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NCERT Solution

Chapter-3 संवादहीन (Samvadheen) NCERT Solution | Class 9th Hindi (Ganga) NCERT Solution

Class 9 · Hindi (Ganga) · Chapter-3 संवादहीन (Samvadheen) · All Board · ENGLISH · 10 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD
गद्य खंड · कक्षा पाठ्यपुस्तक

संवादहीन

— शेखर जोशी
📘 संपूर्ण प्रश्न-उत्तर ✦ विस्तृत व्याख्या 🦜 ताई & मिट्ठू
@edugrown मिट्ठू ताई

ताई और मिट्ठू — अकेलेपन में एक-दूसरे का सहारा बने दो प्राणी

मेरे उत्तर मेरे तर्क

बहुविकल्पीय प्रश्न — सटीक उत्तर एवं कारण
1 कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
  • (क) परोपकार और त्याग
  • (ख) ममता और स्नेह ✔
  • (ग) करुणा और क्रोध
  • (घ) जिज्ञासा और सहायता
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख)

ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी थी। वे उसके लिए नियमपूर्वक दाल-भात बनातीं, रोटी बचाकर रखतीं और एक पल का वियोग भी सहन न कर पातीं। यह गहरा ममता और स्नेह का बंधन ही उनके संबंध का मूल है।

2 जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना/मूल्य का संकेत देता है?
  • (क) अनुशासन और परंपरा
  • (ख) उदासीनता और असावधानी
  • (ग) आत्मगौरव और विद्रोह
  • (घ) करुणा और नैतिकता ✔
📝 उत्तर एवं तर्क — (घ)

जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती और स्वयं को दोषी अनुभव करते। मिट्ठू को खुली हवा देना उनकी करुणा और नैतिक चेतना का प्रमाण है — वे किसी की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे।

3 मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
  • (क) भोजन की खोज
  • (ख) प्रेम की आकांक्षा
  • (ग) स्वतंत्रता की चाह ✔
  • (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
📝 उत्तर एवं तर्क — (ग)

रोशनदान से बाहर की दुनिया देखते ही मिट्ठू उड़ गया और एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने लगा। पिंजरे का आदी होने के बावजूद खुला आकाश पाते ही उसने उड़ान भर ली — यह प्रत्येक प्राणी की सहज स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है।

4 ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
  • (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
  • (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव ✔
  • (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
  • (घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख)

ताई के पास घर-संपत्ति की कमी नहीं थी; उनका असली दुख था बहू-बेटों का शहर चले जाना और बातचीत करने वाले किसी अपने का न होना। सूने घर की ‘भाँय-भाँय’ उन्हें काटने को दौड़ती थी। इसलिए उनके दुख का मूल परिवार से दूरी और संवाद का अभाव था।

5 कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
  • (क) मजबूरी
  • (ख) कर्मपरायणता
  • (ग) अकेलापन ✔
  • (घ) संवादधर्मिता
📝 उत्तर एवं तर्क — (ग)

आधुनिक जीवन में पलायन के कारण बुजुर्ग अपने ही घरों में अकेले रह जाते हैं। ताई का जीवन इसी सच्चाई को दर्शाता है — यह कहानी समकालीन समाज में बढ़ते अकेलेपन की विसंगति को उजागर करती है।

💭

मेरी समझ मेरे विचार

विस्तृत वर्णनात्मक उत्तर
1 “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” — ताई किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह क्यों कह रही हैं?
📝 उत्तर

यहाँ ‘नैया’ ताई के शेष जीवन एवं वृद्धावस्था का प्रतीक है। बुढ़ापे का अकेलापन, सूना घर और कोई सहारा न होने के कारण ताई चिंतित रहती हैं कि उनका बाकी जीवन (नैया) कैसे कटेगा। यह वाक्य उनके मन की गहरी असुरक्षा और एकाकीपन को व्यक्त करता है।

2 “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” — किस घटना की ओर संकेत है?
📝 उत्तर

यह वाक्य ताई के संपन्न परिवार के पतन और बिखराव की ओर संकेत करता है। बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गईं और कारोबार संभालने वाला कोई न रहा। खेती-बाड़ी और कारोबार न रहने से नौकर-चाकर भी चले गए, और धीरे-धीरे सारी संपत्ति दूसरों (परायों) के हाथों में चली गई।

3 “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” — क्यों?
📝 उत्तर

परिवार बिखर जाने के बाद ताई के पास अपना प्रेम लुटाने के लिए कोई न बचा था। ऐसे में गनपत द्वारा लाया गया प्यारा-सा तोता मिट्ठू ही उनके स्नेह का एकमात्र केंद्र बन गया। मिट्ठू उनके लिए संतान-तुल्य और संवाद का साथी था, इसलिए उनकी सारी दबी हुई ममता उसी पर बरस पड़ी।

4 हरी मिर्चें एवं अमरूद वाले वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए किन परिवर्तनों का पता चलता है?
📝 उत्तर

पहले जो ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में भी आलस करती थीं, वही अब मिट्ठू के लिए अत्यंत सजग हो गईं। इससे पता चलता है कि —

  • उनके जीवन में फिर से उद्देश्य और सक्रियता लौट आई।
  • वे मिट्ठू की पसंद का ध्यान रखने लगीं — किसके खेत में मिर्चें तैयार हैं, किस पेड़ में अमरूद बचे हैं।
  • यह उनके भीतर जागे गहरे वात्सल्य और देखभाल के भाव को दर्शाता है।
  • मिट्ठू उनके सूने जीवन का केंद्र बन गया, जिससे उनकी उदासीनता उत्साह में बदल गई।
5 “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” — उनका व्यक्तित्व कैसा था? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
📝 उत्तर

जगन मास्टर आदर्शवादी, संवेदनशील और स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। उनके अपने कुछ नियम-सिद्धांत थे और वे किसी की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे। उदाहरण —

  • पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती और वे स्वयं को दोषी अनुभव करते।
  • उन्होंने मिट्ठू को खुली हवा का सुख देने के लिए पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।
  • ‘गीता-रहस्य’ पढ़ना उनके बौद्धिक एवं आध्यात्मिक स्वभाव को दर्शाता है।

परंतु उनका यही आदर्शवाद व्यावहारिक जीवन में संकट ले आया — मिट्ठू उड़ गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आदर्श और यथार्थ में टकराव होता है।

6 शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक है — ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित।
📝 उत्तर

शीर्षक ‘संवादहीन’ सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक है। परिवार के बिखर जाने के बाद मिट्ठू ही उनका एकमात्र ‘संवाद का माध्यम’ था। मिट्ठू के उड़ जाने पर एवजी (नकली) तोता उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं करता और चुप रहता है। इस प्रकार ताई का अंतिम सहारा भी छिन जाता है और वे पूरी तरह संवादहीन हो जाती हैं।

यह शीर्षक प्रतीकात्मक रूप से उस आधुनिक समाज की ओर भी संकेत करता है जहाँ रिश्ते होते हुए भी लोग आपस में संवादहीन हो गए हैं।

7 ताई के बड़े-से घर को ‘सूना खंडहर’ क्यों कहा गया होगा?
📝 उत्तर

कभी वह घर पूत-परिवार, बहू-बेटियों, नौकर-चाकरों और गाय-ढोर से भरा-पूरा एवं रौनक से जगमगाता था। परंतु परिवार के शहर चले जाने और सब कुछ परायों के हाथ में चले जाने के बाद घर पूरी तरह वीरान हो गया। अब वहाँ केवल ताई और मिट्ठू बचे थे। निवासियों एवं चहल-पहल के अभाव में वह विशाल घर उजड़ा-वीरान खंडहर जैसा लगने लगा — इसलिए उसे ‘सूना खंडहर’ कहा गया।

मेरे प्रश्न

उत्तर के लिए उपयुक्त प्रश्न पहचानिए
1 उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
📝 सही प्रश्न
✔ प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
✘ प्रश्न ख: ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था? (इसका उत्तर ‘गनपत ने’ होगा)
2 उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
📝 सही प्रश्न
✘ प्रश्न क: ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
✔ प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
3 उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
📝 सही प्रश्न
✔ प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
✘ प्रश्न ख: गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे? (वे खुश नहीं, चिंतित थे)
4 उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
📝 सही प्रश्न
✘ प्रश्न क: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
✔ प्रश्न ख: शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
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मेरे अनुभव मेरे विचार

अनुभव आधारित उत्तर
1 ताई की तरह जब आप घर/परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
📝 उत्तर (नमूना)

जब मैं किसी यात्रा या शिविर में परिवार से दूर होता हूँ, तो बार-बार अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहन की याद आती है। मन में चिंता रहती है कि घर में सब ठीक तो हैं। कभी अपने पालतू कुत्ते की भी याद सताती है कि उसने खाना खाया होगा या नहीं। यह चिंता मन को बेचैन कर देती है और बार-बार फोन करके हालचाल जानने का मन करता है — ठीक वैसे ही जैसे ताई बार-बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर मिट्ठू की चिंता करती थीं।

2 क्या पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
📝 उत्तर

हाँ, पशु-पक्षियों में भी गहरी संवेदनाएँ होती हैं। वे प्रेम, भय, खुशी और दुख महसूस करते हैं। मेरे अनुभव में, मेरे घर का कुत्ता जब मुझे स्कूल से लौटते देखता है तो पूँछ हिलाकर, उछलकर अपनी खुशी जताता है, और जब मैं घर से बाहर जाता हूँ तो उदास होकर दरवाजे पर बैठ जाता है। इसी प्रकार ‘संवादहीन’ का मिट्ठू भी ताई के प्रश्नों का उत्तर देता और उसकी राम-कहानी का धैर्यवान श्रोता बनता था। इससे सिद्ध होता है कि पशु-पक्षी भी संवेदनशील प्राणी हैं।

3 गनपत का सुझाव — दूसरा तोता लाकर ताई को भ्रम में रखना — उचित था या नहीं? तर्क सहित।
📝 उत्तर

इस प्रश्न के दोनों पक्ष हैं —

उचित होने के तर्क: गाँववाले ताई से बहुत प्रेम करते थे और जानते थे कि असली मिट्ठू को न पाने पर उन्हें गहरा सदमा लगेगा। उनकी भावनाओं को आघात से बचाने के लिए ही यह सहानुभूतिपूर्ण उपाय सोचा गया।

अनुचित होने के तर्क: किसी को धोखे या भ्रम में रखना दीर्घकाल में सही नहीं है। सच्चाई अंततः सामने आ ही जाती है — जैसे एवजी तोते के चुप रहने पर ताई को संदेह हो ही गया। सहारा और प्रेम देकर सच्चाई बताना अधिक उचित होता।

मेरा मत: भावनाओं की रक्षा का उद्देश्य अच्छा था, पर स्थायी समाधान सच्चाई के साथ करुणा से बताना ही होता।

4 क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
📝 उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार मैंने सोचा था कि परीक्षा में गणित का प्रश्नपत्र बहुत कठिन आएगा, इसलिए मैं घबराया हुआ था। पर जब पेपर मिला तो वह मेरी अपेक्षा से आसान निकला और मैंने अच्छे अंक प्राप्त किए। ठीक उसी तरह जैसे ताई ने सोचा था कि मिट्ठू उन्हें देखते ही ‘राम राम सीताराम’ की रट लगा देगा, पर वहाँ बैठा एवजी तोता चुप ही रहा। जीवन में अक्सर हमारी अपेक्षाएँ और यथार्थ अलग होते हैं — यही जीवन की सच्चाई है।

5 क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? आस-पास से उदाहरण दीजिए।
📝 उत्तर

हाँ, लंबे समय तक बंधन में रहने पर प्राणी उसके आदी हो जाते हैं। मिट्ठू पिंजरे में रहने का इतना अभ्यस्त हो गया था कि दरवाजा खुलने पर भी पहले बाहर आने की इच्छा नहीं दिखाई। हमारे आस-पास भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं — चिड़ियाघर या घर में पाले गए पक्षी अक्सर खुला छोड़ने पर भी दूर नहीं उड़ते; सर्कस के जानवर बँधी हुई दिनचर्या के आदी हो जाते हैं।

परंतु यह आदत उनकी स्वाभाविक स्वतंत्रता को दबा देती है। मौका मिलते ही उनकी मूल प्रवृत्ति (आजादी की चाह) जाग उठती है — जैसे मिट्ठू ने अंततः उड़ान भर ली।

@edugrown “मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!”

आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए — आदर्श और यथार्थ का द्वंद्व

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कहानी का सौंदर्य

शिल्प-विशेषताएँ एवं अंत-विश्लेषण
हर विशेष बिंदु के लिए कहानी से एक और उदाहरण खोजकर लिखिए।
📝 उत्तर — खोजे गए नए उदाहरण
विशेष बिंदुनया उदाहरण (कहानी से)
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)“सुबह पौ फटने लगती, पेड़ों में चिड़ियाँ चहचहातीं।”
संवादात्मकता“मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” — “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!”
पुनरुक्ति“मर जा! मर जा! मर जा!” / “हर हर गंगे! हर हर गंगे!!”
अतिशयोक्ति“कंजूस के धन की तरह मिट्ठू को छिपाकर रखतीं।”
लोकधर्मी भाषा“सूने घर की भाँय-भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी।”
प्रश्नोत्तर शैली“अब कैसे कटेगी?” — “कटेगी!”
‘संवादहीन’ कहानी का अंत किस श्रेणी में रखा जा सकता है? कारण सहित। आप नया अंत कैसे करना चाहेंगे?
📝 उत्तर

इस कहानी का अंत मुख्यतः दुखांत है और साथ ही इसे यथार्थवादी एवं व्यंग्यात्मक अंत की श्रेणी में भी रखा जा सकता है।

  • दुखांत: ताई का एकमात्र सहारा मिट्ठू उड़ जाता है और वे फिर से अकेली, संवादहीन रह जाती हैं।
  • यथार्थवादी: अंत जीवन की कठोर सच्चाई जैसा है — अपेक्षा और वास्तविकता में अंतर।
  • व्यंग्यात्मक: जो जगन मास्टर मिट्ठू को आजादी देना चाहते थे, उन्हीं की लापरवाही से ताई का साथी हमेशा के लिए खो जाता है; एवजी तोता ताई को धोखा नहीं दे पाता।
मेरा नया अंत (नमूना): कुछ दिनों बाद एक सुबह आकाश में हरे पंख चमके — असली मिट्ठू अपनी आज़ादी का स्वाद चखकर भी ताई के प्रेम को न भूल सका और लौट आया। उसने आँगन में बैठकर ‘हर हर गंगे, सीताराम’ की रट लगाई। ताई दौड़कर बाहर आईं, मिट्ठू उनके कंधे पर आ बैठा और दोनों की सूनी दुनिया फिर से प्रेम और संवाद से भर उठी।
🗣️

विषयों से संवाद

पात्र, कुंभ-स्नान एवं संस्कृति
1 रेखांकित पात्र (मास्टराइन / जगन मास्टर की घरवाली) का नाम कहानी में क्यों नहीं दिया गया होगा?
📝 उत्तर

लेखक ने जानबूझकर इस पात्र का नाम नहीं दिया, ताकि यह केवल एक व्यक्ति न रहकर समाज की उन अनेक स्त्रियों का प्रतीक बन जाए जिनकी अपनी अलग पहचान को नजरअंदाज कर दिया जाता है और जिन्हें ‘किसी की पत्नी’ के रूप में ही जाना जाता है।

यह तत्कालीन सामाजिक यथार्थ की ओर भी संकेत करता है, जहाँ स्त्रियों को प्रायः उनके नाम से नहीं, बल्कि पति या परिवार से जोड़कर पहचाना जाता था। इस प्रकार यह नामहीनता एक गहरे सामाजिक भाव को व्यक्त करती है।

2 कुंभ-स्नान — (क) आयोजन का कारण, पिछली बार एवं अगली बार कब-कहाँ?
📝 उत्तर (क)

आयोजन क्यों: कुंभ मेला हिंदू धर्म की एक धार्मिक तीर्थयात्रा है जो 12 वर्षों में चार बार आयोजित होती है। यह प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में बारी-बारी से, पवित्र नदियों के तट पर आयोजित होता है। पवित्र संगम/नदी में स्नान को पाप-नाशक एवं मोक्षदायक माना जाता है, इसलिए करोड़ों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।

पिछली बार: सबसे हाल का महाकुंभ मेला 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के त्रिवेणी संगम पर आयोजित हुआ था।

अगला आयोजन: अगला कुंभ मेला 2027 में नासिक, महाराष्ट्र में 17 जुलाई से 17 अगस्त तक होगा, और उसके बाद 2028 में उज्जैन में।

📝 उत्तर (ख) — ताई की यात्रा का वर्णन (नमूना)

ताई अपने गाँव से कुछ संगी-साथियों के साथ बस द्वारा पास के रेलवे स्टेशन पहुँचीं। वहाँ से रेलगाड़ी का टिकट लेकर वे प्रयागराज के लिए रवाना हुईं। रास्ते में सबने मिलकर घर से लाए पूड़ी-सब्जी और अचार खाया। प्रयागराज पहुँचकर वे एक धर्मशाला में ठहरीं। अगली सुबह संगम पर पवित्र स्नान किया, गंगा-पूजन किया और कुछ दान-पुण्य भी किया। यात्रा भर मिट्ठू की याद उन्हें सताती रही, फिर भी तीर्थ का पुण्य पाकर उनका मन संतुष्ट हुआ।

📝 उत्तर (ग) — अपने गाँव/नगर का मेला (नमूना, पाँच ज्ञानेंद्रियों के आधार पर)
  • देखना: रंग-बिरंगे झूले, सजी हुई दुकानें, उमड़ती भीड़ और चमकती रोशनी।
  • सुनना: लाउडस्पीकर पर बजते गीत, झूलों की चरमराहट, बच्चों की किलकारियाँ और विक्रेताओं की आवाजें।
  • सूँघना: जलेबी, समोसे और भुने चने की भीनी-भीनी खुशबू।
  • छूना: मिट्टी के खिलौने, चूड़ियाँ और गरम-गरम पकवान।
  • स्वाद: मीठी जलेबी, चटपटी चाट और कुल्फी का अनोखा आनंद।

पूरे वातावरण में श्रद्धा, उल्लास और उत्सव का भाव छाया रहता है।

✍️

सृजन

रचनात्मक लेखन
1 ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? छोड़ते समय क्या सोचा होगा? स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
📝 उत्तर

गाँव क्यों छोड़ा: शहरों में रोजगार, अच्छी शिक्षा, बेहतर चिकित्सा और सुविधाजनक जीवन की तलाश में ताई के बहू-बेटों ने गाँव छोड़ा होगा। गाँव में खेती-कारोबार में कमी और भविष्य की अनिश्चितता भी इसका कारण रही होगी।

छोड़ते समय की सोच: उनके मन में अपने पुश्तैनी घर और बुजुर्गों को छोड़ने का दुख रहा होगा, साथ ही नए जीवन की उम्मीद और चिंता का मिश्रित भाव भी। उन्होंने सोचा होगा कि शहर में बस जाने पर परिवार का भविष्य बेहतर होगा।

स्वयं को तैयार करना: उन्होंने यह सोचकर मन समझाया होगा कि समय और जीवन की आवश्यकताएँ बदल रही हैं, और प्रगति के लिए कठिन निर्णय लेने ही पड़ते हैं। इस प्रकार यह कहानी ‘पलायन’ की समकालीन समस्या को उजागर करती है।

2 कल्पना कीजिए असली मिट्ठू वापस आ गया। आगे की कहानी लिखिए। (“एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)
📝 उत्तर (नमूना कथा)

एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके… असली मिट्ठू अमराइयों में घूमते-घूमते अपने पुराने आँगन की ओर लौट आया। उसने पिंजरे में बैठे एवजी तोते को देखा और गर्दन टेढ़ी करके बोला, “तू कौन है? यह मेरी ताई है, मेरा घर है!” एवजी तोता घबराकर इधर-उधर ताकने लगा।

तभी ताई आँगन में आईं। जैसे ही मिट्ठू ने उन्हें देखा, वह ‘हर हर गंगे! राम राम सीताराम!’ की रट लगाकर पंख फड़फड़ाने लगा। ताई की आँखें भर आईं — “मेरा मिट्ठू! तू लौट आया रे!” मिट्ठू उड़कर उनके कंधे पर आ बैठा।

उस दिन के बाद ताई ने मिट्ठू को कभी पिंजरे में बंद नहीं किया। मिट्ठू दिनभर पेड़ों पर उड़ता-फिरता और शाम को ताई के पास लौट आता। आजादी और अपनापन — दोनों साथ-साथ चलने लगे, और बड़े घर का सूनापन फिर से प्रेम और संवाद से गूँज उठा।

3 किसी बड़े/बुजुर्ग से बात करके उनके अनुभव लिखिए — “आप मेरी आयु के थे तब समय कैसे बिताते थे?”
📝 उत्तर (गतिविधि — नमूना)

यह एक साक्षात्कार-गतिविधि है। अपने दादा/दादी या किसी बुजुर्ग से बातचीत करके उनके बचपन के अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखें। नमूना —

“मेरे दादाजी ने बताया कि उनके समय में बच्चे खेतों में खेलते, नदी में नहाते, गुल्ली-डंडा और कंचे खेलते थे। तब टी.वी. या मोबाइल नहीं थे; शाम को सब बुजुर्ग के पास बैठकर कहानियाँ सुनते और लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते थे। त्योहारों पर पूरा गाँव मिलकर उत्सव मनाता था। उन्हें वे दिन बहुत आत्मीयता और अपनेपन से भरे लगते हैं।”
4 जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू की खोज के लिए विज्ञापन बनाइए।
📰 नमूना विज्ञापन (खोया-पाया)

⚠ तोता गुम है ⚠

हमारा प्यारा हरे रंग का पहाड़ी तोता ‘मिट्ठू’ दिनांक ___ को घर से उड़ गया है। उसकी पहचान —

• हरे पंख, लाल चोंच, गर्दन टेढ़ी करने की आदत।
• ‘राम राम सीताराम’, ‘हर हर गंगे’ बोलता है।
• अत्यंत बातूनी एवं समझदार है।

जो भी सज्जन इसे ढूँढ़कर सुरक्षित लौटाएगा, उसे उचित इनाम दिया जाएगा। यह एक वृद्धा की भावनाओं से जुड़ा है — कृपया मानवता दिखाएँ।

संपर्क: जगन मास्टर, गाँव — ____ (पता/फोन)।

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व्याकरण की बात

मुहावरे, ध्वन्यात्मकता एवं शब्द-युग्म
जीव-जंतु वाले मुहावरों की सूची बनाइए।
📝 उत्तर
मुहावराअर्थ
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननाअपनी प्रशंसा स्वयं करना
आसमान के तारे तोड़नाअसंभव कार्य करना
बिल्ली के भाग्य से छींका टूटनाबिना मेहनत अचानक लाभ होना
साँप-छछूँदर की गतिदुविधा में फँस जाना
घोड़े बेचकर सोनानिश्चिंत होकर सोना
गधे को बाप बनानास्वार्थवश किसी की चापलूसी करना
कौए की आँख होनाबहुत तेज दृष्टि होना
ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम मिलना
शेर बननानिडर/उग्र हो जाना
ध्वन्यात्मकता (अनुकरणात्मक) शब्द लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए।
📝 उत्तर
ध्वनि-शब्दनया वाक्य
फड़फड़ाहटचिड़िया पंखों की फड़फड़ाहट के साथ उड़ गई।
खड़खड़ाहटहवा से खिड़की में खड़खड़ाहट होने लगी।
सरसराहटपत्तों की सरसराहट से जंगल गूँज उठा।
गड़गड़ाहटबादलों की गड़गड़ाहट सुनकर बच्चे डर गए।
टपटपाहटछत से पानी की टपटपाहट रातभर सुनाई देती रही।
झनझनाहटचूड़ियों की झनझनाहट से कमरा भर गया।
शब्द-युग्म — अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
📝 उत्तर
शब्द-युग्मअर्थवाक्य
वक्त-बेवक्तसमय-असमय, किसी भी समयवह वक्त-बेवक्त बिना बताए घर आ जाता है।
नियम-सिद्धांतउसूल और आदर्शहर सफल व्यक्ति के अपने नियम-सिद्धांत होते हैं।
शादी-ब्याहविवाह संबंधी आयोजनगाँव में शादी-ब्याह के अवसर पर सब मिलकर उत्सव मनाते हैं।
तीज-त्योहारपर्व और उत्सवतीज-त्योहार पर पूरा परिवार एकत्र हो जाता है।

शब्द-युग्म के प्रकार: पुनरुक्त (बार-बार), सजातीय (उठना-बैठना), समानार्थक (दिन-प्रतिदिन), विपरीतार्थक (दिन-रात)।

🔎

खोजबीन शब्दों की

अनुच्छेद से शब्द पहचानिए
दिए गए अनुच्छेद में से खोजकर लिखिए:
“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”
📝 उत्तर
पूछा गयाशब्द/वाक्यांश
‘तंग’ का विपरीतार्थकढीली
एक मुहावरा (वाक्यांश)पसीना-पसीना होना
एक क्रियापुकारते (सँभालते / तौलना)
एक संज्ञाधोती (बाग, पेड़, डाल, पंख)
एक सर्वनामवह
एक विशेषणढीली
एक कारक (चिह्न)‘से’ (एक पेड़ से दूसरे पेड़) / ‘को’
एक कर्तावह / मिट्ठू
📐

अर्थ के आधार पर वाक्य

वाक्य-भेद के उदाहरण
कहानी में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए:
📝 उत्तर — आठ वाक्य-भेद
वाक्य का भेदकहानी से उदाहरण
1. विधानवाचकजगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।
2. निषेधवाचकमिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की।
3. प्रश्नवाचकमिट्ठू! अब कैसे कटेगी?
4. विस्मयादिबोधकये गए! वो गए!!
5. आज्ञावाचकराम-राम कहो, सीताराम कहो।
6. इच्छावाचकजीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!
7. संदेहवाचकताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।
8. संकेतवाचकजब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!
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गतिविधियाँ, पहेली एवं भाषा संगम

समूह-कार्य एवं संदर्भ
1 कहानी के रंग — भावनाओं (दुख, स्नेह, आजादी) का मूक अभिनय।
🎭 उत्तर (गतिविधि)

यह समूह-गतिविधि है। प्रत्येक समूह एक भाव चुनकर बिना शब्दों के, केवल हाव-भाव से अभिनय करे —

  • दुख: ताई का अकेले सूने घर में उदास बैठना, सिर झुकाना।
  • स्नेह: ताई का मिट्ठू को दुलारना, रोटी खिलाना।
  • आजादी: मिट्ठू का पंख फैलाकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर उड़ने की मुद्रा।
2 पंखों की योजना — मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो कहाँ जाते और क्यों?
📝 उत्तर (नमूना)

यदि मुझे उड़ने का मौका मिले तो मैं ऊँचे पर्वतों, हरे-भरे जंगलों और नदियों के ऊपर उड़ना चाहूँगा, ताकि प्रकृति की सुंदरता को पक्षी की दृष्टि से देख सकूँ। मैं अपने गाँव और प्रियजनों के ऊपर भी उड़कर उन्हें देखना चाहूँगा। उड़ने की यह स्वतंत्रता मुझे असीम आनंद और मुक्ति का अनुभव कराएगी — ठीक वैसे ही जैसे मिट्ठू को खुले आकाश में मिला।

3 “पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही” — घर की महिलाओं की भोजन-रुचियाँ जानिए।
📝 उत्तर (संवेदनशील गतिविधि)

यह वाक्य उन अनगिनत महिलाओं की ओर संकेत करता है जो परिवार की आवश्यकताओं को पहले रखती हैं और अपनी जरूरतों की अनदेखी कर देती हैं। इस गतिविधि में अपने घर की माँ/दादी/बहन से उनकी पसंद का भोजन पूछें और ध्यान दें कि वह महीने में कब-कब बनता है। प्रायः पता चलेगा कि उनकी पसंद का भोजन कभी-कभार ही बनता है। यह गतिविधि हमें सिखाती है कि हमें घर की महिलाओं की पसंद और भावनाओं का भी आदर करना चाहिए।

4 मेरी पहेली — दिए गए उत्तरों के लिए पहेलियाँ बनाइए।
🧩 नमूना पहेलियाँ
  • तोता: हरे पंख लाल चोंच, बोले जो मीठी बानी — बताओ कौन? (तोता)
  • ताई: सूने बड़े घर में रहती, मिट्ठू से करती बतियानी? (ताई)
  • कुंभ: बारह वर्ष में चार बार लगता, संगम पर भारी मेला? (कुंभ)
  • पिंजरा: सींखचों का घर है मेरा, पंछी रहता जिसमें कैद? (पिंजरा)
  • कमरा: चार दीवारें एक छत, घर का छोटा-सा हिस्सा? (कमरा)
  • गंगा: पतित-पावनी पवित्र धारा, जिसमें करते सब स्नान? (गंगा)
5 भाषा संगम — विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘तोता’।
📝 उत्तर

संविधान की आठवीं अनुसूची की कुछ भाषाओं में ‘तोता’ — हिंदी: तोता; संस्कृत: शुकः; पंजाबी: तोता; उर्दू: तोता; कश्मीरी: तोतॅ; सिंधी: तोतो; मराठी: पोपट; गुजराती: पोपट/सूडो; कोंकणी: पोपट; नेपाली: सुगा; बांग्ला: तोता; असमिया: भाटौ; मणिपुरी: तेनवा; ओड़िआ: शुआ; तेलुगु: चिलुक; तमिल: किळि; मलयालम: शुकम्/तत्त; कन्नड़: गिळि।

संकेत: वाक्य “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” को अपनी मातृभाषा में भी लिखकर अभ्यास कीजिए। (स्रोत — shabd.education.gov.in/lexicon.jsp)

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© संवादहीन — शेखर जोशी · प्रश्न-उत्तर समाधान · @edugrown

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