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NCERT Solution

Chapter 9 : मैया मैं नहिं माखन खायो (Maiya Main Nahin Makhan Khayo) (NCERT Solution) class 6th hindi

Class 6 · Hindi (Malhar) · Chapter 9 : मैया मैं नहिं माखन खायो (Maiya Main Nahin Makhan Khayo) · All Board · All Medium · 13 views

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कक्षा 8 · हिंदी · मल्हार · अध्याय 9

मैया मैं नहिं माखन खायो

सूरदास के इस प्रसिद्ध वात्सल्य-पद के सभी प्रश्नों के सरल एवं विस्तृत उत्तर — “पाठ से” व “पाठ से आगे” की हर गतिविधि, चित्रों सहित।

✍️ कवि — सूरदास 🎶 विषय — कृष्ण की बाल-लीला 📘 संपूर्ण हल

पद — एक झलक

मैया मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
— सूरदास
छीके तक पहुँचने की कोशिश करते बाल-कृष्ण
पाठ से
😊मेरी समझ से
क (1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
  • मुझे तुम पराया समझती हो।
  • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
  • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
  • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

कारण: कृष्ण कहते हैं — “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” अर्थात् मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें (हाथ) बहुत छोटी हैं; फिर इतनी ऊँचाई पर लटके छीके तक भला मैं पहुँच ही कैसे सकता हूँ? यही उनका मुख्य तर्क है कि माखन खाना उनके लिए संभव ही नहीं था।

क (2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
  • गाय चरा रहे थे।
  • माखन खा रहे थे।
  • मधुबन में भटक रहे थे।
  • मित्रों के संग खेल रहे थे।

कारण: कृष्ण अपनी सफ़ाई में बताते हैं कि सुबह होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था — “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।” यानी वे दिन भर गाय चरा रहे थे और साँझ ढले घर लौटे। (पद के अनुसार वे बंसीवट के पास इधर-उधर भी घूमते रहे, पर उनका मुख्य कार्य गाय चराना ही था।)

ख अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

यह कक्षा-चर्चा गतिविधि है। दोनों उत्तर सीधे पद की पंक्तियों पर आधारित हैं — छीके तक छोटे हाथों का न पहुँचना, और सुबह गायों के साथ मधुबन जाना। मित्रों के साथ इन्हीं पंक्तियों के आधार पर अपने चुनाव को पुष्ट कीजिए।

🧩मिलकर करें मिलान (शब्द ↔ अर्थ)
शब्दसही अर्थ / संदर्भ
1जसोदा →यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2पहर →समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिन में आठ पहर होते हैं)।
3लकुटि-कमरिया →लाठी और छोटा कंबल/कमली (श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाते थे)।
4बंसीवट →एक वट वृक्ष (मान्यता है कि कृष्ण इसी वृक्ष पर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को बुलाते थे)।
5मधुबन →मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6छीको →रस्सियों का बुना गोल जाल, जो ऊँचाई पर लटकाया जाता है ताकि दूध-दही आदि को कुत्ते-बिल्ली न पा सकें।
7माता →जन्म देने वाली, जननी, माँ।
8ग्वाल-बाल →गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी-साथी।
💬पंक्तियों पर चर्चा
क “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”

अर्थ: कृष्ण माँ से कहते हैं कि सुबह होते ही, गायों के पीछे-पीछे उन्हें मधुबन (चरागाह) भेज दिया गया था। यानी वे अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि भेजे जाने पर सारा दिन गायें चराने गए थे। इस पंक्ति से उनका भोलापन और यह सफ़ाई झलकती है कि जब वे दिन भर घर से बाहर थे, तो घर का माखन कैसे खा सकते थे।

ख “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”

अर्थ: कृष्ण की भोली-भाली, तर्कपूर्ण बातें सुनकर यशोदा का मन प्यार से भर गया। वे मुसकरा उठीं (हँस पड़ीं) और कृष्ण को अपने हृदय से (गले) लगा लिया। इस पंक्ति में माँ का असीम वात्सल्य प्रकट होता है — डाँटने के बजाय वे बच्चे को स्नेह से गले लगा लेती हैं।

यशोदा कृष्ण को गले लगाती हुईं
वात्सल्य — यशोदा कृष्ण को हृदय से लगाती हुईं
🤔सोच-विचार के लिए
क पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?

कृष्ण ने अपनी सफ़ाई में अपने बारे में ये बातें बताईं —

• वे सुबह ही गायों के पीछे मधुबन चराने भेज दिए गए थे।
• वे चार पहर (पूरा दिन) बंसीवट के पास घूमते रहे और साँझ ढले घर लौटे।
• वे तो छोटे-से बालक हैं, उनके हाथ (बाँहें) बहुत छोटे हैं।
• इतने छोटे हाथों से वे ऊँचाई पर लटके छीके तक पहुँच ही नहीं सकते।
• ग्वाल-बाल (साथी) उनसे बैर रखते हैं, इसलिए उन्होंने ज़बरदस्ती माखन उनके मुँह पर पोत दिया।

इस प्रकार वे बार-बार यही सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।

ख यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?

नन्हे कृष्ण जिस भोलेपन और चतुराई से एक-एक तर्क देकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध कर रहे थे, उससे यशोदा का हृदय ममता और स्नेह से भर उठा। उन्हें कृष्ण की बातें बड़ी प्यारी लगीं। बच्चे की मासूमियत पर उन्हें क्रोध आने के बजाय हँसी आ गई और वात्सल्य उमड़ पड़ा — इसीलिए उन्होंने कृष्ण को डाँटने के बजाय हँसते हुए गले से लगा लिया।

🎼कविता की रचना
तुक क्या है? इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।

तुक: जब पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि एक जैसी होती है, तो उसे ‘तुक’ कहते हैं। जैसे — ‘पठायो’ और ‘आयो’ की अंतिम ध्वनि समान है।

इस पद की विशेषताएँ:

• पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्दों में तुक मिलता है (खायो–पठायो–आयो–पायो–लपटायो...), जिससे पद लयबद्ध व गेय बन जाता है।
• यह ब्रजभाषा में रचित है।
• अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम “सूरदास” भी दिया है (यह भनिता कहलाती है)।
• इसमें कृष्ण की बाल-लीला और माँ यशोदा का वात्सल्य बड़े मनोहारी ढंग से चित्रित है।
• भाषा सरल, संवादात्मक और भावपूर्ण है — पूरा पद माँ-बेटे के संवाद के रूप में है।

💡अनुमान या कल्पना से
क श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?

ग्वाल-बालों ने कृष्ण पर माखन चुराकर खाने का आरोप लगाया और उन्हें यशोदा के सामने ले आए। कृष्ण नहीं चाहते थे कि उनकी माँ उन्हें दोषी समझे या उन पर विश्वास खो दे। इसलिए वे स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने और माँ का प्यार व विश्वास बनाए रखने के लिए एक-एक करके तर्क दे रहे थे — ताकि माँ मान जाए कि उन्होंने सचमुच माखन नहीं खाया।

ख जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?

नमूना उत्तर: माँ के गले लगते ही कृष्ण का सारा भय और शिकायत मिट गई होगी। उन्हें बहुत सुकून और खुशी मिली होगी कि माँ ने उन्हें डाँटा नहीं। कृष्ण भी माँ से लिपटकर मुसकरा दिए होंगे, और वह भोला-सा रूठना-मनाना प्रेम में बदल गया होगा। पास खड़े ग्वाल-बाल भी यह दृश्य देखकर मुसकरा उठे होंगे। घर का वातावरण फिर से स्नेह और आनंद से भर गया होगा।

🔤शब्दों के रूप
क “भोर भयो गैयन के पाछे” — इन ब्रज-शब्दों के मानक (आम) रूप लिखिए:
पाछे=पीछे
परे=पड़े
छोटो=छोटा
बिधि=विधि
भोरी=भोली
कछु=कुछ
लै=ले
नहिं=नहीं
ख स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 के अर्थों से मिलान:
शब्दअर्थ
1उपजि →उपजना, उत्पन्न होना
2जानि →जानकर, समझकर
3जायो →जन्मा
4जिय →मन, जी
5पठायो →भेज दिया
6पतियायो →विश्वास किया, सच माना
7बहियन →बाँह, हाथ, भुजा
8बिधि →प्रकार, भाँति, रीति
9बिहँसि →मुसकाई, हँसी
10भटक्यो →इधर-उधर घूमा या भटका
11लपटायो →मला, लगाया, पोता
🔁वर्ण-परिवर्तन
“तू माता मन की अति भोरी” — यहाँ ‘ल’ और ‘र’ आपस में बदल गए हैं (भोरी = भोली)। ऐसे और शब्द चुनिए।

इस पद में ‘ल’ और ‘र’ के आपस में बदल जाने के उदाहरण —

भोरी→भोली (र → ल)
कमरिया→कमली (र → ल)

ब्रजभाषा में इस प्रकार का वर्ण-परिवर्तन (‘ल/ड़’ का ‘र’ में या ‘र’ का ‘ल’ में बदलना) बहुत आम है। ऐसे और शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

📜पंक्ति से पंक्ति (पंक्ति ↔ भावार्थ)
पंक्तिभावार्थ
1भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो →सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो →चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो →मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो →ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने हठपूर्वक मक्खन मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो →माँ, तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो →तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो तूने मुझे पराया समझ लिया।
पाठ से आगे
🗣️आपकी बात
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आपको अपनी बात सच सिद्ध करनी पड़ी हो? उस घटना के बारे में बताइए।

नमूना उत्तर: एक बार कक्षा में एक सहपाठी की पेंसिल खो गई और सबने सोचा कि शायद मैंने ली है, क्योंकि वह मेरी पेंसिल जैसी थी। मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने शिक्षक के सामने अपनी बात सिद्ध करने के लिए तर्क दिए — कि मेरी पेंसिल पर मेरा नाम लिखा है, और मैं अपने बस्ते से अपनी पेंसिल निकालकर दिखा भी सकता हूँ। बाद में असली पेंसिल उसी सहपाठी के बस्ते में मिल गई और मेरी सच्चाई साबित हो गई। (आप अपने जीवन की ऐसी कोई घटना लिखिए।)

🏠घर की वस्तुएँ
“छीको केहि बिधि पायो” — ‘छीका’ क्या है, और नीचे दी गई घरेलू वस्तुओं के नाम लिखिए।

छीका: रस्सियों से बुना हुआ गोल जाल (झूला), जिसे छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है। इसमें दूध, दही, माखन आदि रखे जाते हैं ताकि बिल्ली-कुत्ते उन्हें न पा सकें। कृष्ण भी इसी छीके में रखा माखन निकालते थे।

छीका — लटकता रस्सी का जाल
छीका

चित्रों में दिखाई गई घरेलू वस्तुएँ (सामान्य नाम):

घरेलू वस्तुएँ पंक्ति 1
मटका/घड़ा · प्रेस (इस्तरी) · चौकी/पटरा · सिलाई मशीन
घरेलू वस्तुएँ पंक्ति 2
खाट/चारपाई · मर्तबान (बरनी) · सूप/छाज · सिल-बट्टा
घरेलू वस्तुएँ पंक्ति 3
जाँता/चक्की · बीजना (हाथ-पंखा) · मथानी (रई) · चलनी/छलनी
घरेलू वस्तुएँ पंक्ति 4
परात (ढक्कन सहित) · ओखली-मूसल · दही बिलोने की मथानी

इन वस्तुओं के नाम आपके क्षेत्र में अलग भी हो सकते हैं। अपने घर में इन्हें जिस नाम से पुकारा जाता है, वह लिखिए।

🧈दूध से घी बनाने की प्रक्रिया
दूध से दही, दही से मक्खन और मक्खन से घी बनने की प्रक्रिया लिखिए।
दूध से घी बनने की प्रक्रिया के चित्र
दूध से घी बनने के चरण (चित्रानुसार)
  1. गाय (या भैंस) से दूध दुहा जाता है।
  2. दूध को आँच पर उबाला/गरम किया जाता है।
  3. गरम दूध को हल्का ठंडा करके उसमें थोड़ा जामन (दही) मिलाकर जमाया जाता है — इससे दही बनता है।
  4. जमे हुए दही को मथानी (रई) से मथा/बिलोया जाता है।
  5. मथने पर ऊपर मक्खन तैरने लगता है, जिसे इकट्ठा कर लिया जाता है।
  6. इस मक्खन को बर्तन में डालकर आँच पर गरम किया जाता है।
  7. गरम होते ही मक्खन पिघलकर सुनहरा घी बन जाता है, जिसे छानकर बर्तन/मर्तबान में भर लिया जाता है।
⏳समय का माप
क समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग होता है? सूची बनाइए।

पहर और साँझ की तरह समय बताने वाले कुछ शब्द — पल, क्षण, घड़ी, प्रहर, वेला, भोर, दोपहर, संध्या, कल, आज, अभी/अब, पखवाड़ा, सप्ताह, माह, ऋतु, वर्ष, दशक, सदी (शताब्दी), युग, अवधि आदि।

ख श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?

कृष्ण कहते हैं वे चार पहर गाय चराते/घूमते रहे। एक पहर = 3 घंटे।

\( 4 \text{ पहर} \times 3 \text{ घंटे} = 12 \text{ घंटे} \)

अर्थात् श्रीकृष्ण लगभग 12 घंटे गाय चराते थे (भोर से साँझ तक)।

ग वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे घर से निकले होंगे?

वे कुल 12 घंटे बाहर रहे और शाम 6 बजे (सायं 6:00) लौटे। अतः निकलने का समय —

\( \text{सायं } 6\!:\!00 - 12 \text{ घंटे} = \text{प्रातः } 6\!:\!00 \)

अर्थात् वे सुबह लगभग 6 बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे।

घ ‘दोपहर’ (लगभग 12 बजे) तीसरे पहर का प्रारंभ है। तो दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?

तीसरा पहर 12 बजे शुरू होता है और हर पहर 3 घंटे का होता है। पीछे की ओर गिनने पर —

\( \text{तीसरा पहर} = 12\!:\!00 \)
\( \text{दूसरा पहर} = 12\!:\!00 - 3 = 9\!:\!00 \)
\( \text{पहला पहर} = 9\!:\!00 - 3 = 6\!:\!00 \)

अर्थात् दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग सुबह 6 बजे होगा।

🌟हम सब विशेष हैं
महाकवि सूरदास
महाकवि सूरदास — दृष्टिबाधित होते हुए भी अद्भुत काव्य-प्रतिभा
क महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी विशेष क्षमता उनकी कल्पना-शक्ति और काव्य-रचना थी। आपकी, परिजन की, शिक्षक की और मित्र की विशेष क्षमता क्या है?

नमूना उत्तर:

• मेरी: मुझे अच्छी चित्रकारी करना / कहानियाँ सुनाना आता है।
• मेरे परिजन (माँ) की: स्वादिष्ट भोजन बनाना और सबका ध्यान रखना।
• मेरे शिक्षक की: कठिन विषय को भी बहुत सरल व रोचक ढंग से समझाना।
• मेरे मित्र की: बहुत तेज़ दौड़ना / सुंदर गाना।

(आप अपनी और अपने आसपास के लोगों की विशेष क्षमताएँ लिखिए।)

ख सबकी सहायता करने की क्षमता का उपयोग करके आप इन सहपाठियों की सहायता कैसे करेंगे?

• पढ़ना जानता है पर पाठ समझ नहीं आ रहा — उसे धैर्य से, आसान उदाहरणों के साथ समझाऊँगा।
• पढ़ना अच्छा लगता है पर देख नहीं सकता — उसे पाठ पढ़कर सुनाऊँगा; ब्रेल पुस्तकें/ऑडियो दिलाने में मदद करूँगा।
• बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है, भाषण देना है — उसे रुक-रुककर, धीरे बोलने का अभ्यास कराऊँगा।
• अटक-अटक कर बोलता है, भाषण देना है — प्रोत्साहन दूँगा, बार-बार अभ्यास कराऊँगा और आत्मविश्वास बढ़ाऊँगा।
• चलने में कठिनाई है, सबके साथ दौड़ना चाहता है — उसका सहारा बनूँगा और ऐसे खेल चुनूँगा जिनमें वह भी शामिल हो सके।
• रोज़ आता है पर सुनने में कठिनाई है — उसे आगे बिठाऊँगा, बातें लिखकर/इशारों से समझाऊँगा।

सहायता, सहानुभूति और सबके प्रति संवेदनशीलता — यही वह विशेष क्षमता है जो हम सबके पास होती है।

🧠आज की पहेली — दूध से बनने वाली वस्तुएँ
दी गई शब्द-पहेली में पहले अक्षर के आधार पर नाम पूरे कीजिए (दूध से बनी वस्तुएँ):
दूध से बनी वस्तुओं के चित्र
दूध से बनने वाली वस्तुएँ
शब्द-पहेली ग्रिड
शब्द-पहेली (दिए गए पहले अक्षर)

उत्तर:

खोखोया (मावा)
ददही
ममक्खन (मलाई)
पपनीर
छाछाछ
ललस्सी
मिमिठाई (मिल्कशेक)
घीघी
शश्रीखंड
आआइसक्रीम
🔎खोजबीन के लिए
सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें व पढ़ें।

महाकवि सूरदास की कुछ प्रमुख रचनाएँ —

• सूरसागर (उनकी सबसे प्रसिद्ध व विशाल रचना, कृष्ण-लीला पर आधारित)
• सूरसारावली
• साहित्य लहरी

इन रचनाओं में से कुछ पद खोजकर पढ़िए और उनमें व्यक्त कृष्ण-भक्ति व वात्सल्य को समझिए।

गाय चराते बाल-कृष्ण
गायों के साथ बाल-कृष्ण — “भोर भयो गैयन के पाछे...”
✦ संपूर्ण प्रश्न-उत्तर · अध्याय 9 — मैया मैं नहिं माखन खायो ✦
तैयार किया गया · @EduGrown

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