📚 पाठ 2 • कहानी • Class 8 Hindi
दो गौरैया
✍️ हरिशंकर परसाई | पुस्तक: मल्हार
📖 विस्तृत सारांश — दो गौरैया
🖊️ रचना-परिचय
हरिशंकर परसाई (1924–1995) हिंदी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक हैं। इस पाठ में वास्तव में दो रचनाएँ हैं — पहली 'दो गौरैया' (परसाई की हास्य कहानी) और दूसरी 'मित्रलाभ' (पंचतंत्र से)।
🐦 भाग 1 — दो गौरैया (पूरी कहानी)
पृष्ठभूमि: परसाई जी का घर एक सराय जैसा है — चूहे, कबूतर, छिपकलियाँ, चमगादड़, मधुमक्खियाँ, चींटियाँ सब रहते हैं। एक बूढ़ा चूहा अँगीठी के पीछे और एक बाथरूम की टंकी पर रहता है। बिल्ली कभी-कभी झाँकती है, दूध पीकर चली जाती है।
- घोंसला बनाना: एक दिन दो गौरैया घर में घुसकर निरीक्षण करती हैं — जैसे मकान देखने आई हों। दो दिन बाद पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं और गाने लगती हैं।
- पिताजी का गुस्सा: पिताजी क्रोधित होकर उन्हें भगाने की कसम खाते हैं। माँ हँसती हैं — "चूहों को नहीं निकाल पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!"
- पहला प्रयास — ताली-हँकड़: पिताजी जोर से ताली बजाते हैं, "श...शू" करते हैं, बाँहें झुलाते हैं, कूदते हैं। गौरैया घोंसले से सिर निकालकर "चीं-चीं" करने लगती हैं। माँ — "चिड़ियाँ पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?"
- दूसरा प्रयास — लाठी: पिताजी लाठी उठाकर पंखे के गोले को ठकोरते हैं। गौरैया उड़ जाती हैं पर दरवाजे के नीचे से वापस आ जाती हैं। पिताजी दरवाजे के नीचे कपड़े ठूँसते हैं।
- तीसरा प्रयास — रोशनदान: अबकी बार रोशनदान के टूटे शीशे से वापस आ जाती हैं। पिताजी रोशनदान में भी कपड़ा ठूँसते हैं।
- घोंसला तोड़ना: अंत में पिताजी स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला तोड़ने की कोशिश करते हैं। माँ — "दो तिनके निकले, बाकी दो हजार भी निकल जाएंगे!" गौरैया चुपचाप दुबली होकर दीवार पर बैठी देख रही थीं।
- हार: रात को लगा चिड़ियाँ चली गईं। सुबह — वे फिर मौजूद! आखिरकार पिताजी थककर हार मान लेते हैं।
🦁 भाग 2 — मित्रलाभ (पंचतंत्र)
यह पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी है जिसमें चार जानवर दोस्त हैं — लघुपतनक (कौआ), हिरण्यक (चूहा), मन्थरक (कछुआ), चित्राण (हिरन)।
- कौए ने हिरन को देखा — दोनों में मित्रता हुई। चूहे से मित्रता, फिर कछुए से।
- एक दिन हिरन शिकारी के जाल में फँस गया। कौए ने उड़कर देखा और चूहे को बताया।
- चूहे ने जाल काट दिया — हिरन आजाद। पर कछुआ वहाँ आ गया।
- शिकारी ने कछुए को पकड़ लिया। तीनों मित्र चिंतित हुए।
- उपाय — हिरन रास्ते में मरे हुए जैसा लेट जाए, कौआ उस पर चोंच मारे। शिकारी हिरन लेने आएगा, कछुए को छोड़ेगा — तब चूहा जाल काटेगा।
- योजना सफल — चारों बच गए। "मित्रता में बड़ी शक्ति है।"
💡 दोनों कहानियों का संदेश
दो गौरैया: प्रकृति के छोटे जीव भी अपनी जिद्द और चतुराई से इंसान को हरा देते हैं। जो अपना घर समझ लें, उन्हें कोई नहीं भगा सकता। साथ ही — पारिवारिक हास्य में जीवन का सत्य छुपा है।मित्रलाभ: सच्ची मित्रता में जाति-भेद नहीं होता। मुसीबत में साथ देना ही असली दोस्ती है।
🎯 पाठ का परिचय
- यह एक हास्य-व्यंग्यात्मक कहानी है।
- एक शहरी मध्यवर्गीय परिवार और दो जिद्दी गौरैयों के बीच की रोचक कहानी।
- मुख्य विषय: प्रकृति के साथ सहजीवन और घर की अवधारणा।
- कहानी में हास्य, व्यंग्य और मानवीय संवेदना का सुंदर समन्वय है।
✍️ लेखक परिचय — हरिशंकर परसाई
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जन्म स्थान | जमानी, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) |
| विधा | कहानी, व्यंग्य लेखन |
| शैली | हास्य-व्यंग्य — सामाजिक विसंगतियों पर |
| विशेषता | साधारण जीवन को रोचक और व्यंग्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करना |
👥 पात्र-परिचय
👨
पिताजी
गृहपति, जिद्दी, व्यावहारिक — गौरैयों को निकालने के लिए परेशान
👩
माँ
समझदार, हास्य-प्रिय — पिताजी पर व्यंग्य करती हैं
👦
मैं (लेखक)
बालक, दृष्टा — घटना का वर्णन करने वाला
🐦🐦
दो गौरैयाँ
जिद्दी, साहसी — घर में बसने की ठान लेती हैं
📖 कहानी का सार
📝 एक नज़र में
एक शहरी परिवार के घर में दो गौरैयाँ बिना अनुमति के घुसकर पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। पिताजी उन्हें बाहर निकालने की भरसक कोशिश करते हैं — लाठी, हाथ झुलाना, ताली बजाना — लेकिन गौरैयाँ हर बार वापस आ जाती हैं। अंत में जब घोंसले में बच्चे निकल आते हैं, तो परिवार उन्हें स्वीकार कर लेता है।
📅 मुख्य घटनाक्रम
-
1घर में आम का पेड़ है, पक्षियों का जमावड़ा है। अनेक जीव-जंतु घर में रहते हैं।
-
2एक दिन दो गौरैयाँ घर में आकर मकान का "निरीक्षण" करती हैं।
-
3दो दिन बाद — पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं और मल्हार गाने लगती हैं।
-
4पिताजी को गुस्सा आता है — लाठी लेकर, ताली बजाकर, हाथ झुलाकर उन्हें भगाने की कोशिश करते हैं।
-
5माँ हँसती रहती हैं और व्यंग्य करती हैं — "चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!"
-
6गौरैयाँ दरवाजे के नीचे से, रोशनदान से — हर रास्ते से वापस आ जाती हैं।
-
7पिताजी घोंसला तोड़ने की कोशिश करते हैं — तभी दोनों गौरैयाँ उदास बैठी दिखती हैं।
-
8घोंसले में बच्चे निकल आते हैं — परिवार का दृष्टिकोण बदल जाता है।
-
9अंत: पिताजी गौरैयों की ओर देख-देखकर केवल मुस्कुराते रहते हैं — उन्हें स्वीकार कर लिया जाता है।
🎨 कहानी की विशेषताएँ
😄 हास्य और व्यंग्य
📖 व्यंग्य क्या है?
व्यंग्य = हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी को उजागर करना। बात को सीधे न कहकर संकेतात्मक ढंग से कहना।
- माँ का वाक्य — "चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!" — व्यंग्य का उदाहरण
- पिताजी का नाचना-कूदना — हास्यपूर्ण दृश्य
- "चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?"
🌍 सहजीवन का संदेश
- घर में पहले से — चूहे, कबूतर, चमगादड़, छिपकली, चींटियाँ सभी रहते थे।
- मानव को प्रकृति के साथ मिलकर जीना होगा।
- गौरैयाँ = प्रकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
विशेष जानकारी: "मल्हार" — भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग, जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। इसी राग के नाम पर पाठ्यपुस्तक का नाम "मल्हार" रखा गया है।
🐦 विश्व गौरैया दिवस
- 20 मार्च — विश्व गौरैया दिवस (भारत सरकार द्वारा घोषित)
- शहरीकरण और प्रदूषण के कारण गौरैयों की संख्या घट रही है।
- सीसा रहित पेट्रोल से हानिकारक यौगिक → गौरैयों का भोजन (कीट) नष्ट।
- आधुनिक इमारतों में घोंसला बनाने की जगह नहीं।
📌 कठिन शब्द और शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सराय | मुसाफिरखाना / आने-जाने वालों का ठहरने का स्थान |
| कल्लोल | शोर, चहचहाना |
| धमाचौकड़ी | उत्पात, हल्ला-गुल्ला |
| डेरा डालना | किसी जगह रहने के लिए आसन जमाना |
| निरीक्षण | जाँच-परख करना |
| घोंसला | पक्षियों का घर |
| मल्हार | भारतीय शास्त्रीय संगीत का वर्षा-राग |
| व्यंग्य | हँसी-मज़ाक से किसी की कमी उजागर करना |
| कौतूहल | जिज्ञासा, उत्सुकता |
| चित्रग्रीव | कबूतरों का राजा (पंचतंत्र में) |
| हिरण्यक | चूहे का नाम (पंचतंत्र में) |
| व्याध | शिकारी |
| लघुपतनक | कौए का नाम (पंचतंत्र में) |
🌟 पाठ से सीख
💡 मुख्य संदेश
- मनुष्य को प्रकृति के जीवों के साथ सहजीवन के भाव से रहना चाहिए।
- छोटे जीवों के प्रति भी करुणा और संवेदना रखनी चाहिए।
- कभी-कभी जिद छोड़कर परिस्थिति को स्वीकार करना अधिक समझदारी है।
- घर केवल मनुष्यों का नहीं, अन्य प्राणियों के साथ भी साझा किया जा सकता है।
📚 पढ़ने के लिए — मित्रलाभ (पंचतंत्र)
- कबूतरों का राजा चित्रग्रीव जाल में फँस जाता है।
- कौआ लघुपतनक चेतावनी देता है — लोभ में फँसना ठीक नहीं।
- चूहा हिरण्यक जाल काटकर मुक्त करता है — सच्ची मित्रता का उदाहरण।
- शिक्षा — लोभ से विवेकशक्ति नष्ट हो जाती है।
🔁 Quick Revision
✍️
लेखक:
हरिशंकर परसाई
हरिशंकर परसाई
📖
विधा:
हास्य-व्यंग्य कहानी
हास्य-व्यंग्य कहानी
🎯
विषय:
सहजीवन / प्रकृति प्रेम
सहजीवन / प्रकृति प्रेम
😄
शैली:
हास्य-व्यंग्य
हास्य-व्यंग्य
🐦
प्रतीक:
गौरैयाँ = प्रकृति
गौरैयाँ = प्रकृति
🏠
अंत:
गौरैयाँ स्वीकार
गौरैयाँ स्वीकार
🔑 Key Takeaways
💡 याद रखें
- गौरैयाँ बार-बार वापस आती हैं — प्रकृति की जिद्द और अधिकार का प्रतीक।
- पिताजी की हार = मानव की प्रकृति के सामने पराजय नहीं, समझ का विकास।
- व्यंग्य = सीधे न कहकर, हास्य में बात करना।
- गौरैया दिवस — 20 मार्च
- मल्हार = वर्षा ऋतु का संगीत-राग = इस पाठ्यपुस्तक का नाम।