल्लेख सर्दी के मौसम का संकेत देता है।

(ख)

बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।

उत्तर

"इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।"

(ग)

बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।

उत्तर

"गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!" — भूख में उसकी कल्पना में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवानों का आना दिखाता है कि उसे भोजन बहुत प्रिय है।

(घ)

बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।

उत्तर

"इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।"

10

शीर्षक

प्रश्न चिह्न वाली पतंग
कहानी का शीर्षक कितना उपयुक्त है?
(क)

आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम 'नहीं होना बीमार' है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर

हाँ, यह शीर्षक बिल्कुल उपयुक्त है, क्योंकि कहानी का मूल संदेश यही है कि झूठा बहाना बनाकर बीमार बनना अंततः कष्टदायक साबित होता है। कहानी के अंत में बच्चा स्वयं यह निर्णय लेता है कि वह फिर कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा — अर्थात सच में "बीमार न होना" ही सही और समझदारी भरा रास्ता है, जो शीर्षक से पूरी तरह मेल खाता है।

(ख)

यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

उत्तर (नमूना)

मैं इस कहानी को "झूठी बीमारी का सबक" या "बहाने का नतीजा" नाम दूँगा/दूँगी, क्योंकि पूरी कहानी मुख्य रूप से बच्चे द्वारा बनाए गए झूठे बहाने और उससे मिली सीख के इर्द-गिर्द घूमती है। यह नाम कहानी की केंद्रीय घटना और उसके संदेश को सीधे तौर पर दर्शाता है।

11

अभिनय

कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं। इन्हें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है।

  1. "बुखार आ गया।" मैंने कराहते हुए कहा।
  2. "आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।" मैंने कहा।
  3. "मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।"
  4. नानाजी आए। बोले, "अब कैसा है सिरदर्द?"
  5. फिर नानाजी बोले, "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"
मार्गदर्शन

यह एक मौखिक कक्षा-गतिविधि है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी विद्यार्थी कक्षा में सामने आकर उचित हाव-भाव, स्वर के उतार-चढ़ाव (जैसे कराहते हुए बोलना, कमजोर आवाज़ में शिकायत करना) के साथ इन संवादों को अभिनीत करें, ताकि पात्रों की भावनाएँ स्पष्ट रूप से झलकें।

12

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

(क)

इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।

उत्तर (नमूना)

"काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पड़ूँगा!" — बीमार होने की चाहत रखना हास्यपूर्ण है। "मैं पता नहीं कब नींद में गुड़ुप हो गया" — मुहावरेदार शैली मज़ेदार लगती है। "भुक्कड़ कहीं का। पूरा हाथ भी सान रहा है" — मुन्नू के आम खाने का वर्णन भी हँसी लाता है।

(ख)

इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।

उत्तर (नमूना)

"गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!" तथा "अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी" — इन स्वादिष्ट पकवानों के वर्णन से मुँह में पानी आ जाता है।

13

लेखन के अनोखे तरीके

कहानी में साधारण बातों को किस अनोखे ढंग से लिखा गया है, ढूँढ़िए —

बच्चा दबे पाँव पर्दे से झाँकते हुए
"दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झाँककर देखा।"
1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।"हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।"
2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।"बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।"
3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।"सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।"
4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।"बाकी एकदम शांति।"
5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।"
6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।"चलो बीमार पड़ जाते हैं।"
सीख

इस तरह लेखक साधारण बातों को घुमा-फिराकर, मुहावरेदार व चित्रात्मक ढंग से लिखते हैं, जिससे लेखन अधिक जीवंत, रोचक और सुंदर बन जाता है।

14

विराम चिह्न

नीचे दिए गए विराम चिह्नों को कहानी में ढूँढ़िए और समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है।

नानाजी बच्चे की नब्ज़ देखते हुए
"देखें!" नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ।
पूर्ण विराम ( । )वाक्य पूरा होने / समाप्त होने पर लगाया जाता है। जैसे — "अस्पताल जाने का यह मेरा पहला अवसर था।"
अल्प विराम ( , )वाक्य में थोड़ा रुकने पर या शब्दों/वाक्यांशों को अलग दिखाने के लिए। जैसे — "पेट देखा, और नब्ज़ देखने लगे।"
प्रश्नवाचक चिह्न ( ? )प्रश्न पूछे जाने पर लगाया जाता है। जैसे — "क्या हुआ?"
विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! )आश्चर्य, हर्ष या तीव्र भाव प्रकट करने पर। जैसे — "देखें!"
उद्धरण चिह्न ( " " )किसी पात्र के मुँह से कहे गए शब्दों (संवाद) को ज्यों का त्यों दिखाने के लिए। जैसे — "बुखार आ गया।"
15

कैसी होगी गली

"मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ।"
कहानी में पढ़ी बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।

मार्गदर्शन

कहानी में गली से जुड़े संकेत मिलते हैं — चंदूभाई ड्राइक्लीनर की दुकान, तेजराम की दुकान पर बैठे ग्राहक, महेश घी सेंटर पर मलाई का भगोना चढ़ना, और टेलीफोन के तारों पर बैठी चिड़ियाँ। इन सभी विवरणों को शामिल करते हुए विद्यार्थी एक जीवंत, रंगीन गली का चित्र बना सकते हैं — जिसमें दुकानें, आती-जाती चहल-पहल और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियाँ दिखाई दें।

पाठ से आगे

व्यक्तिगत अनुभव, चिंतन और खान-पान से जुड़ी रोचक गतिविधियाँ
16

आपकी बात

(क)

बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।

उत्तर (नमूना)

मेरी कक्षा में बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ हैं जिनसे धूप और ताज़ी हवा अंदर आती है। दीवारों पर रंग-बिरंगे चार्ट और बच्चों की बनाई पेंटिंग लगी हैं। हरे रंग का बड़ा ब्लैकबोर्ड सामने है और कतारों में लगी डेस्क-बेंच पर हम सब बैठते हैं। कक्षा में हमेशा हल्की-सी चहल-पहल और शिक्षक की समझाने की आवाज़ गूँजती रहती है।

(ख)

कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?

उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार जब घर के सभी लोग किसी काम से बाहर गए थे, तो मैं कुछ घंटे अकेला/अकेली था/थी। शुरुआत में थोड़ा अजीब और सुनसान लगा, फिर मैंने किताब पढ़ी और चित्र बनाए, जिससे समय अच्छे से कट गया और अकेलापन कम महसूस हुआ।

(ग)

कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?

उत्तर (नमूना)

हाँ, कभी-कभी दोस्त की नई साइकिल या खिलौना देखकर मन में ईर्ष्या का भाव आया। लेकिन मैंने खुद को समझाया कि हर किसी के पास सब कुछ एक जैसा नहीं होता, और अपनी चीज़ों की कद्र करना ज़्यादा ज़रूरी है। इससे धीरे-धीरे यह भावना कम हो गई।

(घ)

कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?

उत्तर (नमूना)

घर में मेरे माता-पिता और दादा-दादी मेरी सेहत, पढ़ाई और ज़रूरतों का ध्यान रखते हैं — समय पर भोजन देना, पढ़ाई में मदद करना और तबियत खराब होने पर देखभाल करना। विद्यालय में मेरे शिक्षक मेरी पढ़ाई और व्यवहार पर ध्यान देते हैं तथा ज़रूरत पड़ने पर मार्गदर्शन करते हैं।

(ङ)

आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम-से-कम परेशानी हो?

उत्तर (नमूना)

मैं अपना काम खुद करने की कोशिश करता/करती हूँ, समय पर होमवर्क करता/करती हूँ, बड़ों की बात मानता/मानती हूँ, और दोस्तों के साथ ईमानदारी व सहयोग से पेश आता/आती हूँ। मैं झूठ बोलने या बिना बताए कहीं जाने से बचता/बचती हूँ, ताकि परिवार को चिंता न हो।

17

बहाने

बहानों की सूची बनाती लड़की
बहानों की एक सूची
(क)

कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?

उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार मैंने पेट दर्द का बहाना बनाकर होमवर्क न करने का कारण बताया था। उस समय मन में डर था कि कहीं पकड़ा न जाऊँ, साथ ही थोड़ा अपराधबोध भी महसूस हो रहा था। बाद में सच बोलने पर मन हल्का हुआ।

(ख)

आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।

उत्तर

पेट दर्द का बहाना, सिरदर्द का बहाना, थकान का बहाना, नींद न आने का बहाना, कॉपी/किताब घर भूल आने का बहाना, बस या गाड़ी छूट जाने का बहाना, बिजली न होने के कारण होमवर्क न कर पाने का बहाना।

(ग)

बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर

अक्सर सज़ा या डाँट के डर से, ज़िम्मेदारी से बचने के लिए या शर्मिंदगी से बचने के लिए बहाने बनाए जाते हैं। इनसे बचने के लिए हमें समय पर अपना काम पूरा करने की आदत डालनी चाहिए, गलती होने पर खुलकर सच बोलना चाहिए, और अपनी ज़िम्मेदारी स्वयं निभानी चाहिए, ताकि बहाने बनाने की नौबत ही न आए।

18

अनुमान

"मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।"
क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/पशु-पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए।

उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार रात में बाहर से आ रही आहट सुनकर मैंने अनुमान लगाया कि शायद कोई बिल्ली छत पर घूम रही है — बाद में पता चला कि यह सच था। इसी तरह कभी दूर रहने वाले किसी रिश्तेदार की फोन पर आवाज़ सुनकर मैंने अनुमान लगाया कि वे बीमार हैं, क्योंकि उनकी आवाज़ कमज़ोर लग रही थी।

19

घर का सामान

"बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।"
अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए —

जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैंकैंची, टॉर्च, छाता, चार्जर, पेन
जो कोई माँगकर ले जाते हैंकिताबें, बर्तन, सीढ़ी, टिफिन बॉक्स
जो आप किसी से माँगकर लाते हैंचीनी, नमक, दूध, नोट्स/कॉपी

(यह सूची नमूना मात्र है — विद्यार्थी अपने घर के अनुभव के आधार पर अपनी सूची बनाएँ।)

20

खान-पान और आप

स्वादिष्ट भोजन की थाली
खान-पान से जुड़ी यादें
(क)

कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?

उत्तर (नमूना)

हमारे घर में बीमार होने पर खिचड़ी, मूंग दाल का पानी, तुलसी-अदरक का काढ़ा और गरम दूध दिया जाता है, जो पचने में हल्के और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।

(ख)

कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?

उत्तर (नमूना)

मुझे गरमागरम समोसे, पिज़्ज़ा, चॉकलेट आइसक्रीम और माँ के हाथ की बनी पूड़ी-सब्ज़ी खाने का बहुत मन करता है।

(ग)

कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?

उत्तर (नमूना)

हमारे घर में गुझिया केवल होली पर, खीर-पूड़ी विशेष पूजा के दिन, और तिल के लड्डू मकर संक्रांति पर ही बनते हैं।

(घ)

कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?

उत्तर (नमूना)

विद्यालय में मैं टिफिन में लाया पराठा या सैंडविच खाता/खाती हूँ, और रिसेस में अक्सर दोस्तों के साथ चटपटे भेलपुरी या फल भी खाता/खाती हूँ, जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है।

(ङ)

इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?

उत्तर (नमूना)

मुझे याद है जब दादी जन्मदिन पर मेरे लिए विशेष रूप से हलवा बनाती थीं — उसकी खुशबू और स्वाद आज भी मुझे उस खुशी के पल की याद दिलाते हैं।

(च)

कहानी में बच्चा भोजन की सुगंध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगंध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?

उत्तर (नमूना)

हाँ, जब घर में पकौड़े या हलवा बनने की खुशबू आती है, तो मैं तुरंत रसोई की ओर भागता/भागती हूँ। मुझे गरम-गरम पूड़ी और मसाला डोसे की सुगंध सबसे ज़्यादा पसंद है।

21

आज की पहेली

खाने-पीने की वस्तुओं या व्यंजनों से जुड़ी पहेलियाँ बूझिए —

पहेली 1

रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा घी-तेल साथी हैं इसके, दही-चटनी से हरा-भरा
उत्तर: आलू पराठा

पहेली 2

दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ, दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ, गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।
उत्तर: डोसा

पहेली 3

नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास, मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर, चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!
उत्तर: वड़ा पाव

पहेली 4

बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोला। खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्ची संग सजे।
उत्तर: ढोकला

पहेली 5

गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ। खट्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!
उत्तर: गोलगप्पा (पानी पूरी)

पहेली 6

हरे साग संग मुझको पाओ, मक्खन के संग मुझको खाओ। आटा मेरा हल्का पीला, स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।
उत्तर: मक्के की रोटी

पहेली 7

आग में पकती हूँ, सोंधा-सा स्वाद, साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार।
उत्तर: दाल-बाटी

पहेली 8

गोल-गोल और श्वेत रंग का रस से भरा हुआ हूँ खूब। मीठी दुनिया का महाराजा चाशनी मीठी डूब-डूब।
उत्तर: रसगुल्ला
स्रोत: NCERT "मल्हार" पाठ 5 — "नहीं होना बीमार" (स्वयं प्रकाश)। समस्त प्रश्नोत्तर शैक्षणिक उद्देश्य हेतु सरल भाषा में समझाए गए हैं।

💬 Comments & Doubts

💭

Abhi tak koi comment nahi

Sabse pehle comment karne wale bano!

Apna comment likhein

Doubt ho ya suggestion — kuch bhi poochh sakte hain. Login zaroori nahi hai.

10 + 5 =

Ye sirf ye confirm karne ke liye hai ki aap robot nahi hain.

Comment publish hone se pehle admin check karta hai.

🔔 Email Updates Lein

Naya content aate hi email par pata chal jayega. Sirf wahi sections chunein jo chahiye.

🔒 Content copy nahi kar sakte