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Quick revision notes

Ch-13 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि (Pṛthivyāṃ Trīṇi Ratnāni) Quick Revision Notes Class 6th Sanskrit (दीपकम्)

Class 6 · Sanskrit (दीपकम्) · Ch-13 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि (Pṛthivyāṃ Trīṇi Ratnāni) · All Board · All Medium · 2 views

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✏️ दीपकम् | Class 6 Sanskrit  •  Chapter १३
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
Three Jewels of Earth — Sanskrit Wisdom — Quick Revision Notes
💎 पाठ परिचय
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि — Three Jewels
@edugrown   @edugrown   @edugrown
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि — Three Jewels
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि — Three Jewels of the Earth!
शिक्षक ने कक्षा में स्फोरकपत्राणि (Flashcards) लाए जिन पर सुंदर सुभाषित और चित्र थे।
सुन्दरवचनानि एव सुभाषितानि भवन्ति।
इस पाठ में चार महत्वपूर्ण सुभाषित हैं जो जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हैं।
💎 सुभाषित १ — पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
@edugrown   @edugrown   @edugrown
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥
पृथ्वी पर तीन रत्न हैं — जल, अन्न, और सुभाषित
मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों को रत्न मानते हैं।
📌 तीन असली रत्नों का महत्व
💧
जलम्
पानी
जीवन का आधार, बिना जल जीवन असंभव
🌾
अन्नम्
भोजन/अनाज
शक्ति का स्रोत, सभी प्राणियों का आहार
📜
सुभाषितम्
ज्ञान-वचन
आत्मा का पोषण, जीवन की दिशा
सुभाषित = सु (अच्छा) + भाषित (कहा हुआ) = अच्छी तरह कही गई बात = Wise saying
📖 सुभाषित २ — विद्या की श्रृंखला
@edugrown   @edugrown   @edugrown
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
विद्या → विनय (Humility) देती है
विनय → पात्रता (Worthiness) देता है
पात्रता → धन (Wealth) देती है
धन → धर्म (Righteousness) देता है
धर्म → सुख (Happiness) देता है
विद्या की पाँच-सीढ़ी:
विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख
Education → Humility → Worthiness → Wealth → Righteousness → Happiness
🙏 सुभाषित ३ — सर्वे भवन्तु सुखिनः
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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
सभी सुखी हों | सभी रोगमुक्त हों।
सभी शुभ देखें | कोई भी दुखी न हो।
— एक सार्वभौमिक प्रार्थना (Universal Prayer)
लोट्लकार in Subhashita:
भवन्तु (Let them be) | सन्तु (Let them be) | पश्यन्तु (Let them see) | भवेत् (Let it be)
🌳 सुभाषित ४ — वृक्षाः सत्पुरुषाः
छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥
पेड़ दूसरों को छाया देते हैं, खुद धूप में खड़े रहते हैं।
फल भी दूसरों के लिए देते हैं — जैसे सज्जन पुरुष!
📐 पदच्छेद — Word Analysis (Textbook)
📌 सुभाषित १ का पदच्छेद और अन्वय
पदअर्थGrammar
पृथिव्याम्पृथ्वी परसप्तमी विभक्ति
त्रीणितीननपुं° बहुवचन
रत्नानिरत्ननपुं° बहुवचन — कर्ता
जलम्पानीनपुं° एकवचन
अन्नम्अनाज/भोजननपुं° एकवचन
सुभाषितम्ज्ञानवचननपुं° एकवचन
मूढैःमूर्खों द्वारातृतीया विभक्ति
पाषाणखण्डेषुपत्थर के टुकड़ों मेंसप्तमी बहुवचन
रत्नसंज्ञारत्न का नामस्त्री° एकवचन — कर्म
विधीयतेदिया जाता हैकर्मणि प्रयोग
अन्वय (Word Order):
पृथिव्यां जलम् अन्नं सुभाषितम् इति त्रीणि रत्नानि (सन्ति)। मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।
📚 शब्दार्थ
SanskritHindiEnglish
रत्नम्रत्न, मणिJewel / Gem
जलम्पानीWater
अन्नम्अनाज, भोजनFood / Grain
सुभाषितम्ज्ञानवचनWise saying
मूढःमूर्खFool / Ignorant
पाषाणखण्डम्पत्थर का टुकड़ाStone / Rock piece
विनयःविनम्रता, नम्रताHumility
पात्रतायोग्यताWorthiness
निरामयाःरोगमुक्तDisease-free
भद्राणिशुभAuspicious things
स्फोरकपत्रम्फ्लैशकार्डFlashcard
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