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NCERT Solution

Chapter 9 : कोऽड्कः? कोऽड्कः? कोऽड्कः? (Ko'ḍkaḥ? Ko'ḍkaḥ? Ko'ḍkaḥ?) (NCERT Solution) class 8th sanskrit

Class 8 · Sanskrit (दीपकम्) · Chapter 9 : कोऽड्कः? कोऽड्कः? कोऽड्कः? (Ko'ḍkaḥ? Ko'ḍkaḥ? Ko'ḍkaḥ?) · All Board · All Medium · 3 views

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कक्षा ८ · संस्कृतम् · दीपकम् · नवमः पाठः

कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

कोऽरुक्?कोऽरुक्?कोऽरुक्?

भगवान् धन्वन्तरिः शुकरूपं धृत्वा सर्वश्रेष्ठं वैद्यं अन्विष्यन् भारतवर्षे भ्रमति। अन्ततः आचार्यः वाग्भटः एव उत्तमं उत्तरं ददाति — हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्। इस पाठ के सभी इनटेक्स्ट व अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत व सटीक उत्तर नीचे दिए गए हैं।

पात्राणि: धन्वन्तरिः · वाग्भटः · शिष्याः मुख्यभावः: हितभुक्-मितभुक्-ऋतुभुक् स्रोतः: चरकसंहिता / भगवद्गीता १७
प्रारम्भिक संवाद - उष्ण भोजन विषयक
पाठ का प्रारम्भिक संवाद-चित्रम् (पाठ्यपुस्तक से) — उष्ण भोजन व आयुर्वेद-नियमों पर परिवार-संवाद
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कथा-प्रवाह-चित्रम् (Story Flow)

धन्वन्तरिः शुकरूपेण भारतवर्षे कथं भ्रमति, इति सचित्रं दर्शितम्
धन्वन्तरिः शुकरूपेण भारतवर्षे भ्रमणम् प्रख्यात- वैद्याः "कोऽरुक्?" — कोऽपि न शृणोति वाग्भटस्य कुटीरम् वाग्भटः शुकं दृष्ट्वा फलानि ददाति हितभुक् मितभुक् ऋतुभुक् त्रीणि सूत्ररूप उत्तराणि स्वरूप- दर्शनम् धन्वन्तरिः प्रसन्नः, अन्तर्हितः "तन्त्रं विरचयेः" वरम् ददाति श्रेष्ठ-वैद्य-अन्वेषण-यात्रा
Dhanvantari's search for the ideal physician — from failed attempts to Vagbhata's correct answer

महर्षिः भगवान् धन्वन्तरिः — जो आयुर्वेद के अधिष्ठाता देव माने जाते हैं — यह जानने हेतु कि भारतवर्ष के वैद्य विभिन्न व्याधियों का शमन कैसे करते हैं, एक मनोहर शुक (तोते) का रूप धारण कर प्रतिग्राम भ्रमण करने लगे। वे अनेक प्रख्यात वैद्यों के घर के पास बैठकर बार-बार "कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?" (कौन नीरोग है?) यह प्रश्न पूछते रहे, परन्तु किसी ने भी इस पक्षी-वाणी पर ध्यान नहीं दिया। अन्त में वे आचार्य वाग्भट की कुटिया के प्रांगण में पहुँचे। वाग्भट ने मधुर वाणी सुनकर तुरन्त उत्तर दिया — "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" अर्थात् जो हितकर, सीमित मात्रा में, तथा ऋतु के अनुकूल भोजन करता है, वही सदा स्वस्थ रहता है। सन्तुष्ट होकर धन्वन्तरि ने अपना असली स्वरूप प्रकट किया और वाग्भट को आयुर्वेद पर ग्रन्थ-रचना का आशीर्वाद दिया।

अधोलिखितान् प्रश्नान् एकपदेन उत्तरत

Answer the following questions in one word
प्रश्न (क)

शुकरूपं कः धृतवान् ?

उत्तरम् : भगवान् धन्वन्तरिः (शुकरूपं धृतवान्)।
व्याख्या : पाठ के आरम्भ में स्पष्ट कहा गया है — "भगवान् धन्वन्तरिः मनोहरं शुकरूपं धृत्वा प्रतिग्रामम् अभ्रमत्।" अर्थात् आयुर्वेद के अधिष्ठाता देव धन्वन्तरि ने ही सुन्दर तोते का रूप धारण किया था।
प्रश्न (ख)

धन्वन्तरिः (शुकः) कुत्र उपविश्य ध्वनिम् अकरोत् ?

उत्तरम् : सः बहूनां प्रख्यातवैद्यानां भवनपार्श्वस्थे वृक्षे उपविश्य ध्वनिम् अकरोत्।
व्याख्या : भ्रमण करते समय शुकरूपी धन्वन्तरि अनेक प्रसिद्ध वैद्यों के घर के पास वाले वृक्ष पर बैठकर "कोऽरुक्" शब्द बोलते थे, किन्तु किसी वैद्य ने ध्यान नहीं दिया।
प्रश्न (ग)

अन्ते शुकः कस्य आश्रमस्य (कुटीरस्य) समीपं गतवान् ?

उत्तरम् : अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्।
व्याख्या : अन्य वैद्यों से निराश होकर धन्वन्तरि अन्ततः प्रसिद्ध वैद्य वाग्भट की कुटिया के पास पहुँचे, जहाँ उनके प्रश्न का समुचित उत्तर मिला।
प्रश्न (घ)

ऋतवः कति सन्ति ?

उत्तरम् : ऋतवः षट् (६) सन्ति।
व्याख्या : पाठ में वर्णित है — "ग्रीष्मः, वर्षा, शरद्, शिशिरः, हेमन्तः, वसन्तः चेति षट् ऋतवः भवन्ति।" अर्थात् वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमन्त तथा शिशिर — ये छह ऋतुएँ होती हैं।
प्रश्न (ङ)

वाग्भटः शुकस्य रहस्यं केभ्यः उक्तवान् ?

उत्तरम् : वाग्भटः शुकस्य रहस्यं स्वशिष्येभ्यः (छात्रेभ्यः) उक्तवान्।
व्याख्या : जब आश्चर्यचकित शिष्यों ने आचार्य वाग्भट से शुक के "कोऽरुक्" कहने का अर्थ पूछा, तब वाग्भट ने अपने शिष्यों को यह रहस्य बताया कि वह शुक स्वयं भगवान् धन्वन्तरि थे।
षट् ऋतवः वसन्तः Spring ग्रीष्मः Summer वर्षा Monsoon शरद् Autumn हेमन्तः Pre-winter शिशिरः Winter ऋतुभुक् seasonal diet
The six seasons (ऋतवः) referred to in the ऋतुभुक् principle

पट्टिकातः उचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

Fill in the blanks by choosing the correct word from the box
शब्द-पेटिका : चरकस्य, कुटीरसमीपं, भारतवर्षे, आयुर्वेदज्ञानेन, अतिमात्रं
(क)

भारतवर्षे जनाः कथं निरामयाः भवन्ति ?

पूर्ण वाक्य — भारतवर्षे जनाः कथं निरामयाः भवन्ति ? (भारतवर्ष में लोग कैसे नीरोग रहते हैं?)
(ख)

अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्।

पूर्ण वाक्य — अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्। (अन्त में वह वैद्य वाग्भट की कुटिया के पास गया।)
(ग)

तव उत्कृष्टेन आयुर्वेदज्ञानेन अहम् अतीव सन्तुष्टः अस्मि।

पूर्ण वाक्य — तव उत्कृष्टेन आयुर्वेदज्ञानेन अहम् अतीव सन्तुष्टः अस्मि। (तुम्हारे उत्कृष्ट आयुर्वेद-ज्ञान से मैं अत्यन्त सन्तुष्ट हूँ।)
(घ)

महर्षेः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः।

पूर्ण वाक्य — महर्षेः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः। (महर्षि चरक का नाम आपने सुना होगा।)
(ङ)

लघुद्रव्याणि अतिमात्रं सेवनेन हानिकराणि जायन्ते।

पूर्ण वाक्य — लघुद्रव्याणि अतिमात्रं सेवनेन हानिकराणि जायन्ते। (हल्के पदार्थ भी अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से हानिकारक हो जाते हैं।)

अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत

Answer the following questions in complete sentences
प्रश्न (क)

मधुरां वाणीं श्रुत्वा चिकित्सानिरतः वाग्भटः किम् अकरोत् ?

मधुरां वाणीं श्रुत्वा चिकित्सानिरतः वाग्भटः प्राङ्गणम् आगत्य सर्वासु दिक्षु अपश्यत्।
व्याख्या : चिकित्सा में व्यस्त वाग्भट ने जब मीठी "कोऽरुक्" ध्वनि सुनी, तो वे तुरन्त आँगन में आकर चारों दिशाओं में देखने लगे कि यह ध्वनि कहाँ से आ रही है।
प्रश्न (ख)

वाग्भटः झटिति किम् अकरोत् ?

वाग्भटः झटिति तस्मै विहगाय (शुकाय) मधुराणि फलानि समर्पितवान्।
व्याख्या : उस मनोहर शुक को कोई साधारण पक्षी न समझकर देवविशेष मानते हुए वाग्भट ने तुरन्त उसे मीठे फल भेंट किए। परन्तु शुक ने वे फल ग्रहण न करके पुनः "कोऽरुक्" प्रश्न दोहराया।
प्रश्न (ग)

छात्राः पुनः जिज्ञासया आचार्यं किम् अपृच्छन् ?

छात्राः पुनः जिज्ञासया आचार्यम् अपृच्छन् — "आचार्य ! 'हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्' इति एतेषां कः आशयः ?"
व्याख्या : शुक-रहस्य जानने के बाद भी शिष्यों की जिज्ञासा शान्त नहीं हुई, अतः उन्होंने आचार्य वाग्भट से इन तीन शब्दों के गूढ़ार्थ के विषय में पुनः प्रश्न किया, जिसके उत्तर में वाग्भट ने महर्षि चरक के तीन श्लोक सुनाए।
प्रश्न (घ)

भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते संक्षेपेण किं प्रदत्तवान् ?

भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते संक्षेपेण स्वास्थ्यरक्षणाय सूत्ररूपं सन्देशं प्रदत्तवान् — "हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्" इति।
व्याख्या : धन्वन्तरि ने स्वास्थ्य-रक्षा हेतु अत्यन्त संक्षेप में तीन सूत्र दिए, जो सम्पूर्ण आहार-विज्ञान का सार माने जाते हैं।
प्रश्न (ङ)

ऋषयः नित्यं कां प्रार्थनां कुर्वन्ति ?

ऋषयः नित्यं इमां प्रार्थनां कुर्वन्ति — "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥"
व्याख्या : अर्थात् सब लोग सुखी हों, सब नीरोग रहें, सब का कल्याण हो और कोई भी दुःख का भागी न बने — यह विश्व-कल्याणकारी प्रार्थना ऋषियों द्वारा प्रतिदिन की जाती है।
वाग्भट एवं शुक (धन्वन्तरि)
वाग्भट की कुटिया के प्रांगण में शुकरूपी धन्वन्तरि — "कोऽरुक्?" कहते हुए (पाठ्यपुस्तक से)

व्याकरण अभ्यासः — विशेष्य-विशेषण

Grammar · Adjective–Noun Agreement

पाठ का व्याकरण-नियम / Grammar Rule

विशेषणम् — जो पद किसी अन्य पद की विशेषता (गुण) बताता है, उसे विशेषण कहते हैं। यथा — 'उत्तमाः', 'मनोहरम्'।

विशेष्यम् — जिस पद की विशेषता बताई जाए, वह विशेष्य पद है। यथा — 'उत्तमाः वैद्याः' में 'वैद्याः' विशेष्य-पद है।

🔹 विशेष्य का जो लिङ्ग होता है, वही लिङ्ग विशेषण का भी होता है — यथा लौकिकः खगः (पुं॰)।
🔹 विशेष्य का जो वचन होता है, वही वचन विशेषण का भी होता है — यथा उत्तमाः वैद्याः (बहुवचन)।
🔹 विशेष्य की जो विभक्ति होती है, वही विभक्ति विशेषण की भी होती है — यथा मधुरां वाणीम् (द्वितीया)।

"यल्लिङ्गं यद्वचनं या च विभक्तिर्विशेष्यस्य । तल्लिङ्गं तद्वचनं सा च विभक्तिर्विशेषणस्यापि ॥"

विशेष्य-विशेषण सामञ्जस्यम् (Agreement) उत्तमः विशेषणम् (adjective) वैद्यः विशेष्यम् (noun) agrees with लिङ्गम् पुंलिङ्गम् वचनम् एकवचनम् विभक्तिः प्रथमा उदाहरणम् : उत्तमः वैद्यः, उत्तमा बालिका, उत्तमं गृहम्
Gender, number, and case of the विशेषण always match the विशेष्य it qualifies

पाठात् यथोचितानि विशेषणपदानि विशेष्यपदानि वा चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

Complete the table by picking the correct विशेषण / विशेष्य from the lesson
विशेषणम्विशेष्यम्
विभिन्नानाम्व्याधीनाम्
मनोहरम्शुकरूपम्
विशालेप्राङ्गणे
चिकित्सानिरतःवाग्भटः
मधुराणिफलानि
उत्तमस्यवैद्यस्य
महर्षेःचरकस्य
विशेषणम्विशेष्यम्
प्रख्यातानाम्वैद्याः
भवनपार्श्वस्थेवृक्षे
मधुराम्वाणीम्
लौकिकःखगः
समुचितम्उत्तरम्
प्रिय-शिष्याः
सात्त्विकम्भोजनम्
नारंगी अक्षरों में दिखाए गए पद ही रिक्त-स्थान की सही पूर्ति हैं — प्रत्येक विशेषण अपने विशेष्य के लिङ्ग, वचन तथा विभक्ति के अनुसार ही चुना गया है (नियम देखें ऊपर)।

पाठं पठित्वा अधोलिखितपट्टिकातः पदानि चित्वा उचितसञ्चिकायां पूरयत

Classify the given words into विशेषणपदानि and विशेष्यपदानि
शब्द-पेटिका : लौकिकः, व्याधीनाम्, देवः, वृक्षे, त्रीणि, उत्तमस्य, वाणीम्, विस्मितः, मधुरया, प्रश्नान्, पूज्यः, खगः, विशाले, शुकम्, वाग्भटः

विशेषणपदानि

  • लौकिकः
  • त्रीणि
  • उत्तमस्य
  • विस्मितः
  • मधुरया
  • पूज्यः
  • विशाले

विशेष्यपदानि

  • व्याधीनाम्
  • देवः
  • वृक्षे
  • वाणीम्
  • प्रश्नान्
  • खगः
  • शुकम्
  • वाग्भटः
जैसे — लौकिकः खगः ("यह लौकिक पक्षी नहीं है" — लौकिकः विशेषण, खगः विशेष्य), पूज्यः देवः (पूज्यः विशेषण, देवः विशेष्य), त्रीणि उत्तराणि (त्रीणि विशेषण अंकवाचक), विशाले प्राङ्गणे (विशाले विशेषण), मधुरया गिरा (मधुरया विशेषण) — इसी प्रकार शेष पद भी पाठ के वाक्यों के आधार पर वर्गीकृत किए गए हैं।

अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा तेन सम्बद्धं श्लोकं पाठात् चित्वा लिखत

Read each sentence and write the matching श्लोक from the lesson
वाक्यम् (क)

अस्माभिः नित्यं व्यायामः, स्नानं, दन्तधावनं, बुभुक्षायाञ्च भोजनं कर्तव्यम्।

सम्बद्ध श्लोकः (४) :
व्यायामः प्रातरुत्थाय, नित्यं दन्तविशोधनम्।
स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥
व्याख्या : यह श्लोक दैनिक दिनचर्या का वर्णन करता है — प्रातःकाल उठकर व्यायाम, दाँतों की सफाई, स्वच्छ जल से स्नान तथा भूख लगने पर ही भोजन — ये चारों नियम वाक्य में उल्लिखित बिन्दुओं से पूर्णतः मेल खाते हैं।
वाक्यम् (ख)

अस्माभिः हितकरः आहारः सेवनीयः येन विकाराणां शमनं स्वास्थ्यस्य च रक्षणं भवेत्।

सम्बद्ध श्लोकः (१) :
तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत, स्वास्थ्यं येनानुवर्तते।
अजातानां विकाराणामनुत्पत्तिकरं च यत्॥
व्याख्या : यह श्लोक "हितभुक्" के भाव को स्पष्ट करता है — ऐसा आहार सेवन करना चाहिए जिससे स्वास्थ्य की रक्षा हो और अनुत्पन्न रोगों की उत्पत्ति भी न हो।
वाक्यम् (ग)

ऋतोः अनुसारं भोजनेन बलस्य वर्णस्य च अभिवृद्धिः भवति।

सम्बद्ध श्लोकः (३) :
तस्याशिताद्याहारात् बलं वर्णश्च वर्धते।
तस्यर्तुसात्म्यं विदितं चेष्टाहारव्यपाश्रयम्॥
व्याख्या : यह श्लोक "ऋतुभुक्" सिद्धान्त से सम्बद्ध है — ऋतु के अनुकूल भोजन करने से ही बल और वर्ण (शारीरिक कान्ति) की वृद्धि होती है, जैसा वाक्य में कहा गया है।
आचार्य वाग्भट शिष्यों को उपदेश देते हुए
आचार्य वाग्भट अपने शिष्यों को हितभुक्-मितभुक्-ऋतुभुक् का रहस्य समझाते हुए (पाठ्यपुस्तक से)
भगवान् धन्वन्तरिः
भगवान् धन्वन्तरिः — आयुर्वेद के अधिष्ठाता देव, जिन्होंने शुकरूप धारण किया था (पाठ्यपुस्तक से)

Prepared for Class 8 Sanskrit (Dipakam) · Chapter 9 — कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्? · All illustrations © NCERT, used for educational reference · @EDUGROWN

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