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NCERT Solution

Chapter 1 : मातृभूमि (Matrubhumi) (NCERT Solution) class 6th hindi

Class 6 · Hindi (Malhar) · Chapter 1 : मातृभूमि (Matrubhumi) · All Board · All Medium · 4 views

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हिंदी · मल्हार · अध्याय 1

मातृभूमि

कविता — सोहनलाल द्विवेदी · संपूर्ण पाठ्य-प्रश्नों के हल एक ही स्थान पर

✍️ कवि: सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) 📖 विषय: देशभक्ति कविता 🎯 सभी गतिविधियों के हल सहित
📜 मूल कविता

मातृभूमि

सोहनलाल द्विवेदी

ऊँचा खड़ा हिमालय
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है।

गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली,
पग पग छहर रही हैं।

वह पुण्य-भूमि मेरी,
वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी।

झरने अनेक झरते
जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,
हो मस्त झाड़ियों में।

अमराइयाँ घनी हैं
कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।

वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी।

जन्मे जहाँ थे रघुपति,
जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।

गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।

वह युद्ध-भूमि मेरी,
वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी।

— सोहनलाल द्विवेदी

कवि सोहनलाल द्विवेदी

कवि से परिचय — सोहनलाल द्विवेदी

(1906 – 1988)

सोहनलाल द्विवेदी हिंदी के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। उनका जन्म आज से लगभग सवा सौ साल पहले हुआ था, उस समय अंग्रेज़ों का भारत पर शासन था। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से अंग्रेज़ों का विरोध किया।

उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय 'देशभक्ति' था। भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी अन्य चर्चित रचनाएँ हैं — 'बढ़े चलो, बढ़े चलो' तथा 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती'

1️⃣ पाठ से — In-text Questions9 गतिविधियाँ

🌤️ मेरी समझ से

(क) 1. हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
चरणहिमालयवंशी⭐ सिंधु
सही उत्तर: सिंधु। कविता की पहली पंक्तियों में आया है — "नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।" यहाँ हिमालय के चरणों में झूमते हुए समुद्र (हिंद महासागर) के लिए 'सिंधु' शब्द का प्रयोग किया गया है।
(क) 2. मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से —
⭐ भारत की प्रशंसा की गई है भारत के महापुरुषों की जय की गई है भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है
सही उत्तर: भारत की प्रशंसा की गई है। यह सबसे सटीक (उपयुक्त) उत्तर है क्योंकि यह विकल्प बाकी सभी बातों को अपने अंदर समेटे हुए है — कविता में हिमालय, नदियों व झरनों जैसी प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन भी है, राम, सीता, कृष्ण व गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों का उल्लेख भी है और भूमि की पुण्य-भूमि, धर्म-भूमि, युद्ध-भूमि कहकर महिमा भी गाई गई है — ये सब मिलकर पूरी कविता में भारत माता की समग्र (सम्पूर्ण) प्रशंसा करते हैं, इसलिए अन्य विकल्प इसके ही एक-एक अंश (भाग) हैं।
(ख) अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
चर्चा हेतु बिंदु: कक्षा में मित्रों के साथ बातचीत करते समय बताया जा सकता है कि 'सिंधु' शब्द कविता की पंक्ति में स्पष्ट रूप से समुद्र के अर्थ में प्रयोग हुआ है, और दूसरे प्रश्न में भारत की प्रशंसा वाला उत्तर इसलिए चुना गया क्योंकि कविता की हर पंक्ति (प्रकृति, नदियाँ, महापुरुष, धर्म) अंततः भारत माता की महिमा गाने के लिए ही लिखी गई है। (यह एक खुली मौखिक चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी अपने शब्दों में तर्क दे सकते हैं।)

🔗 मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुने गए शब्दों को उनके सही अर्थ/संदर्भ से मिलाइए —
शब्दसही अर्थ / संदर्भ
1. हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
2. त्रिवेणीतीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
3. मलय पवनदक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
4. सिंधुसमुद्र, एक नदी का नाम।
5. गंगा-यमुनाभारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
6. रघुपतिश्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
7. श्रीकृष्णवसुदेव के पुत्र वासुदेव।
8. सीताजनक की पुत्री जानकी।
9. गीताप्रसिद्ध व प्राचीन ग्रंथ 'श्रीमद्भगवद्गीता' — महाभारत में श्रीकृष्ण व अर्जुन के बीच हुए प्रश्न-उत्तर व संवाद।
10. गौतम बुद्धएक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।
मिलान हल: 1→हिमालय (पर्वत-माला), 2→त्रिवेणी (त्रि-नदी संगम), 3→मलय पवन (सुगंधित वायु), 4→सिंधु (समुद्र), 5→गंगा-यमुना (नदियाँ), 6→रघुपति (श्रीराम), 7→श्रीकृष्ण (वासुदेव-पुत्र), 8→सीता (जानकी), 9→गीता (भगवद्गीता ग्रंथ), 10→गौतम बुद्ध (बौद्ध धर्म-प्रवर्तक)। ऊपर की तालिका में हर शब्द के सामने उसका सही अर्थ पहले ही सुमेलित करके दिखाया गया है।

💬 पंक्तियों पर चर्चा

"वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।"
— इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
इन पंक्तियों में कवि भारत भूमि की दो विशेषताएँ एक साथ बता रहे हैं। 'युद्ध-भूमि' — भारत की धरती पर अनेक वीर योद्धाओं ने साहस और शौर्य से युद्ध लड़े हैं और अपनी मातृभूमि की रक्षा की है। 'बुद्ध-भूमि' — इसी धरती पर गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को अहिंसा, शांति और करुणा का संदेश दिया। युद्ध और शांति दोनों इस भूमि की विशेषताएँ रही हैं, फिर भी अंत में कवि यही दोहराते हैं कि यह भूमि माँ के समान पूज्य 'मातृभूमि' है, क्योंकि यहीं कवि (और हम सब) ने जन्म लिया है — इसलिए यह 'जन्मभूमि' भी है।

🤔 सोच-विचार के लिए

(क) 1. कोयल कहाँ रहती है?
कोयल घनी अमराइयों अर्थात् आम के घने बगीचों/बागों में रहती है — जैसा कविता में कहा गया है "अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।"
2. तन-मन कौन सँवारती है?
बहती हुई शीतल व सुगंधित मलय पवन (हवा) तन-मन को सँवारती है, अर्थात् शरीर और मन दोनों को ताज़गी और आनंद से भर देती है।
3. झरने कहाँ से झरते हैं?
झरने भारत की पहाड़ियों (पर्वतों) से झरते (बहते) हैं — कविता में कहा गया है "झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में।"
4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी (बांसुरी) के माध्यम से पुनीत (पवित्र) गीता अर्थात् श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश सुनाया था।
5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
गौतम बुद्ध ने इसी भारत भूमि में जन्म लेकर अपनी दया, करुणा व त्याग की शिक्षा से इस मातृभूमि (भारत) का ही सुयश (अच्छी प्रसिद्धि) बढ़ाया।
(ख) "नदियाँ लहर रही हैं, पग पग छहर रही हैं" — 'लहर' का अर्थ है पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश। 'छहर' का अर्थ है बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना। कविता पढ़कर बताइए —
कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?
गंगा-यमुना की त्रिवेणी नदियों के हर कदम (पग-पग) पर जगमगाती हुई निराली (अनोखी) छटा (सुंदरता) बिखरी/फैली हुई है — "जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं।"
किसका पानी लहर रहा है?
गंगा और यमुना — दोनों पवित्र नदियों का पानी हिलोरे लेते हुए (लहराते हुए) बह रहा है।

🖋️ कविता की रचना

"गंगा यमुन त्रिवेणी, नदियाँ लहर रही हैं" — यहाँ 'यमुन' शब्द 'यमुना' नदी के लिए प्रयोग हुआ है। इस बारे में विशेषताएँ खोजकर लिखिए।
कभी-कभी कवि कविता की लय (rhythm) और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं — जैसे 'यमुना' को 'यमुन' लिखा गया ताकि पंक्ति का तुक (आगे की पंक्ति 'लहर रही हैं' के साथ) व लय सही बैठे। ध्यान से पढ़ने पर कविता की कुछ और विशेषताएँ भी दिखाई देती हैं:
  • कविता का एक स्पष्ट शीर्षक है — "मातृभूमि"।
  • हर अंतरे (stanza) के बाद "वह ... भूमि मेरी" जैसी टेक (refrain/पुनरावृत्ति) आती है, जो कविता को गीत जैसा प्रवाह देती है।
  • पंक्तियों में तुकांत शब्दों (जैसे हिमालय-सिंधु में लय, झूमता-झूमता) का प्रयोग हुआ है।
  • कविता चार-चार पंक्तियों के अंतरों (छंदों) में बँटी है, जिससे उसे गाना आसान हो जाता है।

📎 मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को मिलाइए —
स्तंभ 1स्तंभ 2 (भाव)
1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है, वह भूमि मेरी माँ समान है।
2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।
मिलान हल: 1 ↔ "मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है, वह भूमि मेरी माँ समान है।"  |  2 ↔ "पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।"  |  3 ↔ "यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।" ऊपर तालिका में मिलान पहले से ही सही क्रम में दिखाया गया है।

💭 अनुमान या कल्पना से

(क) "अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है" — कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
कोयल शायद बसंत ऋतु के सुहावने मौसम और आम के पेड़ों पर आए मीठे बौर (मंजरी) को देखकर खुशी से पुकार रही होगी। वह अपने साथी पक्षियों या दूर बैठे अपने जोड़े को बुला रही होगी, और अपनी मीठी, सुरीली व मधुर आवाज़ में 'कुहू-कुहू' करके पुकार रही होगी। (यह एक कल्पनाशील उत्तर है — विद्यार्थी अपने विचार भी जोड़ सकते हैं।)
(ख) "बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है" — पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
मलय पवन इस भूमि पर रहने वाले सभी लोगों (मनुष्यों) का तन-मन सँवारती है। वह अपनी ठंडक (शीतलता) और चंदन जैसी मीठी सुगंध से शरीर की थकान मिटाकर ताज़गी देती है, और मन को शांत व प्रसन्न कर देती है — इसी कारण उसे 'तन-मन सँवारने वाली' कहा गया है।

🔤 शब्दों के रूप

(क) "जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं" — यहाँ 'पग' शब्द दो बार आया है जिसका अर्थ है 'हर पग' या 'हर कदम' पर। नीचे दिए शब्द-जोड़ों के अर्थ लिखिए —
शब्द-युग्मअर्थ
घर-घरहर घर में, प्रत्येक घर में
बाल-बालएक-एक बाल (रोम-रोम); बहुत बारीकी से / मुश्किल से बचना
साँस-साँसहर साँस के साथ, प्रत्येक श्वास में
देश-देशहर देश में, अनेक देशों में
पर्वत-पर्वतहर पर्वत पर, एक-एक पहाड़ पर
(ख) "वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी" — 'भूमि' शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए शब्द बनाइए और अर्थ लिखिए (संकेत — तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)।
नया शब्दअर्थ
तपोभूमितपस्या करने की भूमि/स्थान
देवभूमिदेवताओं का निवास-स्थान (जैसे हिमालय क्षेत्र)
भारतभूमिभारत देश की धरती
जन्मभूमिजिस भूमि पर जन्म लिया हो
कर्मभूमिजहाँ व्यक्ति अपना कार्य/कर्तव्य करता है
कर्तव्यभूमिअपने कर्तव्य निभाने की भूमि
मरुभूमिरेगिस्तानी, बंजर भूमि
मलयभूमिमलय पर्वत की भूमि (चंदन-वन क्षेत्र)
मल्लभूमिपहलवानों/कुश्ती का अखाड़ा-स्थल
यज्ञभूमिजहाँ यज्ञ किया जाता है
रंगभूमिनाटक/कला के प्रदर्शन का मंच
रणभूमियुद्ध का मैदान
सिद्धभूमिसिद्ध (महान/पूर्ण-ज्ञानी) पुरुषों की भूमि
👉 विद्यार्थी इनमें से कोई भी 4-5 शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिख सकते हैं — ऊपर सभी संभावित शब्द व उनके अर्थ दिए गए हैं।

🪄 थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

"जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया" — 'दया' और 'दिया' में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन अर्थ पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे ही शब्दों की सूची बनाइए, जैसे — घड़ा-घड़ी।
उदाहरण:
शब्द 1शब्द 2अंतर
दया (करुणा)दिया (दीपक / दिया हुआ)'अ' की जगह 'इ' मात्रा
घड़ा (मिट्टी का बर्तन)घड़ी (समय बताने वाला यंत्र)'आ' की जगह 'ई' मात्रा
दिन (day)दीन (गरीब, दीन-हीन)'इ' की जगह 'ई' मात्रा
मिल (मिलना)मील (दूरी की इकाई)'इ' की जगह 'ई' मात्रा
किला (दुर्ग)कीला (खूँटा/नुकीली कील)'इ' की जगह 'ई' मात्रा
तन (शरीर)तान (संगीत की तान/स्वर-लहरी)'अ' की जगह 'आ' मात्रा
2️⃣ पाठ से आगे — Exercise Questions3 गतिविधियाँ

🗣️ आपकी बात

(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए। (संकेत — प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)
नमूना उत्तर: मैं भारत के ______ (अपने शहर/गाँव/राज्य का नाम) में रहता/रहती हूँ। यह स्थान मुझे बहुत सुंदर लगता है क्योंकि यहाँ की हरियाली, यहाँ का मौसम और यहाँ के लोग बहुत प्रेमपूर्ण हैं। यहाँ का प्रसिद्ध खान-पान (जैसे स्थानीय मिठाई/व्यंजन) मुझे बहुत पसंद है और यहाँ ______ (कोई प्रसिद्ध स्थान/मंदिर/बाज़ार) घूमने के लिए प्रसिद्ध है। (यह प्रश्न विद्यार्थी की व्यक्तिगत जानकारी पर आधारित है — ऊपर दिया गया एक ढाँचा/उदाहरण है, जिसे अपने वास्तविक स्थान के अनुसार भरा जा सकता है।)
(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?
नमूना उत्तर: मेरी सबसे प्रिय व्यक्ति मेरी माँ/मेरे मित्र ______ हैं। मुझे उनकी यह बात बहुत अच्छी लगती है कि वे हमेशा मुस्कुराते रहते हैं, मुश्किल समय में मेरी मदद करते हैं, और मुझे नई-नई बातें सिखाते हैं। उनके साथ समय बिताना मुझे बहुत पसंद है। (यह भी एक व्यक्तिगत उत्तर है — विद्यार्थी अपने परिवार/मित्र के अनुसार इसे लिख सकते हैं।)

🎼 वंशी-से

"श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता" — 'वंशी' बाँसुरी को कहते हैं, जो मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला एक वाद्य है। नीचे फूँककर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं — शब्द-जाल में से इनके नाम खोजकर लिखिए।
अलगोजा
शब्द आरंभ: "अ"
अलगोजा
बीन
शब्द आरंभ: "बी"
बीन
बांसुरी
शब्द आरंभ: "बाँ"
बांसुरी
सिंगा
शब्द आरंभ: "सीं"
सींगा
शहनाई
शब्द आरंभ: "श"
शहनाई
नागस्वरम
शब्द आरंभ: "ना"
नागस्वरम
भोंपू
शब्द आरंभ: "भं"
भोंपू
शंख
शब्द आरंभ: "शं"
शंख
🖼️ ऊपर सभी चित्र मूल पाठ्यपुस्तक (NCERT मल्हार) से लिए गए हैं। ये सभी वाद्य 'फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य' (wind instruments) की श्रेणी में आते हैं, ठीक बाँसुरी की तरह।

🧩 आज की पहेली

नीचे दिए गए अक्षरों को आगे-पीछे करके (क्रम बदलकर) व आवश्यकतानुसार मात्रा जोड़कर कोई सार्थक शब्द बनाइए। पहला शब्द उदाहरण के रूप में पहले से बना दिया गया है।
क्रमअक्षरबना हुआ शब्द
1स म ह ग रमहासागर (उदाहरण)
2ह म य लहिमालय
3ग गगंगा
4भ त रभरत
5ल क यकोयल
6व न पपवन
💡 ध्यान दीजिए — बनाए गए सभी शब्द (हिमालय, गंगा, भरत, कोयल, पवन) इसी कविता 'मातृभूमि' से जुड़े हुए हैं! यह पहेली कविता के शब्द-भंडार को और मज़बूत करने के लिए बनाई गई है।
3️⃣ अतिरिक्त पठन — Extra Reading4 भाग

🇮🇳 झरोखे से — वंदे मातरम्

'वंदे मातरम्' बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया गीत है, जो स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। इसका भावार्थ पढ़िए —
वंदे मातरम्भावार्थ
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!
सुजलाम्, सुफलाम्,तुम जल से भरी हुई हो, फलों से परिपूर्ण हो,
मलयज शीतलाम्,तुम्हें मलय से आती हुई पवन शीतलता प्रदान करती है,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो!
वंदे मातरम्!हे माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!
शुभ्रज्योत्सना पुलकित यामिनीम्,जिसकी रमणीय रात्रि को चंद्रमा का प्रकाश शोभायमान करता है,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,जो खिले हुए फूलों के पेड़ों से सुसज्जित है,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!सुख देने वाली, वरदान देने वाली माँ,
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!
🔊 इसे संगीत के साथ यहाँ सुना जा सकता है: knowindia.india.gov.in — राष्ट्रगीत

🔍 साझी समझ

'मातृभूमि' कविता और 'वंदे मातरम्' गीत में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं?
🟢 समानताएँ
  • दोनों रचनाओं में भारत माता की प्रशंसा व उसके प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई है।
  • दोनों में भारत की प्राकृतिक सुंदरता — नदियाँ, जल, शीतल पवन, हरियाली — का सुंदर वर्णन है।
  • दोनों रचनाओं में भारत को माँ के समान मानकर सम्मान दिया गया है ('मातृभूमि' व 'मातरम्' दोनों शब्दों का अर्थ 'माता' से जुड़ा है)।
  • दोनों देशभक्ति की भावना जगाने वाली रचनाएँ हैं।
🟠 अंतर
  • 'वंदे मातरम्' में भारत को सीधे 'माँ' कहकर संबोधित करते हुए प्रणाम (वंदना) किया गया है, जबकि 'मातृभूमि' में भारत की विशेषताएँ वर्णन-शैली में बताई गई हैं।
  • 'मातृभूमि' में हिमालय, गंगा-यमुना के साथ-साथ राम, सीता, कृष्ण, गौतम बुद्ध जैसे ऐतिहासिक/धार्मिक महापुरुषों का भी उल्लेख है, जो 'वंदे मातरम्' में नहीं है।
  • 'वंदे मातरम्' मूल रूप से संस्कृतनिष्ठ भाषा में है, जबकि 'मातृभूमि' सरल हिंदी में लिखी गई है।

🔎 खोजबीन के लिए

पाठ से संबंधित कुछ और रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ी/देखी जा सकती हैं —
📚 इन शीर्षकों को अपने अध्यापक की सहायता से क्यू.आर. कोड द्वारा खोजें और पढ़ें:
स्वाधीनता की सरगम — वंदना के इन स्वरों में ना हाथ एक शस्त्र हो पुष्प की अभिलाषा यह महिमामय अपना भारत
यह एक स्वाध्याय (स्वयं पढ़ने की) गतिविधि है, इसमें कोई निश्चित 'उत्तर' नहीं है — विद्यार्थियों को इन रचनाओं को पढ़कर कक्षा में उन पर चर्चा करनी है।

🌺 पढ़ने के लिए — पुष्प की अभिलाषा

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।

— माखनलाल चतुर्वेदी

संक्षिप्त भावार्थ: इस कविता में एक फूल कह रहा है कि उसे किसी सुंदरी के गहनों में गूँथा जाना, किसी की माला में पिरोया जाना, राजाओं की शव-यात्रा पर बिछाया जाना या देवताओं के सिर चढ़ाया जाना — कुछ भी नहीं चाहिए। फूल की एक ही अभिलाषा (इच्छा) है कि उसे उस रास्ते में फेंका जाए, जिस रास्ते से देश पर अपना सिर (जीवन) न्योछावर करने वाले वीर सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए जाते हैं — अर्थात् वह देश की सेवा में शहीद होने वाले वीरों के चरणों में गिरना चाहता है। यह कविता भी 'मातृभूमि' कविता की तरह ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत है।
🌼 सभी उत्तर NCERT 'मल्हार' पाठ्यपुस्तक, अध्याय 1 — 'मातृभूमि' पर आधारित हैं। @EduGrown

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