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Quick revision notes

पाठ 9: चिड़िया (Chidiya) Quick revision notes Class 7th Hindi (मल्हार) — आरसी प्रसाद सिंह

Class 7 · Hindi (Malhar) · Chapter 9 : चिड़िया (Chidiya) · All Board · All Medium · 1 views

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9
कक्षा 7 · हिंदी · मल्हार

चिड़ियाकविता

रचनाकार — आरसी प्रसाद सिंह · पीपल की डाली से मिला मुक्ति-मंत्र
चिड़िया

कविता का सार

पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गा रही है। कवि पूछते हैं — क्या तुम्हें पता है कि वह अपनी बोली में हमें क्या संदेश सुनाती है?

वह चिड़िया हमें प्रेम-प्रीति की रीति सिखाती है और जग के बंधनों में बँधे मनुष्य को मुक्ति का मंत्र बताती है।

वन में जितने पंछी हैं — खंजन, कपोत, चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता — सब आपस में हिल-मिलकर रहते हैं।

वे सब मिल-जुलकर रहते हैं और मिल-जुलकर ही खाते हैं। आसमान ही उनका घर है और वे जहाँ चाहें, वहाँ चले जाते हैं। जहाँ रहते हैं, वहीं अपनी दुनिया बसा लेते हैं — दिन भर काम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं।

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पक्षियों का जीवन — मनुष्य के लिए आईना

कवि कहते हैं कि पक्षियों के मन में न लोभ है, न पाप, न चिंता। उन्हें जग का सारा माल हड़प लेने की चाह भी नहीं है।

वे अपने श्रम से जितना मिलता है, उतना ही ले लेते हैं, और जो बच जाता है उसे दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।

वे सीमा-हीन आकाश में निर्भय होकर विचरण करते हैं और कभी दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते।

इसीलिए वे मनुष्य से कहते हैं — हे मानव! तुम हमसे जीना सीखो। हम स्वच्छंद हैं, फिर तुमने अपने ही पैरों में बेड़ी क्यों डाल रखी है?

वे आगे कहते हैं — हमें देखो और फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो; ओ मानव, तुम मानवता से द्रोह की भावना छोड़ दो।

पीपल की डाली पर चिड़िया यही सुनाने आती है — घड़ी भर बैठकर, हमें चकित करके, गाकर फिर उड़ जाती है।

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पिंजरा — वही बंधन जिससे चिड़िया मुक्ति का मंत्र देती है
पिंजरा — वही बंधन जिससे चिड़िया मुक्ति का मंत्र देती है

कविता की खास बातें

  • कविता में चिड़िया केवल पक्षी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और संतोष की प्रतीक है।
  • पक्षियों का सहजीवन — मिलकर रहना, मिलकर खाना — मनुष्य के लिए उदाहरण है।
  • ‘सोने की कड़ियाँ’ का अर्थ है — धन-दौलत का वह बंधन जिसे हमने खुद अपने ऊपर डाला है।
  • पक्षी दूसरों की कमाई नहीं छीनते — यह ईमानदारी और परिश्रम का संदेश है।
  • कविता का अंत बहुत सुंदर है — चिड़िया उपदेश देकर रुकती नहीं, गाकर उड़ जाती है।

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‘रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी दुनिया एक बसाते हैं’
‘रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी दुनिया एक बसाते हैं’
कविता का संदेश

लोभ, बैर और दिखावे के बंधन तोड़कर मिल-जुलकर, संतोष से और स्वतंत्र होकर जीना ही असली जीवन है। पक्षी यही सिखाते हैं।

शब्दार्थ

रीतितरीका, ढंग
बंदीबँधा हुआ, कैद
मुक्ति-मंत्रआज़ादी का मंत्र
खंजनएक छोटा सुंदर पक्षी
कपोतकबूतर
चातकपपीहा
काककौआ
शुकतोता
हिलमिलमिल-जुलकर
परवाहचिंता, फ़िक्र
हड़पनाछीन लेना
श्रममेहनत
हितभला, फ़ायदा
सीमा-हीनजिसकी कोई सीमा न हो
निर्भयबिना डर के
विचरणघूमना-फिरना
स्वच्छंदआज़ाद, बंधनरहित
बेड़ीपैरों की ज़ंजीर
द्रोहबैर, शत्रुता
चकितहैरान

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शहर के ऊपर उड़ते पक्षी
शहर के ऊपर उड़ते पक्षी
मिल-जुलकर उड़ना ही उनका स्वभाव है
मिल-जुलकर उड़ना ही उनका स्वभाव है
— पाठ 9 के नोट्स समाप्त —

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