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NCERT Solution

Appendix : वर्णमात्रा-परिचयः (Varṇamātrā-Paricayaḥ) (NCERT Solution) Class 7th Sanskrit

Class 7 · Sanskrit (दीपकम्) · Appendix : वर्णमात्रा-परिचयः (Varṇamātrā-Paricayaḥ) · All Board · All Medium · 7 views

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संस्कृतम् · दीपकम् · कक्षा ७ · अतिरिक्तम् अध्ययनम्

(क) वर्णमात्रा-परिचयः

वर्ण-मात्रा-सिद्धान्त, मात्रा-गणना एवं सम्पूर्ण अभ्यास-समाधान
📗 NCERT · अध्याय 13 · ह्रस्व · दीर्घ · प्लुत
📖 पाठ-सार एवं मात्रा-सिद्धान्त
सिद्धान्तःमात्रा किसे कहते हैं?

मात्रा किसी वर्ण के उच्चारण में लगने वाले समय (काल) की इकाई है। संस्कृत में स्वरों की तीन मात्राएँ और व्यंजनों की एक (आधी) मात्रा होती है —

वर्णमात्रा-नाममात्रा (काल)उदाहरण
स्वरःह्रस्वः (एकमात्रः)$1$अ, इ, उ, ऋ, ऌ
दीर्घः (द्विमात्रः)$2$आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
प्लुतः (त्रिमात्रः)$3$अ३, इ३, ए३, ओ३ …
व्यञ्जनम्अर्धमात्रा$\tfrac12$क्, ख्, ग् …, अनुस्वारः (ं), विसर्गः (ः)
🔤 संस्कृत में कुल २२ (द्वाविंशति) स्वर हैं। प्लुत स्वर का प्रयोग प्रायः (क) दूर से बुलाने में — हे३ राम! तथा (ख) वेद-मंत्रों के आरंभ में — ओ३म् — होता है।
तालिकाह्रस्व · दीर्घ · प्लुत रूप
ह्रस्वः (१ मात्रा)दीर्घः (२ मात्रा)प्लुतः (३ मात्रा)
समानाक्षराणिअ३
इ३
उ३
ऋ३
ऌ३
सन्ध्यक्षराणिए३
ऐ३
ओ३
औ३
श्लोक 1याज्ञवल्क्य-शिक्षा
एकमात्रो भवेद् ह्रस्वः द्विमात्रो दीर्घ उच्यते।
त्रिमात्रश्च प्लुतो ज्ञेयः व्यञ्जनं चार्धमात्रिकम्॥
— याज्ञवल्क्य-शिक्षा
अर्थः — एकमात्र स्वर 'ह्रस्व' होता है, द्विमात्र स्वर 'दीर्घ' कहलाता है, त्रिमात्र स्वर 'प्लुत' जानना चाहिए, और व्यञ्जन तो अर्धमात्रिक ($\tfrac12$) ही होता है।
श्लोक 2पाणिनीय-शिक्षा — पशु-पक्षी उदाहरण
चाषस्तु वदते मात्रां द्विमात्रं त्वेव वायसः।
शिखी रौति त्रिमात्रं तु नकुलस्त्वर्धमात्रकम्॥
— पाणिनीय-शिक्षा
चाष · वायस · शिखी · नकुल — चार जीवों की ध्वनि से मात्रा-भेद
चाष · वायस · शिखी · नकुल — चार जीवों की ध्वनि से मात्रा-भेद
chasha
चाष (नीलकण्ठ)
एकमात्र · ह्रस्व · $1$
vayasa
वायस (कौआ)
द्विमात्र · दीर्घ · $2$
shikhi
शिखी (मोर)
त्रिमात्र · प्लुत · $3$
nakula
नकुल (नेवला)
अर्धमात्र · व्यञ्जन · $\tfrac12$
भावार्थः — चाष (नीलकण्ठ) पक्षी एकमात्र-काल की ध्वनि करता है — वह ह्रस्व स्वर जैसी है। वायस (कौआ) द्विमात्र-काल — दीर्घ स्वर जैसी। शिखी (मोर) त्रिमात्र-काल — प्लुत स्वर जैसी। और नकुल (नेवला) अर्धमात्र-काल की ध्वनि करता है — वह व्यञ्जन जैसी है।
कुक्कुट (मुर्गा) की बाँग — उ (एकमात्र) · ऊ (द्विमात्र) · उ३ (त्रिमात्र) का सुंदर उदाहरण
कुक्कुट (मुर्गा) की बाँग — उ (एकमात्र) · ऊ (द्विमात्र) · उ३ (त्रिमात्र) का सुंदर उदाहरण
विशेषविशेष चिह्न — ॐ एवं ऽ
  • — यह पवित्र चिह्न 'ओम्' (ओ३म्) शब्द के स्थान पर प्राचीन काल से प्रयुक्त होता है। 'ओम्' एवं 'ॐ' — दोनों का प्रयोग शुद्ध है।
  • ऽ (अवग्रह) — इसका नाम 'अवग्रह' है; इसका कोई उच्चारण नहीं होता। सन्धि में जब अकार (अ) लुप्त होता है, तब उसे दर्शाने के लिए यह चिह्न लगाया जाता है। जैसे — कः + अपि = कोऽपि ('अ' के लोप का सूचक)।
मात्रा-गणनाशब्दों की मात्रा-गणना (उदाहरण)
नियम — प्रत्येक व्यञ्जन $=\tfrac12$, ह्रस्व स्वर $=1$, दीर्घ स्वर $=2$, प्लुत $=3$, विसर्ग/अनुस्वार $=\tfrac12$।
रामः$= 4\tfrac12$ मात्राः
र्$\,(\tfrac12)$ + आ$\,(2)$ + म्$\,(\tfrac12)$ + अ$\,(1)$ + ः$\,(\tfrac12)$
सीता$= 5$ मात्राः
स्$\,(\tfrac12)$ + ई$\,(2)$ + त्$\,(\tfrac12)$ + आ$\,(2)$
हनूमान्$= 7$ मात्राः
ह्$\,(\tfrac12)$ + अ$\,(1)$ + न्$\,(\tfrac12)$ + ऊ$\,(2)$ + म्$\,(\tfrac12)$ + आ$\,(2)$ + न्$\,(\tfrac12)$
कौसल्या$= 7$ मात्राः
क्$\,(\tfrac12)$ + औ$\,(2)$ + स्$\,(\tfrac12)$ + अ$\,(1)$ + ल्$\,(\tfrac12)$ + य्$\,(\tfrac12)$ + आ$\,(2)$
हे३ (प्लुत)$= 3\tfrac12$ मात्राः
ह्$\,(\tfrac12)$ + ए३$\,(3)$
✍️ अभ्यासः — वयम् अभ्यासं कुर्मः
प्रश्न 1 अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन द्विपदेन वा उत्तरं लिखन्तु।
(एक या दो शब्दों में उत्तर लिखिए।)
(क) वर्णानां कतिविधाः मात्राः भवन्ति?
उत्तरम् — चतुर्विधाः (ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत, अर्धमात्रा)।
(ख) एकविधा मात्रा केषां भवति?
उत्तरम् — व्यञ्जनानाम्
(ग) स्वरेषु कतिविधाः मात्राः भवन्ति?
उत्तरम् — त्रिविधाः (ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत)।
(घ) संस्कृत-भाषायाम् आहत्य कति स्वराः भवन्ति?
उत्तरम् — द्वाविंशतिः ($22$)।
(ङ) विविध-मात्राणाम् उच्चारणे कस्य भेदः भवति?
उत्तरम् — कालस्य (समयस्य)।
(च) नित्यम् अर्धमात्रा केषां भवति?
उत्तरम् — व्यञ्जनानाम्
(छ) ध्वनयः कति-प्रकारकाः सन्ति?
उत्तरम् — त्रिप्रकारकाः
(ज) विसर्गस्य कति मात्राः भवन्ति?
उत्तरम् — अर्धमात्रा ($\tfrac12$)।
(झ) अनुस्वारस्य कति मात्राः भवन्ति?
उत्तरम् — अर्धमात्रा ($\tfrac12$)।
प्रश्न 2 पूर्णवाक्येन लिखन्तु।
(क) स्वराणां कतिविधाः भेदाः उपभेदाः च सन्ति? नामानि लिखन्तु।
उत्तरम् — स्वराणां द्विविधाः भेदाः सन्ति — (1) समानाक्षराणि, (2) सन्ध्यक्षराणि। तेषां त्रयः उपभेदाः (मात्राः) — ह्रस्वः, दीर्घः, प्लुतः च।
(ख) व्यञ्जनानां कतिविधाः भेदाः उपभेदाः च सन्ति? नामानि लिखन्तु।
उत्तरम् — व्यञ्जनानां चतुर्विधाः भेदाः सन्ति — (1) स्पर्शाः, (2) अन्तःस्थाः, (3) ऊष्माणः, (4) अयोगवाहौ (अनुस्वार-विसर्गौ)। तेषां एकः एव उपभेदः — एकविधा अर्ध-मात्रा
(ग) अनुस्वारस्य विसर्गस्य च सामान्यं नाम किम्? तयोः प्रत्येकं कति मात्राः?
उत्तरम् — अनुस्वारस्य विसर्गस्य च सामान्यं नाम 'अयोगवाहौ' अस्ति। तयोः प्रत्येकं अर्धमात्रा ($\tfrac12$ मात्रा) भवति।
प्रश्न 3 परस्परं मेलयत।
('क' एवं 'ख' का मिलान कीजिए।)
  • अ३प्लुतः
  • दीर्घः
  • ह्रस्वः
  • एँअनुनासिक-स्वरः
  • कू$2\tfrac12$ (मात्राः)
💡 कू $=$ क्$(\tfrac12)$ + ऊ$(2)$ $= 2\tfrac12$ मात्राः।
प्रश्न 4 पट्टिकातः चित्वा उचितं पदं पूरयन्तु।
पट्टिका — शिखीनकुलःवायसःचाषःकोकिलः
(क) ________ त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
शिखी त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
(ख) ________ द्विमात्रकालं ध्वनिं करोति।
वायसः द्विमात्रकालं ध्वनिं करोति।
(ग) ________ एकमात्रकालं ध्वनिं करोति।
चाषः एकमात्रकालं ध्वनिं करोति।
(घ) ________ अर्धमात्रकालं ध्वनिं करोति।
नकुलः अर्धमात्रकालं ध्वनिं करोति।
कार्यकलापः मात्रा-गणनां क्रीडामः — पूर्ण हल
(नीचे प्रत्येक शब्द की मात्रा-गणना विस्तार से हल की गई है।)
दोला$= 5$ मात्राः
द्$(\tfrac12)$ + ओ$(2)$ + ल्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ (उदाहरण)
बालः$= 4\tfrac12$ मात्राः
ब्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + ल्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
चटका$= 5\tfrac12$ मात्राः
च्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ट्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$
शक्तिः$= 4$ मात्राः
श्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + त्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
घटिका$= 5\tfrac12$ मात्राः
घ्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ट्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$
दुःखम्$= 4$ मात्राः
द्$(\tfrac12)$ + उ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$ + ख्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
मूषकः$= 6$ मात्राः
म्$(\tfrac12)$ + ऊ$(2)$ + ष्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
कपोतः$= 6$ मात्राः
क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + प्$(\tfrac12)$ + ओ$(2)$ + त्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
कृषकः$= 5$ मात्राः
क्$(\tfrac12)$ + ऋ$(1)$ + ष्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
ऐतिह्यम्$= 6$ मात्राः
ऐ$(2)$ + त्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + ह्$(\tfrac12)$ + य्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
संशयः$= 5\tfrac12$ मात्राः
स्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ं$(\tfrac12)$ + श्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + य्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
विद्यार्थी$= 7\tfrac12$ मात्राः
व्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + द्$(\tfrac12)$ + य्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + र्$(\tfrac12)$ + थ्$(\tfrac12)$ + ई$(2)$
खनित्रम्$= 5\tfrac12$ मात्राः
ख्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + न्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + त्$(\tfrac12)$ + र्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
धाष्ट्र्यम्$= 6$ मात्राः
ध्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + ष्$(\tfrac12)$ + ट्$(\tfrac12)$ + र्$(\tfrac12)$ + य्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
प्रक्रिया$= 6\tfrac12$ मात्राः
प्$(\tfrac12)$ + र्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + क्$(\tfrac12)$ + र्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + य्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$
निःशुल्कम्$= 6$ मात्राः
न्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$ + श्$(\tfrac12)$ + उ$(1)$ + ल्$(\tfrac12)$ + क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
कस्मिँश्चिद्$= 6$ मात्राः
क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + स्$(\tfrac12)$ + म्$(\tfrac12)$ + इँ$(1)$ + श्$(\tfrac12)$ + च्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + द्$(\tfrac12)$
कार्त्स्न्यम्$= 6\tfrac12$ मात्राः
क्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + र्$(\tfrac12)$ + त्$(\tfrac12)$ + स्$(\tfrac12)$ + न्$(\tfrac12)$ + य्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$
क्रमाङ्कः$= 7$ मात्राः
क्$(\tfrac12)$ + र्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + म्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + ङ्$(\tfrac12)$ + क्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
अट्टहासः$= 7\tfrac12$ मात्राः
अ$(1)$ + ट्$(\tfrac12)$ + ट्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ह्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + स्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
निःस्वार्थः$= 7\tfrac12$ मात्राः
न्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$ + स्$(\tfrac12)$ + व्$(\tfrac12)$ + आ$(2)$ + र्$(\tfrac12)$ + थ्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
पुनःपुनः$= 7$ मात्राः
प्$(\tfrac12)$ + उ$(1)$ + न्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$ + प्$(\tfrac12)$ + उ$(1)$ + न्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
पुँस्कोकिलः$= 8$ मात्राः
प्$(\tfrac12)$ + उँ$(1)$ + स्$(\tfrac12)$ + क्$(\tfrac12)$ + ओ$(2)$ + क्$(\tfrac12)$ + इ$(1)$ + ल्$(\tfrac12)$ + अ$(1)$ + ः$(\tfrac12)$
परियोजना परियोजनाकार्यम् (Project Work)
अपने आस-पास एवं प्रकृति में उपस्थित पशु-पक्षियों की ध्वनियों को ध्यान से सुनिए और लिखिए कि उनकी ध्वनियों में कितनी मात्राएँ (एकमात्र/द्विमात्र/त्रिमात्र) हैं — जैसे कौआ (द्विमात्र), मोर (त्रिमात्र), मुर्गा (एक-द्वि-त्रिमात्र)।
@edugrown — वर्णमात्रा-परिचयः · सम्पूर्ण समाधान ✨

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