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Quick revision notes

पाठ 2: तीन बुद्धिमान (Teen Buddhimaan) Quick revision notes Class 7th Hindi (मल्हार) — लोककथा

Class 7 · Hindi (Malhar) · Chapter 2 : तीन बुद्धिमान (Teen Buddhimaan) · All Board · All Medium · 3 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD All Medium ENGLISH HINDI
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कक्षा 7 · हिंदी · मल्हार

तीन बुद्धिमानलोककथा

रचनाकार — लोककथा · पैनी दृष्टि और तेज़ बुद्धि की कहानी
तीन बुद्धिमान

कहानी का सार

एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। उसके पास न रुपया-पैसा था, न सोना-चाँदी। इसलिए वह अपने बेटों से कहा करता था कि वे एक दूसरे प्रकार का धन जमा करें — हर वस्तु और हर स्थिति को पूरी तरह समझने और जानने का प्रयास करें।

उसका कहना था कि रुपये-पैसे की जगह उनके पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी की जगह तीव्र बुद्धि। ऐसा धन जमा कर लेने पर उन्हें कभी किसी बात की कमी नहीं रहेगी।

पिता के गुज़र जाने के बाद तीनों भाइयों ने तय किया कि वे दुनिया देखने निकलेंगे और ज़रूरत पड़ी तो मज़दूरी कर लेंगे। वे सुनसान घाटियाँ और ऊँचे पहाड़ पार करते हुए लगातार चालीस दिन चलते रहे। खाने-पीने का सामान खत्म हो गया, पैरों में छाले पड़ गए, तब कहीं जाकर उन्हें एक बड़ा नगर दिखाई दिया।

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ऊँट वाली घटना

नगर के पास पहुँचते ही सबसे बड़े भाई ने ज़मीन पर नज़र डालकर कहा कि थोड़ी देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गुज़रा है। कुछ आगे बढ़ने पर मझले भाई ने सड़क के दोनों ओर देखकर कहा कि वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता। थोड़ा और आगे जाकर सबसे छोटे भाई ने कहा कि उस ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।

कुछ देर बाद उन्हें एक घुड़सवार मिला जो सचमुच अपना खोया हुआ ऊँट ढूँढ़ रहा था। भाइयों ने उससे ऊँट के बारे में सारी बातें पूछ-पूछकर बता दीं। यह सुनकर घुड़सवार को शक हो गया कि इन्हीं तीनों ने उसका ऊँट चुराया है और उसकी पत्नी तथा बेटे को मार डाला है।

भाइयों ने कहा कि उन्होंने तो ऊँट का मुँह तक नहीं देखा, पर घुड़सवार ने एक न सुनी। वह तलवार निकालकर तीनों को अपने आगे-आगे चलाता हुआ सीधे राजा के भवन ले गया।

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चालीस दिन की यात्रा के बाद नगर के पास तीनों भाई
चालीस दिन की यात्रा के बाद नगर के पास तीनों भाई

राजा की परीक्षा

राजा ने पूरी बात सुनी और सोचा कि जब इन्होंने बिना बताए ही ऊँट के बारे में सब कुछ सही बता दिया, तो ज़रूर इन्होंने ही उसे चुराया होगा। भाइयों ने फिर कहा कि वे चोर नहीं हैं — बचपन से उन्हें आदत पड़ गई है कि वे कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने में उन्होंने बहुत समय लगाया है, इसीलिए ऊँट को देखे बिना भी बता दिया।

राजा ने उनकी सच्चाई जाँचने की ठानी। उसने मंत्री के कान में कुछ कहा और थोड़ी देर में सेवक एक बहुत बड़ी पेटी ले आए, जिसे द्वार के पास रख दिया गया। तीनों भाई दूर खड़े ध्यान से देखते रहे कि पेटी कहाँ से, कैसे लाई गई और किस ढंग से रखी गई।

जब राजा ने पूछा कि पेटी में क्या है, तो सबसे बड़े भाई ने कहा कि उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है। मझले भाई ने कहा कि वह अनार है। और सबसे छोटे भाई ने जोड़ा कि वह अनार अभी कच्चा है।

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राजा के भवन में पेटी वाली परीक्षा
राजा के भवन में पेटी वाली परीक्षा

कहानी की खास बातें

  • सबसे बड़ा धन रुपया-पैसा नहीं, बल्कि देखने और सोचने की आदत है।
  • तीनों भाइयों ने कोई जादू नहीं किया — उन्होंने केवल निशान देखे और अनुमान लगाया
  • बड़ा भाई ऊँट का आकार पहचानता है, मझला उसकी कमी, छोटा उस पर बैठे लोगों को — यानी तीनों की दृष्टि अलग-अलग पर एक जैसी पैनी है।
  • यह एक लोककथा है, इसलिए इसमें कहने का ढंग सरल और घटनाएँ क्रम से चलती हैं।

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दरबार में तीनों भाइयों की परीक्षा हुई
दरबार में तीनों भाइयों की परीक्षा हुई
कहानी का संदेश

आँखें सबके पास होती हैं, पर देखना हर कोई नहीं जानता। ध्यान से देखने और ठहरकर सोचने की आदत ही सबसे बड़ी संपत्ति है।

शब्दार्थ

निर्धनगरीब
संचित करनाजमा करना
पूर्णत:पूरी तरह
पैनी दृष्टितेज़ और गहरी नज़र
उन्नीस रहनाकिसी से कम रह जाना
चरवाहापशु चराने वाला
वीरानउजाड़, सुनसान
छालेफफोले
पश्चात्बाद में
संभवत:शायद
शंकासंदेह, शक
झटपटबहुत जल्दी
फुसफुसानाकान के पास धीरे से कहना
विनतीप्रार्थना
परिवेशआस-पास का वातावरण

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लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं
लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं
— पाठ 2 के नोट्स समाप्त —

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