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NCERT Solution

Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 11 | Jhansi Ki Rani | NCERT Solutions झाँसी की रानी

Class 9 · Hindi (Ganga) · Chapter-11 झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) · All Board · ENGLISH · 7 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD
कक्षा 9 • हिंदी • काव्य

झाँसी की रानी

संपूर्ण प्रश्न-उत्तर एवं व्याख्या सहित समाधान
— सुभद्रा कुमारी चौहान
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कवयित्री एवं कविता परिचय

सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ। वे अपने समय की प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थीं और उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा। उनके लेखन में देशप्रेम, स्त्री-केंद्रित विषय और स्वाधीनता संग्राम के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखती है।

प्रमुख रचनाएँ — मुकुल, त्रिधारा (कविता संग्रह), बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह), कदंब का पेड़, सभा का खेल (बाल साहित्य)। उन्हें ‘सेकसरिया पुरस्कार’ से दो बार सम्मानित किया गया। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हुई।

‘झाँसी की रानी’ कविता 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। यह रानी लक्ष्मीबाई के जीवन-वृत्त, संघर्ष और विद्रोह से ओजपूर्ण साक्षात्कार कराती है। वीरता, उत्साह और देशप्रेम से ओत-प्रोत यह कविता पाठकों में जोश व साहस का संचार करती है। इसकी कथात्मक शैली और गेयता इसे और भी जीवंत बनाती है।

📝

मेरे उत्तर मेरे तर्कवस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रश्न — सही उत्तर एवं तर्क

1“बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
  • (क) देश का स्वाभिमान
  • (ख) विद्रोह की चिंगारी
  • (ग) स्वाधीनता का भय
  • (घ) भारत की युवावस्था
सही उत्तर — (ख)

तर्क लंबे समय से परतंत्रता में जकड़े, थके हुए ‘बूढ़े’ भारत में 1857 के समय नई ऊर्जा और विद्रोह की भावना फिर से जाग उठी। ‘नई जवानी’ यहाँ युवावस्था का शाब्दिक अर्थ नहीं, बल्कि अंग्रेज़ों के विरुद्ध उठ खड़े होने के जोश और विद्रोह की चिंगारी का प्रतीक है।

“दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी”

अगली पंक्ति इसी विद्रोह-भाव की पुष्टि करती है, अतः ‘युवावस्था’ (घ) मात्र शाब्दिक है — भाव की दृष्टि से (ख) उपयुक्त है।

2लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
  • (क) विनम्रता
  • (ख) शोभायुक्त
  • (ग) सहिष्णुता
  • (घ) कठोरता
सही उत्तर — (ख)

तर्क ‘छबीली’ शब्द ‘छबि’ (सुंदरता/शोभा) से बना है। शब्द-संपदा के अनुसार इसका अर्थ है — तेजस्वी, सुंदर, छबिवाली, सजीली। बचपन में मनु इतनी तेजस्वी, सुंदर व चपल थीं कि नाना साहब उन्हें प्यार से ‘छबीली’ पुकारते थे। यह उनके शोभायुक्त, आकर्षक व्यक्तित्व को दर्शाता है।

3“बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
  • (क) अंग्रेज़ों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
  • (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
  • (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
  • (घ) रानी के जीवन में उदासी होना
सही उत्तर — (ग)

तर्क इस पंक्ति से ठीक पहले राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु का वर्णन है — “निःसंतान मरे राजाजी / रानी शोक-समानी थी”। ‘दीप बुझना’ मृत्यु एवं अंधकार का प्रतीक है। झाँसी का दीप अर्थात् उसका शासक (राजा) बुझ गया, और यही अवसर पाकर डलहौजी मन में हर्षित हुआ। अतः इसका सीधा भावार्थ है — राजा की आकस्मिक मृत्यु

4“इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत करती है?
  • (क) असहयोग आंदोलन
  • (ख) भारत छोड़ो आंदोलन
  • (ग) 1857 की क्रांति
  • (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
सही उत्तर — (ग)

तर्क पूरी कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित है। ‘स्वतंत्रता-महायज्ञ’ यही क्रांति है, जिसमें नाना धुंधूपंत, तांतिया टोपे, अज़ीमुल्ला खां, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह जैसे वीर बलिदान हुए। असहयोग, भारत छोड़ो व सविनय अवज्ञा आंदोलन 20वीं सदी के हैं — कविता के काल से मेल नहीं खाते।

5“व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
  • (क) नवाबों के लिए
  • (ख) जनरल डलहौज़ी के लिए
  • (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
  • (घ) ब्रिटिश राज के लिए
सही उत्तर — (घ)

तर्क अंग्रेज़ (ईस्ट इंडिया कंपनी / ब्रिटिश सत्ता) भारत में पहले व्यापारी बनकर आए और दया/अनुमति माँगकर व्यापार किया। बाद में डलहौज़ी के समय उन्होंने “पैर पसारे” और राज्य हड़प लिए। पंक्ति में ‘विकट फिरंगी’ अर्थात् संपूर्ण ब्रिटिश सत्ता/अंग्रेज़ शासन की ओर संकेत है — इसलिए ‘यह’ = ब्रिटिश राज।

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मेरी समझ मेरे विचारविचारात्मक / दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
बालिका मनु — घुड़सवारी व शस्त्र-विद्या
बालिका मनु — घुड़सवारी व शस्त्र-विद्या
उत्तर

कविता के अनुसार लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल साधारण बालिकाओं जैसे नहीं, अपितु वीरता और युद्ध-कौशल से जुड़े थे —

  • बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी जैसे शस्त्र ही उनकी ‘सहेली’ थे।
  • नकली युद्ध करना तथा व्यूह (सेना की रचना) बनाना।
  • खूब शिकार खेलना।
  • सैन्य घेरना और दुर्ग (किला) तोड़ना — “ये थे उसके प्रिय खिलवार”।
“बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी … सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार”

बचपन की भिन्नता: उस युग में सामान्यतः लड़कियाँ गुड़ियों व चूड़ियों से खेलती थीं, परंतु मनु शस्त्र-संचालन, घुड़सवारी और युद्ध-कौशल सीखती थीं। वे नाना साहब के साथ पढ़तीं-खेलतीं और उन्हें वीर शिवाजी की गाथाएँ ज़बानी याद थीं। बचपन से ही उनमें वीरता, साहस व नेतृत्व के गुण थे — यही उन्हें औरों से अलग बनाता था।

2“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति किस घटना की ओर संकेत करती है?
सौभाग्य पर छाई काली घटा
सौभाग्य पर छाई काली घटा
उत्तर

यह पंक्ति लक्ष्मीबाई के पति राजा गंगाधर राव की मृत्यु तथा उनके विधवा होने रूपी दुर्भाग्य के आगमन की ओर संकेत करती है। ‘काली घटा’ दुख व विपत्ति का प्रतीक है।

विवाह के बाद महलों में सौभाग्य और खुशियाँ छाई थीं, परंतु समय (कालगति) चुपचाप दुख ले आया — राजा निःसंतान मृत्यु को प्राप्त हुए और रानी विधवा हो गईं (“रानी विधवा हुई हाय!”)। यही वह अनिष्टकारी ‘काली घटा’ है।

3“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” — समाज के विभिन्न वर्गों की इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम में क्या महत्व है?
उत्तर

यह पंक्ति बताती है कि 1857 की क्रांति में राजा-महाराजा (महल) और सामान्य गरीब जनता (झोंपड़ी) — दोनों ही एक साथ अंग्रेज़ों के विरुद्ध उठ खड़े हुए। इस एकता का महत्व —

  • स्वतंत्रता संग्राम किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का साझा संघर्ष था।
  • अमीर-गरीब, राजा-प्रजा के भेद मिटकर एक राष्ट्रीय चेतना बनी।
  • इसी एकजुटता ने आंदोलन को व्यापक और शक्तिशाली बनाया — आग झाँसी, दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना तक फैली।

निष्कर्ष: जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होते हैं, तभी बड़े परिवर्तन और स्वतंत्रता संभव होते हैं। एकता ही स्वतंत्रता संग्राम की असली शक्ति थी।

4“सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” — ‘नीलाम छापते’ किसकी ओर संकेत करता है? किसकी व क्यों नीलामी होती थी?
उत्तर

‘नीलाम छापते’ इस ओर संकेत करता है कि अंग्रेज़ भारतीय राजघरानों की संपत्ति (गहने, कीमती सामान) को सार्वजनिक रूप से (सरे-आम) नीलाम करते थे और उसकी सूचना/विज्ञापन अपने अखबारों में छापते थे।

किसकी नीलामी: भारतीय रानियों-बेगमों के गहने-कपड़ों तथा राजमहलों के बहुमूल्य जेवरों की —

“‘नागपुर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ के लो नौलख हार’”

क्यों: अंग्रेज़ों ने राज्य हड़पकर शाही खजाने व संपत्ति जब्त कर ली थी; उसे बेचकर वे धन कमाते और भारतीयों का अपमान करते थे — यहाँ तक कि देश की मान-मर्यादा भी परदेशियों के हाथ बिक रही थी (“परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी”)।

5“अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” — लक्ष्मीबाई को किन गुणों के कारण ‘अवतारी’ कहा गया?
उत्तर

लक्ष्मीबाई को ‘अवतारी’ (देवी का अवतार) इसलिए कहा गया क्योंकि उनमें साधारण मनुष्य से बढ़कर असाधारण, दैवीय गुण थे —

  • अद्भुत वीरता व पराक्रम — “स्वयं वीरता की अवतार”।
  • अदम्य साहस व निडरता — वॉकर को घायल कर भगाना, ह्यूरोज़ को परास्त करना।
  • कुशल युद्ध-कौशल, घुड़सवारी एवं शस्त्र-संचालन।
  • देशप्रेम व बलिदान — मात्र तेइस वर्ष की आयु में देश के लिए प्राणों की आहुति।
  • नेतृत्व क्षमता — सेना का सफल संचालन।

कवयित्री कहती हैं कि वे मानो स्वतंत्रता की देवी बनकर सोए भारत को जगाने आई थीं — “हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी”। इन्हीं अलौकिक गुणों के कारण उन्हें ‘अवतारी’ कहा गया।

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कविता में कहानीलक्ष्मीबाई के जीवन की प्रमुख घटनाएँ — समय-रेखा (Timeline)

यह एक कथात्मक कविता है, जिसमें लक्ष्मीबाई के बचपन से वीरगति तक की घटनाएँ क्रमवार आती हैं। प्रमुख घटनाओं की समय-रेखा —

बेटे सहित किले से प्रस्थान
बेटे सहित किले से प्रस्थान

1 · जन्म व बचपन

मनु का जन्म; नाना साहब के साथ पढ़ना-खेलना, घुड़सवारी व शस्त्र-विद्या सीखना; तेजस्विता के कारण ‘छबीली’ नाम।

2 · विवाह

झाँसी के राजा गंगाधर राव से विवाह; ‘लक्ष्मीबाई’ बनकर झाँसी आना; महलों में सौभाग्य व खुशियाँ।

3 · वैधव्य

राजा की निःसंतान मृत्यु; रानी का विधवा होना — “काली घटा घेर लाई”।

4 · राज्य हड़प

डलहौज़ी की हड़प नीति; ‘लावारिस का वारिस’ बनकर ब्रिटिश का झाँसी पर अधिकार।

5 · विद्रोह की तैयारी

1857 की क्रांति; रानी का ‘रण-चंडी’ रूप; स्वतंत्रता-महायज्ञ का आरंभ।

6 · युद्ध व प्रस्थान

लेफ्टिनेंट वॉकर से द्वंद्व, उसे घायल कर भगाना; कालपी की ओर सौ मील का प्रयाण।

7 · ग्वालियर विजय

यमुना-तट पर अंग्रेज़ों को हराना; ग्वालियर पर अधिकार (सिंधिया का भागना)।

8 · वीरगति

जनरल ह्यूरोज़ से घिरना; नाला पार करते समय घायल होकर वीरगति — आयु मात्र 23 वर्ष।

🤝

साझा साथ / साझा संघर्षविषयों से संवाद — अभ्यास प्रश्न

1“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया” — ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था?
हड़प नीति के सूत्रधार
हड़प नीति के सूत्रधार
उत्तर

यह ‘राज्य हड़प नीति’ (व्यपगत का सिद्धांत / Doctrine of Lapse) के कारण होता था, जिसे लॉर्ड डलहौज़ी ने लागू किया।

इस नीति के अनुसार — यदि किसी भारतीय शासक की मृत्यु बिना प्राकृतिक (अपने) पुत्र के हो जाती और उसने दत्तक (गोद लिया) पुत्र लिया होता, तो अंग्रेज़ उस दत्तक उत्तराधिकारी को मान्यता नहीं देते थे और राज्य को ‘लावारिस’ मानकर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लेते थे।

इसी नीति से झाँसी, सतारा, नागपुर, संबलपुर, झज्जर आदि कई रियासतें हड़प ली गईं। राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव को उत्तराधिकारी न मानकर अंग्रेज़ों ने झाँसी हड़प ली — इसीलिए “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”।

2कविता में उल्लिखित वीरों की सूची बनाइए तथा 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
उत्तर
वीर1857 की क्रांति में योगदान
नाना धुंधूपंत
(नाना साहब)
कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया; पेशवा परंपरा के प्रतीक।
तांतिया टोपेनाना साहब के कुशल सेनापति; छापामार (गुरिल्ला) युद्ध में निपुण।
अज़ीमुल्ला खांनाना साहब के चतुर सलाहकार; क्रांति की योजना व प्रचार में सक्रिय।
अहमद शाह मौलवीअवध (फैज़ाबाद/लखनऊ) क्षेत्र में विद्रोह के प्रमुख नेता।
ठाकुर कुँवरसिंहबिहार (जगदीशपुर/आरा) में वृद्धावस्था में भी अदम्य साहस से संघर्ष।
रानी लक्ष्मीबाईझाँसी की रक्षा हेतु अंत तक लड़ीं; वीरगति प्राप्त की।

शिक्षक की सहायता से इनके विषय में और विस्तृत जानकारी एकत्र की जा सकती है।

3विभिन्न कार्यक्षेत्रों में काम करने वाली प्रसिद्ध स्त्रियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कार्यक्षेत्रप्रसिद्ध स्त्रियाँ
दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड)हर्षिनी कान्हेकर — भारत की पहली महिला फायर फाइटर
रेलगाड़ी चालकसुरेखा यादव — एशिया की पहली महिला लोको पायलट
खेल के विभिन्न क्षेत्रपी.टी. उषा, मैरी कॉम, साइना नेहवाल, पी.वी. सिंधु, मिताली राज
व्यापार और प्रबंधनइंदिरा नूयी, किरण मजूमदार-शॉ, फाल्गुनी नायर
विज्ञान और तकनीककल्पना चावला, टेसी थॉमस (‘मिसाइल वुमन’), अनुराधा टी.के. (इसरो)
4कविता में आए 1857 के संग्राम से संबंधित स्थानों को मानचित्र में चिह्नित कीजिए।
भारत का मानचित्र — स्थानों को चिह्नित कीजिए
भारत का मानचित्र — स्थानों को चिह्नित कीजिए
उत्तर

कविता में आए प्रमुख स्थान (मानचित्र में अपने राज्य के अनुसार चिह्नित कीजिए) —

  • उत्तर/मध्य भारत: दिल्ली (देहली), झाँसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, ग्वालियर, कालपी, बिठूर, जबलपुर, पटना।
  • पश्चिम/दक्षिण: नागपुर, उदयपुर, सतारा, कोल्हापुर, तंजौर, कर्नाटक, मद्रास।
  • अन्य: सिंध, पंजाब, ब्रह्मदेश (बर्मा), बंगाल।

शिक्षक की सहायता से इन नगरों को मानचित्र पर बिंदु लगाकर नाम लिखें।

📖

व्याकरण की बातशब्द एक — अर्थ अनेक (अनेकार्थी शब्द)

1नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों में रेखांकित अनेकार्थी शब्दों के सही अर्थ चुनिए।
उत्तर
काव्य-पंक्तिदिए गए अर्थसही अर्थ
तीर चलाने वाले कर में…”नदी का किनारा / बाण / सीसाबाण
“रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई”शास्त्र में लिखी व्यवस्था / प्रणाली / विधाता / तरीकाविधाता
“रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में”युद्ध / संशय / युग्मयुद्ध
“हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी”गोल पिंड / रस्सी-सूत-बर्फ का गोला / तोप के गोले / नारियलतोप से दागने वाले गोले
“मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी”आभा / गति / तेज चाकू (धार)आभा
2‘कानपूर’ और ‘कानपुर’ की वर्तनी में भिन्नता क्यों है? ऐसे अन्य प्रयोग ढूँढ़िए।
उत्तर

कवयित्री ने कविता की लय, तुक (छंद) और गेयता बनाए रखने के लिए मानक वर्तनी से कुछ भिन्न रूप प्रयोग किए हैं। कविता में ऐसे अन्य उदाहरण —

  • देहली (दिल्ली), रजधानी (राजधानी)
  • मरदानी (मर्दानी), नव्वाबों (नवाबों)
  • बिरानी (बेगानी/पराई), फिरंगी — लय हेतु प्रचलित रूप

ये प्रयोग केवल भाषा को छंद व लय के अनुकूल बनाने हेतु किए गए हैं। (इस विषय पर कक्षा में शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए।)

🗣️

मुहावरेपंक्तियों में प्रयुक्त मुहावरे एवं नए वाक्य

मुहावरा: ऐसे वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष/लाक्षणिक अर्थ देते हैं।

उत्तर
काव्य-पंक्तिप्रयुक्त मुहावरानया वाक्य
(उदाहरण) “…उसने मुँह की खाई थी”मुँह की खाना
(पराजित होना)
मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी।
“डलहौज़ी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया”पैर पसारना
(प्रभाव/अधिकार बढ़ाना)
थोड़ी-सी छूट मिलते ही उस कंपनी ने पूरे बाज़ार में पैर पसार लिए।
“राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया”पैरों ठुकराना
(तिरस्कारपूर्वक ठुकरा देना)
सफलता मिलते ही उसने अपने पुराने मित्रों को पैरों ठुकरा दिया।
“हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थी”सोई ज्योति जगाना
(सुप्त चेतना/उत्साह जगाना)
एक अच्छे शिक्षक का काम विद्यार्थियों के मन में सोई ज्योति जगाना है।
“मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी”धूम मचाना
(खूब हलचल/प्रसिद्धि करना)
उसकी नई पुस्तक ने प्रकाशित होते ही बाज़ार में धूम मचा दी।
✍️

सृजनरचनात्मक लेखन — पत्र एवं डायरी

1काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा हो।
नमूना उत्तर

झाँसी दुर्ग,
संध्याकाल

आदरणीया महारानी लक्ष्मीबाई जी,

सादर प्रणाम। हम दोनों — काना और मंदरा — आपकी सेवा में सदैव तत्पर हैं। अंग्रेज़ी सेना दुर्ग की ओर बढ़ रही है, अतः युद्ध की रणनीति पर हमारे कुछ विचार प्रस्तुत हैं —

1. दुर्ग के मुख्य द्वारों पर अधिक तोपें तैनात की जाएँ तथा रात्रि-पहरा कड़ा किया जाए।
2. महिला सेना (दुर्गा दल) को पीछे की रक्षा-पंक्ति पर रखा जाए ताकि अचानक आक्रमण रोका जा सके।
3. आवश्यकता पड़ने पर हम छापामार युद्ध (गुरिल्ला) अपनाएँ और शत्रु को भ्रमित करें।
4. हम दोनों अंत तक आपके साथ युद्धक्षेत्र में डटी रहेंगी।

हमें विश्वास है कि आपके नेतृत्व में विजय अवश्य मिलेगी। जय भवानी!

आपकी विश्वासपात्र —
काना व मंदरा

2युद्धपूर्व रात्रि में रानी के मन के भावों को / अपने जीवन के किसी ऊहापोह भरे क्षण को डायरी में लिखिए।
नमूना उत्तर (डायरी)

दिनांक: ___ | रात्रि

आज मन में अजीब-सी हलचल है। कल बड़ी परीक्षा है और मुझे लग रहा है मानो कोई युद्ध सामने खड़ा हो। एक ओर मन कहता है — सब अच्छा होगा, तैयारी पूरी है; दूसरी ओर भीतर एक डर भी है। बार-बार सोच रही/रहा हूँ कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया।

फिर मुझे झाँसी की रानी का स्मरण होता है — जिन्होंने इतने बड़े संकट के सामने भी हार नहीं मानी। उनकी निडरता मुझे साहस देती है। मैंने मन में ठान लिया है कि घबराना नहीं, पूरे आत्मविश्वास से सामना करूँगी/करूँगा। आज की यह ऊहापोह कल मेरी सफलता की सीढ़ी बनेगी। अब चैन की नींद लूँगी/लूँगा।

🎯

गतिविधियाँशौर्य के समाचार • हरबोलों की कहानी

1कविता की घटनाओं को समाचार-वाचक की तरह समाचार रूप में प्रस्तुत कीजिए (शौर्य के समाचार)।
नमूना समाचार

📻 विशेष समाचार — झाँसी रणभूमि से

“आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया। अपने पुत्र को पीठ पर बाँधकर, हाथ में तलवार थामे रानी अंग्रेज़ी सेना पर टूट पड़ीं। लेफ्टिनेंट वॉकर को घायल कर उन्होंने पीछे धकेल दिया। उनके अदम्य साहस के सामने शत्रु सेना हतप्रभ रह गई। समूचा देश इस वीरांगना के पराक्रम को नमन कर रहा है।”

2‘हरबोलों’ कौन थे? देशभक्ति-गीतों का संकलन तैयार कीजिए।
अंतिम संग्राम — नाला पार करते हुए
अंतिम संग्राम — नाला पार करते हुए
उत्तर

हरबोला बुंदेलखंड क्षेत्र के लोकगायकों का एक समुदाय था, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा को अपने गीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया। लोकगायकों के ये गीत सामाजिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक मूल्यों को संरक्षित करने का जीवंत माध्यम हैं।

गतिविधि: अपने क्षेत्र/भाषा में प्रचलित देशभक्ति-गीतों (जैसे “सारे जहाँ से अच्छा…”, “ऐ मेरे वतन के लोगों…” आदि) का एक संकलन बनाकर कक्षा में साझा कीजिए।

🌐

भाषा संगम‘बहन’ शब्द — विभिन्न भारतीय भाषाओं में

उत्तर
भाषा‘बहन’ शब्द
हिंदीबहन
संस्कृतभगिनी, स्वसृ
पंजाबी / उर्दूभैण / बहन, हमशीरा
मराठी / गुजरातीबहीण / बहेन
बांग्ला / असमियाबोन, भगिनी / भनी, बाइदेउ
तमिल / तेलुगु / कन्नड़अक्का / अक्कॅ / अक्क, तंगि
नेपाली / ओड़िआबैनी, दीदी / भउणी
अंग्रेज़ी (अतिरिक्त)Sister

गतिविधि: उपर्युक्त वाक्य “कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

🪟

झरोखे से — झलकारी बाई1857 की एक और वीरांगना

झलकारी बाई
झलकारी बाई

जन्म: 22 नवंबर 1830, झाँसी के निकट भोजला गाँव। एक सामान्य परिवार से होने पर भी अपनी दृढ़ता व साहस से वे एक आदरणीय योद्धा बनीं।

उन्होंने बहुत कम उम्र में ही घुड़सवारी, अस्त्र-शस्त्र की कला, तीरंदाज़ी, कुश्ती व निशानेबाज़ी सीख ली। उनका चेहरा रानी लक्ष्मीबाई से मिलता-जुलता था, इसलिए वे रानी की ‘दुर्गा दल’ (महिला सेना) में महत्वपूर्ण स्थान रखती थीं।

1858 में जब जनरल ह्यूरोज़ ने झाँसी के किले पर आक्रमण किया, तो झलकारी बाई ने स्वयं रानी का वेश धारण कर सेना की कमान सँभाली और अंग्रेज़ों को भ्रमित किए रखा। उनकी इसी चाल के कारण रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र सहित सुरक्षित किले से निकल सकीं। वे ‘अमर शहीद’ कहलाईं और बुंदेलखंड की लोक-स्मृति का अमिट हिस्सा बन गईं — हर वर्ष उनके सम्मान में झलकारी बाई जयंती मनाई जाती है।

॥ खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी ॥ SOLUTIONS BY @EDUGROWN

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