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NCERT Solution

Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 12 | Bharati Jai Vijay Kare | NCERT Solutions घर की याद

Class 9 · Hindi (Ganga) · Chapter-12 घर की याद (Ghar Ki Yaad) · All Board · ENGLISH · 22 views

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कक्षा 9 · हिंदी · कविता

घर की याद

कवि — भवानीप्रसाद मिश्र · संपूर्ण प्रश्न-उत्तर

भवानीप्रसाद मिश्र
भवानीप्रसाद मिश्र जन्म 1913 (होशंगाबाद, म.प्र.) · निधन 1985। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में जेल के दौरान यह कविता रची।
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कविता का सार व पृष्ठभूमि

समझने से पहले

भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय भाग लिया, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन वर्ष का कारावास दिया। जेल में रहते हुए, परिवार से दूर, घर की याद में डूबकर उन्होंने 'घर की याद' कविता लिखी।

कविता की केंद्रीय संवेदना परिवार की स्मृति है। कवि सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर परिवार तक संदेश भेजता है और उससे आग्रह करता है कि वह घरवालों को जेल के कष्ट न बताए, बल्कि उन्हें सांत्वना दे।

जेल में बैठा कवि
जेल में अकेले बैठे कवि की कल्पना — कविता का मूल परिवेश

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मेरे उत्तर मेरे तर्क

सटीक उत्तर चुनिए + कारण
1भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?
  • (क) विदेश से मित्र के लिए
  • (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए
  • (ग) जेल से परिवार के लिए
  • (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
तर्क1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के कारण कवि को तीन वर्ष का कारावास हुआ। जेल में परिवार से दूर रहकर, घर की याद में उन्होंने यह कविता रची। कविता की केंद्रीय संवेदना परिवार की स्मृति है — अतः उत्तर है जेल से परिवार के लिए
2लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
  • (क) उत्साह और आवेग
  • (ख) भय और क्रोध
  • (ग) साहस और उमंग
  • (घ) चिंता और बेचैनी
तर्क"रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है" — अविरल वर्षा कवि के मन में उमड़ती उदासी, घर की चिंता और बेचैनी का प्रतीक है। जैसे-जैसे पानी बढ़ता है, मन की व्याकुलता गहरी होती जाती है।
3कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
  • (क) कमजोर और निष्क्रिय
  • (ख) स्नेहमयी और दृढ़
  • (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय
  • (घ) सरल और उदासीन
तर्कमाँ अनपढ़ है पर उसकी "स्नेह-धारा" का असीम पसार है (स्नेहमयी)। साथ ही वह बेटे को कमजोर पड़ने से रोकती है — "इस तरह होओ न कच्चे" तथा "पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता" — यह उसकी भावनात्मक दृढ़ता दर्शाता है।
4"वज्र-भुज नवनीत-सा उर" पंक्ति पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत करती है?
  • (क) कर्मठ और सृजनशील
  • (ख) साहसी और पराक्रमी
  • (ग) दृढ़ और संवेदनशील
  • (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
तर्क"वज्र-भुज" अर्थात वज्र जैसी शक्तिशाली भुजाएँ (दृढ़ता) और "नवनीत-सा उर" अर्थात मक्खन जैसा कोमल हृदय (संवेदनशीलता)। यह पंक्ति बाहर से बलवान पर भीतर से कोमल पिता का चित्र खींचती है।
5"एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
  • (क) पिता की कठोरता
  • (ख) पिता की भावुकता
  • (ग) वर्षा की तीव्रता
  • (घ) पिता की निर्बलता
तर्कपिता का हृदय इतना कोमल व भावुक है कि बरगद के एक पत्ते के टूटने जैसी छोटी-सी बात पर भी उनके आँसुओं की धारा फूट पड़ती है। यह उनकी गहरी संवेदनशीलता/भावुकता को दर्शाता है।
6"बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर" — 'परिताप' शब्द से क्या संकेत मिलता है?
  • (क) घर का समृद्ध होना
  • (ख) घर की सजावट
  • (ग) घर में दुख का वातावरण
  • (घ) घर की शांति
तर्क'परिताप' का अर्थ है अत्यधिक दुख/संताप। बहन का मायके आना सामान्यतः खुशी का अवसर है, पर कवि के जेल में बंद होने के कारण घर संताप से भरा है — इसी पीड़ा को 'परिताप के घर' कहा गया है।
7"और कहना मस्त हूँ मैं" — कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
  • (क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है
  • (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है
  • (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है
  • (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है
तर्ककवि बादल से आग्रह करता है कि वह घरवालों को उसके कष्ट न बताए, बल्कि कहे कि वह मस्त है, खेलता-कूदता है। वास्तव में वह भीतर से दुखी है, पर परिवार को चिंता से बचाने के लिए अपना दुख छिपाना चाहता है।
8इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
  • (क) घर की शांति और सुरक्षा
  • (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध
  • (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया
  • (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
तर्कपूरी कविता जेल में बैठे कवि की घर की स्मृति और परिवार से बिछड़ने की पीड़ा के इर्द-गिर्द घूमती है। शीर्षक 'घर की याद' भी इसी केंद्रीय भाव को दर्शाता है।

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मेरी समझ मेरे विचार

वर्णनात्मक प्रश्न
1कविता में वर्णित पिता के बहुआयामी व्यक्तित्व की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

कवि अपने पिता का बहुआयामी चित्र खींचते हैं, जिसमें कठोरता और कोमलता का अद्भुत मेल है—

  • बलवान व साहसी — "वज्र-भुज", "मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें" — मृत्यु व शेर से भी न डरने वाले निडर पुरुष।
  • तेजस्वी वाणी व कर्मठता — "बोल में बादल गरजता, काम में झंझा लरजता" — उनकी आवाज़ में बादल की गरज और काम में तूफ़ान-सा वेग।
  • अनुशासित व धार्मिक — रोज़ गीता-पाठ, दो सौ साठ दंड लगाना, मुगदर हिलाना — नियमित व्यायाम व पूजा।
  • युवा-सा जोश — "जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा" — बुढ़ापे में भी दौड़ना, खिलखिलाना।
  • कोमल व भावुक हृदय — "नवनीत-सा उर", "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए" — भीतर से अत्यंत संवेदनशील।
  • वत्सल पिता — कवि को 'सोने पर सुहागा' मानते, प्यार में बहते रहे हैं।

इस प्रकार शक्ति और संवेदना, दृढ़ता और कोमलता का संयोग पिता के व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाता है।

2"दुख डटकर ठेलता हूँ" — कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
  • त्याग — देश की स्वतंत्रता के लिए कवि ने घर-परिवार का सुख छोड़ दिया और जेल का कष्ट सहर्ष स्वीकार किया।
  • साहस — कारावास की कठिनाई में भी वह टूटता नहीं; संदेश भिजवाता है कि वह मस्त है, खेलता-कूदता है, उसका वज़न सत्तर सेर है।
  • धैर्य — घर की याद से व्याकुल होने पर भी वह स्वयं को सँभालता है — "कहाँ मैं रोता... धीर मैं खोता कहाँ हूँ"; बादल से कहता है कि घरवालों को धीरज देना।

यह कथन कवि के संघर्षशील, दृढ़ मनोबल वाले स्वभाव को उजागर करता है — वह दुख से भागता नहीं, बल्कि उसे डटकर पीछे धकेलता है।

3कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
  • वर्षा कवि के मन की उमड़ती भावनाओं का प्रतीक है — बाहर की बारिश और भीतर की उदासी एक साथ बहती है।
  • जैसे-जैसे पानी गिरता है, घर की याद गहराती है — "बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है"।
  • वर्षा कवि की बचपन की स्मृतियाँ जगाती है (उसे बरसात बहुत प्रिय थी)।
  • अंत में पानी का थमना मन के कुछ शांत/नम होने का संकेत देता है — इस प्रकार प्रकृति और भाव का सुंदर संयोजन बनता है।
4माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय देने वाली पंक्तियाँ चुनकर भाव स्पष्ट कीजिए।
"इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे"

माँ बेटे को कमजोर न पड़ने की सीख देती है — यदि वह विचलित होगा तो बाकी बच्चे भी रो पड़ेंगे।

"पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता"

यदि बेटा देशसेवा से पीछे हटता तो माँ की कोख लज्जित होती — माँ को बेटे की देशभक्ति पर गर्व है।

"गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है"

माँ बेटे के निर्णय का गर्व-सहित समर्थन करती है। भाव — माँ स्नेहमयी होकर भी कमजोर नहीं; वह दुख छिपाकर बेटे को साहस देती है — यही उसकी भावनात्मक दृढ़ता है।

5कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
"हे सजीले हरे सावन... तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।"

मुझे यह अंश सबसे प्रभावी लगता है, क्योंकि यहाँ कवि अपना सारा दुख भुलाकर केवल अपने माता-पिता के सुख की कामना करता है। वह बादल से प्रार्थना करता है कि वह स्वयं बरस ले, पर उसके माता-पिता उसके लिए न तरसें। यह निःस्वार्थ प्रेम और त्याग पाठक का हृदय छू लेता है।

यह एक नमूना उत्तर है — आप अपनी पसंद का कोई भी अंश चुनकर अपने शब्दों में कारण लिख सकते हैं।

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कविता का सौंदर्य

विधा से संवाद — विशेषताएँ + पंक्तियाँ

नीचे प्रत्येक विशेषता वाली पंक्तियाँ कविता से चुनकर दी गई हैं—

❖ स्मृति और दृश्य बिंब
"खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह / बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता" — बचपन का सजीव दृश्य।
❖ लोकभाषा की सहजता
"आज सबका मन चुआ होगा", "एक छिन सौ बरस है रे", "हाय रे परिताप के घर" — आँचलिक/बोलचाल के शब्द।
❖ पंक्तियों का दोहराव
"हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन / तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें" (बार-बार); "और कहना मस्त हूँ मैं"।
❖ आलंकारिक प्रयोग
"वज्र-भुज नवनीत-सा उर", "देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे", "माँ कि आँगन लीप दे ज्यों" — उपमा/रूपक।
❖ प्राकृतिक दृश्यों व भावों का संयोजन
"गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर / बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर"।
❖ संबोधनात्मकता
"हे सजीले हरे सावन", "हवा, उनको धीर देना", "तू कि प्रिय से दूर होकर" — सीधा संबोधन।

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कविता की संरचना

भावों की यात्रा के चरण

'घर की याद' कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरण—

  1. पानी का गिरना — रात भर अविरल वर्षा, मन का घिरना; उदासी व बेचैनी का आरंभ।
  2. सबेरा होना — बादल की अँधेरी में सही समय का पता न चलना; अनिश्चय की स्थिति।
  3. घर की ओर मन का खिंचना — भाई, बहन, माँ, पिता की एक-एक कर स्मृति।
  4. पिता का विस्तृत चित्र — दृढ़ता व कोमलता; माँ-पिता की कल्पित प्रतिक्रिया।
  5. वर्षा का थमना — बादलों का जमना, मन का नम होना; पंछी व क्षितिज का चिंतन।
  6. संदेश का आग्रह — बादल/हवा से कहना कि घरवालों को कष्ट न बताएँ, धीरज दें।
जेल की खिड़की
जेल की खिड़की से बाहर वर्षा — जहाँ से कवि की भाव-यात्रा शुरू होती है

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विषयों से संवाद

चर्चा आधारित प्रश्न
1संयुक्त परिवार व एकल परिवार की तुलना — कौन-सी बातें पसंद/नापसंद और क्यों?
पक्षसंयुक्त परिवारएकल परिवार
पसंदआपसी सहयोग, बड़ों का मार्गदर्शन, बच्चों को भरपूर स्नेह, सुख-दुख साझा।निर्णय की स्वतंत्रता, कम झंझट, गोपनीयता, सीमित खर्च।
नापसंदनिजता की कमी, कभी-कभी मतभेद/टकराव।अकेलापन, संकट में सहारे की कमी, बच्चों को संस्कारों/अपनेपन की कमी।

मुझे संयुक्त परिवार का अपनापन और सहयोग सबसे अधिक प्रिय है, क्योंकि इसी से 'घर' केवल भवन न रहकर भावनाओं का केंद्र बनता है — ठीक वैसे ही जैसे कविता में चित्रित है।

यह एक नमूना उत्तर है; आप अपने अनुभव के आधार पर लिख सकते हैं।
2लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ हो सकती हैं?
ग्रामीण क्षेत्रशहरी क्षेत्र
खेत व फ़सल जलमग्न होना, मिट्टी का कटाव, कच्चे मकान गिरना, गाँव का संपर्क टूटना, पशुओं को चारे की कमी।सड़कों व नालियों का जाम होना, जल-भराव, यातायात ठप, बिजली कटौती, रोग फैलना, बस्तियों में पानी घुसना।

दोनों ही क्षेत्रों में अति-वर्षा से बाढ़, रोग और जन-धन की हानि होती है।

3संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए लिखिए।
पुराने माध्यमनए माध्यम
पत्र, तार (टेलीग्राम), संदेशवाहक, कबूतर, ढोल/नगाड़ा। धीमे, समय लगता था, पर भावनात्मक।मोबाइल, ई-मेल, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, संदेश ऐप। तुरंत, दूर तक, सस्ते, पर कभी-कभी अवैयक्तिक।

कविता में कवि के पास तेज़ माध्यम न होने से वह कल्पना में सावन के बादल को दूत बनाता है — यह पुराने, भावपूर्ण संचार का काव्यात्मक रूप है।

4'भारत का स्वतंत्रता संग्राम' विषय पर लेख लिखिए।

भारत का स्वतंत्रता संग्राम

भारत लगभग 200 वर्षों तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। स्वतंत्रता-प्राप्ति की यह यात्रा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से आरंभ मानी जाती है। इसके बाद अनेक आंदोलन हुए — असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) तथा 'भारत छोड़ो आंदोलन' (1942)।

महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग से जन-आंदोलन खड़ा किया। भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों ने भी बलिदान दिए। भवानीप्रसाद मिश्र जैसे अनेक कवि-लेखकों ने भी आंदोलन में भाग लेकर जेल यातनाएँ सहीं — इसी दौरान उन्होंने 'घर की याद' लिखी।

अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। यह स्वतंत्रता असंख्य सेनानियों के त्याग और बलिदान का परिणाम है, जिसे हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए।

यह संक्षिप्त नमूना लेख है; पुस्तकालय/शिक्षक की सहायता से इसे और विस्तृत किया जा सकता है।

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सृजन

रचनात्मक लेखन
1कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है — वे पत्र में क्या-क्या लिखतीं?

प्रिय भवानी,
आशीर्वाद!

तेरे बिना घर सूना-सूना लगता है। आज भी सावन बरस रहा है और मुझे तेरा बचपन याद आ रहा है, जब तू भीगता हुआ बाड़े में लौकी के बीज बोता था। बेटा, मन छोटा मत करना — तूने जो राह चुनी है, वह सच्ची और पवित्र है। हम सब ठीक हैं, तू अपना ध्यान रखना और खूब हिम्मत से रहना। तेरे पिताजी तुझ पर गर्व करते हैं। जल्दी घर लौटना।

तेरी माँ

नमूना पत्र — भावों के आधार पर अपने शब्दों में लिख सकते हैं।
2माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में बातचीत को संवाद-लेखन के रूप में लिखिए।

माँ — सुनिए जी, आज फिर बहुत पानी बरस रहा है। हमारे भवानी की बहुत याद आ रही है।

पिताजी — हाँ, उसे तो बरसात बहुत प्यारी थी। पर तुम चिंता मत करो, वह हिम्मती है।

माँ — जेल में न जाने कैसे रहता होगा। आँखें भर आती हैं।

पिताजी — रोओ मत। उसने देश के लिए यह कष्ट चुना है — हमें गर्व करना चाहिए।

माँ — सच कहा आपने। हम धीरज रखेंगे, ताकि वह भी मजबूत रहे।

नमूना संवाद — कविता के भावों के अनुरूप विस्तार किया जा सकता है।
3किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से संदेश भेजना हो तो किसे चुनेंगे और क्यों?

मैं संदेश भेजने के लिए हवा को चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि हवा हर जगह बिना रुके पहुँच जाती है, सीमाएँ नहीं देखती और सबको छू लेती है। वह कोमलता से मेरे प्रियजनों तक मेरा स्नेह-भरा संदेश पहुँचा सकती है। (आप बादल, नदी, चिड़िया आदि भी चुन सकते हैं।)

यह नमूना उत्तर है — अपनी पसंद और कारण लिखें।

🔤

व्याकरण की बात

भाषा से संवाद
1रेखांकित स्थानीय शब्दों का अर्थ स्पष्ट कर उनसे नए वाक्य बनाइए।
शब्दअर्थनया वाक्य
छिनक्षण, पलएक छिन में मौसम बदल गया।
फलानी / फलानाअमुक, कोई निश्चित (व्यक्ति/वस्तु)फलाने आदमी ने यह काम पूरा किया।
भौजीभाई की पत्नी, भाभीमेरी भौजी बहुत स्नेहशील हैं।
बड़बरगद, वट वृक्षगाँव के चौराहे पर पुराना बड़ खड़ा है।
2रेखांकित शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।

(क) "बहुत पानी गिर रहा है" उदाहरण

पानीसंज्ञा
बहुतविशेषण
गिर रहा हैक्रिया

(ख) "पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा"

बुढ़ापासंज्ञा (भाववाचक)
व्यापाक्रिया
जिनकोसर्वनाम (संबंधवाचक)

(ग) "खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह"

खुलेविशेषण
वहसर्वनाम (पुरुषवाचक)
बदनसंज्ञा
फिरताक्रिया

(घ) "एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए"

एकविशेषण (संख्यावाचक)
फूट जाएक्रिया
पत्तासंज्ञा

(ङ) "हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन"

सजीलेविशेषण
मेरेसर्वनाम (सार्वनामिक विशेषण)
सावनसंज्ञा

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गतिविधियाँ

करके सीखें
1अपना एक परिवार-वृक्ष तैयार कर प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व पर कुछ पंक्तियाँ लिखिए।

परिवार-वृक्ष में सबसे ऊपर दादा-दादी/नाना-नानी, उसके नीचे माता-पिता व उनके भाई-बहन, फिर आप व आपके भाई-बहन रखें। प्रत्येक के नाम के साथ एक-दो विशेषता लिखें — जैसे—

  • दादा जी — अनुशासनप्रिय, कहानियाँ सुनाने वाले।
  • माँ — स्नेहमयी, घर को जोड़े रखने वाली।
  • पिताजी — मेहनती, हमारी हर ज़रूरत का ध्यान रखने वाले।
दादा और पोती
परिवार के स्नेह-भरे रिश्ते — परिवार-वृक्ष की प्रेरणा
यह केवल मार्गदर्शन है — अपना वास्तविक परिवार-वृक्ष बनाएँ।
2ध्वनि आधारित शब्द (झरा-झर, थर-थर, सर-सर) किस प्रकार वातावरण का निर्माण करते हैं?

ये अनुकरणात्मक (ध्वन्यात्मक) शब्द हैं, जो वास्तविक ध्वनियों का अनुकरण करते हैं—

  • झरा-झर — पानी के लगातार झरने/गिरने की ध्वनि — मूसलधार वर्षा का दृश्य।
  • हरा-हर — पत्तों के हिलने की आवाज़।
  • सर-सर — हवा के बहने की मधुर ध्वनि।
  • थर-थर — काँपने/सिहरने का भाव — मन की बेचैनी।

इन शब्दों से कविता में नाद-सौंदर्य और सजीव वर्षा-वातावरण बनता है — पाठक को वर्षा का दृश्य व ध्वनि दोनों अनुभव होते हैं। इन्हें ऊँचे स्वर में लय के साथ पढ़ने पर प्रभाव और बढ़ जाता है।


📖

शब्द-संपदा

कठिन शब्दों के अर्थ
शब्दअर्थ
घनेरा/घनागाढ़ा, जिसके अवयव पास-पास सटे हों
तिर/तिरनातैरना, उतराना, पार होना
परितापअत्यधिक दुख, शोक, बहुत गर्मी, अत्यधिक ताप
चतुर्दिक्चारों ओर, चौखूँट
वज्रबहुत कठोर, जिस पर किसी का प्रभाव न पड़े
नवनीतताजा मक्खन
उरहृदय, श्रेष्ठ, मन
झंझातेज़ हवा, आँधी-पानी
लरजताकाँपना, हिलना-डुलना, भयभीत होना
मूठमुट्ठी-भर चीज, मुट्ठी, दस्ता
अभागाभाग्यहीन
धीरविचलित न होने वाला, दृढ़, गंभीर
झारीहाथ-मुँह धुलाने आदि के लिए टोंटीदार बर्तन
बेलाएक सुगंधित फूल (मोगरा); कटोरा
फलानी/फलाँकोई आदिष्ट व्यक्ति/वस्तु, अमुक
निहायतबहुत ज़्यादा, अत्यधिक
लुनाईसुंदरता, सलोनापन; फसल काटने की क्रिया
क्षितिजजहाँ धरती और आकाश मिलते दिखें
तृषातीव्र इच्छा, प्यास, लोभ
अश्रुआँसू
हासहँसी, प्रसन्नता, खुशी
क्लेशदुख, पीड़ा, क्रोध, द्वेष
बड़बरगद, वट
उमगउल्लास, मौज, जोश, आकांक्षा
ख़मझुका हुआ, टेढ़ा, वक्र, घुमाव
विरसनीरस, अप्रिय, जी उबाने वाला
कातनाचरखे/तकली पर रुई से धागा निकालना
अस्तडूबा हुआ, समाप्त, अदृश्य होना, अंत

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साथ-साथ पढ़ें

तब याद तुम्हारी आती है — रामनरेश त्रिपाठी

यह सहयोगी कविता ईश्वर के प्रति कवि की भक्ति-भावना को व्यक्त करती है। प्रकृति के सुंदर क्षणों में — सुबह चिड़ियों के गीत, कलियों का खिलना, ठंडी हवा, चमकते तारे और शान से उठते चाँद को देखकर — कवि को जगत के रचयिता प्रभु की याद आती है।

"हे जग के सिरजनहार प्रभो! तब याद तुम्हारी आती है।"

'घर की याद' में जहाँ कवि को परिवार की याद आती है, वहीं यहाँ कवि को प्रकृति के माध्यम से ईश्वर की स्मृति होती है — दोनों कविताओं में स्मृति और प्रेम की भावना समान रूप से उभरती है।

चिड़ियाँ और प्रकृति
'तब याद तुम्हारी आती है' — प्रकृति के दृश्यों में बसी भक्ति

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