फूल और काँटाकविता
कविता का सार
कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही जगह, एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं। रात में दोनों पर एक ही चाँद की चाँदनी पड़ती है, एक-सी बारिश उन पर बरसती है और एक-सी हवा दोनों को छूकर बहती है।
यानी दोनों को परवरिश बिलकुल एक जैसी मिलती है। फिर भी दोनों के ढंग एक-से नहीं होते — यही बात कविता बार-बार दिखाती है।
काँटा क्या करता है? वह किसी की उँगलियाँ छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख कतर देता है और भौंरे के साँवले शरीर को बेध देता है।
फूल क्या करता है? वह उन्हीं तितलियों को अपनी गोद में ले लेता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है, और अपनी सुगंध तथा निराले रंगों से कली को खिला देता है।
इसी अंतर का नतीजा भी अलग होता है — काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवताओं के सिर पर सजता है।
अंत में कवि असली बात कहते हैं — कुल यानी खानदान की बड़ाई तब तक किसी काम की नहीं, जब तक व्यक्ति में खुद बड़प्पन न हो।
कविता की खास बातें
- एक ही परिवेश मिलने पर भी स्वभाव अलग-अलग हो सकता है।
- काँटे के काम गिनाने के लिए कवि ने चोट पहुँचाने वाले शब्द चुने — छेदना, फाड़ना, कतरना, बेधना।
- फूल के काम गिनाने के लिए कोमल शब्द चुने — गोद लेना, रस पिलाना, खिला देना।
- फूल और काँटा असल में दो तरह के लोगों के प्रतीक हैं — एक जो दूसरों को दुख देता है, दूसरा जो सुख बाँटता है।
- कविता का अंत उपदेश से नहीं, एक सीधे सवाल जैसे वाक्य से होता है।
आदमी की पहचान उसके खानदान से नहीं, उसके गुणों और व्यवहार से होती है। ऊँचे कुल में जन्म लेना काफ़ी नहीं — बड़प्पन कर्मों से आता है।
कवि से परिचय
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।
उन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखीं। बच्चों के लिए प्रकाशित उनके कविता-संकलनों में चंद्र-खिलौना और खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं।
शब्दार्थ
| मेह | वर्षा, बारिश |
| ढंग | तरीका, स्वभाव |
| वर बसन | सुंदर वस्त्र |
| कतरना | काट देना |
| बेधना | छेद देना |
| श्याम तन | साँवला शरीर |
| अनूठा | अनोखा, निराला |
| निज | अपना |
| निराला | अलग ही तरह का |
| खटकना | बुरा लगना, चुभना |
| सुर | देवता |
| शीश | सिर |
| सोहना | शोभा देना |
| कुल | वंश, खानदान |
| बड़प्पन | महानता, अच्छे गुण |
| कसर | कमी |