पाठ 8
सत्रिया और बिहू नृत्य 💃
✍️ विधा: यात्रा-वृत्तांत / निबंध
✒️ लेखिका: जया मेहता
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पाठ परिचय
यह पाठ लंदन में रहने वाली एक छोटी लड़की एंजेला की कहानी के माध्यम से भारत के असम प्रांत की समृद्ध नृत्य परंपरा — सत्रिया और बिहू नृत्य — से हमारा परिचय कराता है। यह हमें भारत की सांस्कृतिक विविधता और सुंदरता की झलक दिखाता है।
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लेखिका परिचय
जया मेहता
जन्म: 1977 एक प्रसिद्ध नृत्यांगना, लेखिका और शिक्षिका। ये स्वयं ओडिसी नृत्य में पारंगत हैं और वर्षों से देश-विदेश में नृत्य प्रस्तुतियाँ देती रही हैं। यह पाठ इनकी पुस्तक "नृत्य कथा" से लिया गया है, जिसमें वे भारतीय नृत्यों की सुंदरता को बड़ी सरलता से बच्चों के लिए शब्दों में पिरोती हैं।📝
पाठ का सार (आसान भाषा में)
- एंजेला लंदन के केंजिंग्टन इलाके में रहती थी। उसकी माँ एलेसेंड्रा एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता थीं, जिन्हें ब्रिटिश अकादमी से असम की नृत्य-परंपरा पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए आर्थिक मदद मिली थी।
- काम पूरा करने के लिए सिर्फ़ एक महीने का समय था, इसलिए एंजेला अपने माता-पिता (एलेसेंड्रा और ब्रायन) के साथ जल्दी ही लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी के लिए रवाना हो गई।
- रास्ते में एंजेला को पता चला कि असम भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित है, जो अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के साथ-साथ अपनी समृद्ध नृत्य-परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है।
- वे अप्रैल के महीने में असम पहुँचे, जब वहाँ नए साल के स्वागत में बिहू नामक उत्सव मनाया जा रहा था। एंजेला ने बिहू नृत्य को उसी रात देखा और उसकी सुंदरता से बहुत प्रभावित हुई।
- इसके साथ ही एंजेला को असम की शास्त्रीय नृत्य शैली सत्रिया नृत्य से भी परिचय हुआ, जो वैष्णव मठों (सत्रों) में पली-बढ़ी एक गंभीर और भक्तिपूर्ण नृत्य-शैली है।
- यात्रा के अंत तक एंजेला को असम के नृत्यों — बिहू और सत्रिया — दोनों से इतना लगाव हो गया कि वे उसके अपने मनोरंजन और सीखने का हिस्सा बन गए।
पारंपरिक असमिया सत्र (वैष्णव मठ)
बिहू उत्सव में ढोल वादन
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मुख्य भाव
यह पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को दर्शाता है। एक विदेशी बच्ची एंजेला के नज़रिए से हमें पता चलता है कि भारत के हर कोने की अपनी अनूठी परंपराएँ हैं, जो पूरी दुनिया को आकर्षित करती हैं। बिहू असम का लोकनृत्य है जो वसंत और नई फ़सल के स्वागत में किया जाता है, जबकि सत्रिया एक शास्त्रीय, भक्तिभाव से भरा नृत्य है जो सत्रों (मठों) में विकसित हुआ।
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कठिन शब्दों के अर्थ
डॉक्यूमेंट्री — वृत्तचित्र (सच्ची घटनाओं पर बनी फ़िल्म)
वित्तीय मदद — आर्थिक सहायता
सत्र — असम का वैष्णव मठ
बिहू — असम का प्रसिद्ध लोकनृत्य/त्योहार
शास्त्रीय नृत्य — नियमों और परंपरा पर आधारित नृत्य शैली
वैष्णव — भगवान विष्णु की भक्ति से जुड़ा
पूर्वोत्तर — भारत का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
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याद रखने योग्य बातें (एक नज़र में)
लेखिका: जया मेहता
मुख्य पात्र: एंजेला (लंदन), माँ एलेसेंड्रा, पिता ब्रायन
स्थान: असम (गुवाहाटी) — भारत का पूर्वोत्तर राज्य
बिहू: असम का लोकनृत्य/नववर्ष उत्सव (अप्रैल)
सत्रिया: असम की शास्त्रीय, भक्तिपूर्ण नृत्य-शैली (सत्रों में विकसित)
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सीख
भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी पूँजी है — हर क्षेत्र की कला और परंपराओं को जानना और उनका सम्मान करना हमें अपनी संस्कृति के प्रति गर्व से भर देता है।
✏️ ये नोट्स केवल पढ़ाई और रिवीज़न में सहायता हेतु तैयार किए गए हैं। सम्पूर्ण पाठ के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक ज़रूर पढ़ें। | @edugrown