वर्षा-बहारकविता
कविता का सार
कवि कहते हैं कि वर्षा की बहार सबके मन को लुभा रही है। आकाश में अनोखी छटा है और घनघोर बादल छाए हुए हैं।
बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं, पानी बरस रहा है और झरने भी बह निकले हैं।
ठंडी हवा चलती है तो सारी डालियाँ हिलने लगती हैं, और बागों में मालिनें सुंदर गीत गाती हैं।
तालाबों में रहने वाले जलचर जीव बहुत प्रसन्न हैं। लाखों पपीहे उड़ते फिरते हैं और गर्मी का सारा ताप मिटा देते हैं।
वन में मोर नाच रहे हैं और मेंढक सुरीली आवाज़ में गाकर सबको लुभा रहे हैं।
गुलाब खिल रहा है, चारों ओर सुगंध उड़ रही है और बागों में खूब आनंद छाया हुआ है।
हंस सुंदर कतार बाँधकर चलते हैं और किसान मन को हर लेने वाले गीत गाते हैं।
अंत में कवि कहते हैं कि धरती पर वर्षा की यह बहार सचमुच अनोखी है — सारे जगत की शोभा इसी पर निर्भर है।
कविता की खास बातें
- यह एक प्रकृति-चित्रण की कविता है — कवि दृश्य को शब्दों में चित्र की तरह उतारते हैं।
- कविता में आवाज़ें भी हैं और दृश्य भी — बादल गरजते हैं, मेंढक गाते हैं, मालिनें और किसान गीत गाते हैं; मोर नाचते हैं, हंस कतार बाँधते हैं, गुलाब खिलते हैं।
- वर्षा से हर कोई खुश है — पेड़-पौधे, पक्षी, जलचर जीव और किसान सब।
- कवि वर्षा को केवल मौसम नहीं मानते — वे उसे सारे संसार की सुंदरता का आधार बताते हैं।
- हर पंक्ति में लय है, इसलिए कविता गाई भी जा सकती है।
वर्षा सिर्फ़ पानी नहीं लाती — वह पूरी सृष्टि में जीवन, आनंद और सुंदरता भर देती है। इसीलिए प्रकृति के इस उपहार का सम्मान होना चाहिए।
कवि से परिचय
मुकुटधर पांडेय (1895–1989) का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था।
प्रकृति-सौंदर्य की विभिन्न छवियाँ उनकी रचनाओं में देखने को मिलती हैं। किशोरावस्था में ही उन्होंने कविता और लेख आदि लिखना शुरू कर दिया था।
उस समय की पत्रिकाओं — सरस्वती और माधुरी में उनकी रचनाएँ प्रमुखता से प्रकाशित होती थीं।
हिंदी साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ सम्मान दिया था।
शब्दार्थ
| बहार | रौनक, सुंदरता |
| छटा | शोभा, सुंदर दृश्य |
| अनूठी | अनोखी |
| घनघोर | घना और गहरा |
| झरने | पहाड़ से गिरता पानी |
| जलचर | पानी में रहने वाले जीव |
| पपीहा | वर्षा ऋतु का प्रसिद्ध पक्षी |
| ग्रीष्म ताप | गर्मी की तपन |
| मालिन | बाग की देखभाल करने वाली |
| मेंढक | दादुर |
| सुगीत | मधुर गीत |
| सौरभ | सुगंध |
| आमोद | आनंद, प्रसन्नता |
| मनहर | मन को हर लेने वाला |
| भू | धरती |
| शोभा | सुंदरता |