न खलु वयस्तेजसो हेतुः
पाठ-परिचयः, जीवनवृत्तान्तः एवं शब्दार्थाः
"न खलु वयस्तेजसो हेतुः" — अर्थात् आयु (अल्प वयस्) तेज (पराक्रम) का कारण नहीं होती। भारत के स्वतन्त्रता-संग्राम में अनेक ज्ञात-अज्ञात क्रान्तिवीरों ने अपना परिवार और जीवन आहुति-रूप में अर्पित कर दिया। उन्हीं में से एक तेजस्वी बालक्रान्तिवीर हुतात्मा खुदीराम थे। प्रस्तुत पाठ में उनके जीवन-वृत्तान्त को संक्षेप में दिया गया है — जो यह सिद्ध करता है कि वीरता का सम्बन्ध आयु से नहीं, अपितु तेज और देशभक्ति से है।
खुदीराम का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को बंगाल प्रान्त के मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी ग्राम में हुआ। पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। बचपन में ही माता-पिता का देहान्त हो गया, अतः बड़ी बहन अपरूपा देवी ने उनका पालन-पोषण किया। वे बचपन से असाधारण थे और देशवासियों पर होते अत्याचारों को देखकर व्यथित हो जाते थे।
सन् 1905 में वायसराय कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया, जिससे पूरे देश में बंग-भंग आन्दोलन भड़क उठा। मात्र पन्द्रह वर्ष के खुदीराम भी इसमें कूद पड़े। उन्होंने बालकों का संगठन बनाकर पदयात्राएँ आयोजित कीं, 'वन्दे मातरम्' के घोष किए और जनजागरण के पत्रक बाँटे।
गुप्त-मण्डल के संचालक सत्येन्द्रनाथ ने उपदेश दिया कि शरीर वज्र जैसा दृढ़, बुद्धि तलवार की धार जैसी तीक्ष्ण और मन गंगाजल जैसा निर्मल हो। राणा प्रताप से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की कि जब तक भारत आज़ाद नहीं होगा, वे जूते (पादत्राण) नहीं पहनेंगे।
कठोर अंग्रेज़ न्यायाधीश किङ्ग्ज़फोर्ड् को मारने का दायित्व प्रफुल्ल और खुदीराम ने लिया। 28 अप्रैल 1908 को उन्होंने उसकी समझी गई बग्घी पर बम फेंका, पर उसमें किङ्ग्ज़फोर्ड् नहीं था — केनेडी की पत्नी और पुत्री मारी गईं। प्रफुल्ल ने पकड़े जाने पर स्वयं को गोली मार ली। खुदीराम पकड़े गए; न्यायालय में हर प्रश्न का उनका एक ही उत्तर था — "वन्दे मातरम्"। 11 अगस्त 1908 को बाल्यावस्था में ही हँसते हुए, 'वन्दे मातरम्' जपते हुए वे हुतात्मा हो गए।
| शब्दः | संस्कृत अर्थ | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| अधिवक्तॄणाम् | अभिभाषकाणाम् | वकीलों के | Of advocates |
| असाधारणः | न साधारणः | असामान्य | Extraordinary |
| आचरितवन्तः | पालितवन्तः | मनाये | Observed |
| आतङ्कम् | भयम् | डर | Fear |
| आन्दोलनम् | विप्लवः | आन्दोलन | Revolution |
| उद्बन्धनम् | दण्डविशेषः | फाँसी | Execution |
| कदाचित् | एकदा | एक बार | Once |
| चकितः | विस्मितः | चौंकना | Amazed |
| दिवम् | स्वर्गम् | स्वर्ग को | To heaven |
| निर्दयः | निर्गता दया यस्मात् | दया रहित | Merciless |
| प्रतीकारयत्नः | प्रत्युत्तरप्रयासः | प्रतिरोध का प्रयास | Attempt at retaliation |
| भुशुण्डी | शस्त्रविशेषः | बन्दूक | Gun |
| व्यथितः | दुःखितः | चिन्तित | Worried |
| विस्फोटकम् | युद्धोपकरणविशेषः | विस्फोटक सामग्री | Explosive |
| संत्रस्तः | भीतः, पीडितः | आतंकित | Frightened |
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः — समाधानम्
किङ्ग्ज़फोर्ड् रक्षितः आसीत्; तस्य रथे केनेडी-अधिकारिणः पत्नी पुत्री च आस्ताम्, ते एव मृते।
| संवत्सर-शब्दः | अङ्कः |
|---|---|
| (क) सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९४७ (३) |
| (ख) अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९०८ (४) |
| (ग) पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम् | १९५० (५) |
| (घ) पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९०५ (१) |
| (ङ) नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् | १८८९ (२) |
(ख) वृक्षेषु पक्षिणः मधुरं कूजन्ति।
(ग) दूरे उन्नतः पर्वतः, आकाशे सूर्यः मेघाः च दृश्यन्ते।
(घ) मार्गे एका द्विचक्रिका तिष्ठति, समीपे च गृहाणि सन्ति।
(ङ) सर्वत्र स्वच्छता वर्तते, अतः उद्यानं रमणीयम् अस्ति।
यह चित्र-आधारित प्रश्न है — चित्र अनुसार वाक्य थोड़े बदल सकते हैं; ये नमूना उत्तर दिए गए शब्दों का प्रयोग करके बनाए गए हैं।
स्वाध्यायान्मा प्रमदः — युगल-अव्यय-प्रयोगः
नोट — कुछ रिक्त-स्थानों में 'यदि…तर्हि' अथवा 'यथा…तथा' जैसे युगल भी सन्दर्भानुसार स्वीकार्य हैं।