✦ षष्ठः पाठः ✦
क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम्
Antakshari Game — Sanskrit to Hindi Explanation
📚 संस्कृत हिन्दी व्याख्या | दीपकम् | कक्षा ७ | @edugrown
🎮 खेल का परिचय — अन्त्याक्षरी
✏️ दो दल श्लोकान्त्याक्षरी खेल रहे हैं
सखि दीपिके ! वयम् अधुना क्रीडितुम् अभिलषामः ।
अरे भारति ! बहिः वृष्टिः अस्ति, कथं क्रीडामः ?
अरे भारति ! बहिः वृष्टिः अस्ति, कथं क्रीडामः ?
🔵 हिन्दी: सखी दीपिका! हम अभी खेलना चाहते हैं।
अरे भारती! बाहर बारिश है, कैसे खेलें?
अरे भारती! बाहर बारिश है, कैसे खेलें?
💡 बाहर बारिश है — अब घर के अंदर का खेल।
वयं गणद्वयं रचयामः । प्रथमगणस्य नाम — 'ज्ञानमाला', द्वितीयगणस्य नाम — 'रत्नमाला' । आदौ प्रथमगणस्य सदस्यः एकं पद्यं गायति । तस्य पद्यस्य अन्तिमेन व्यञ्जनवर्णेन द्वितीयगणस्य सदस्यः अन्यं श्लोकं गायति ।
🔵 हिन्दी: हम दो दल बनाते हैं — 'ज्ञानमाला' और 'रत्नमाला'। पहले दल का सदस्य एक श्लोक गाता है। उस श्लोक के आखिरी अक्षर से दूसरे दल का सदस्य नया श्लोक गाता है।
💡 नियम: आखिरी अक्षर से नया श्लोक — बिल्कुल हिन्दी अन्त्याक्षरी की तरह, पर श्लोकों से।
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📜 विद्या पर श्लोक — भावार्थ सहित
रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः ।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ।।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ।।
सुन्दर रूप, यौवन और उच्चकुल से भी बड़ा गुण विद्या है।
विद्याहीन मनुष्य पलाश के फूल की तरह — देखने में सुन्दर पर गन्धहीन।
भावार्थः — यद्यपि किसी के पास सुन्दर रूप है, युवावस्था है, बड़े कुल में जन्म है — फिर भी यदि विद्या नहीं है तो वे समाज में शोभित नहीं होते। जैसे पलाश (टेसू) के फूल देखने में सुन्दर पर सुगन्धहीन होते हैं।
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: रूप-यौवन-कुल बिना विद्या के बेकार हैं। विद्या ही मनुष्य को सच्ची शोभा देती है।
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनं,
विद्या भोगकरी यशःसुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता,
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीनः पशुः ।।
विद्या भोगकरी यशःसुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता,
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीनः पशुः ।।
विद्या ही असली रूप, छुपा धन, गुरुओं का गुरु, विदेश में बन्धु — और विद्याहीन पशु है।
यह श्लोक विद्या की 7 महिमाएँ बताता है। विद्याविहीनः पशुः = बिना विद्या मनुष्य = पशु।
भावार्थः — विद्या ७ गुण देती है: (१) अतिरिक्त सौन्दर्य (२) छुपी सम्पत्ति (३) सुख-साधन (४) यश (५) गुरुओं की गुरु (६) विदेश में बन्धु (७) सर्वश्रेष्ठ देवता। राजाओं में भी धन नहीं विद्या का सम्मान होता है।
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: विद्या सबसे बड़ी शक्ति है। पैसे से भी बड़ी। जिसके पास विद्या है उसे दुनिया में कहीं कोई तकलीफ नहीं।
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् ।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ।।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ।।
बुद्धिमान का समय शास्त्र में, मूर्ख का समय व्यसन-नींद-झगड़े में।
समय का सदुपयोग करो — यही बुद्धिमानी है।
भावार्थः — बुद्धिमान लोगों का समय काव्य और शास्त्र के अध्ययन में आनन्दपूर्वक व्यतीत होता है। मूर्खों का समय बुरी आदतों, व्यर्थ की नींद और झगड़ों में नष्ट होता है।
🔵 हिन्दी: सरल अर्थ: अपना समय सही काम में लगाओ। जो खाली समय में भी पढ़ते हैं — वे बुद्धिमान हैं।
📚 @edugrown | दीपकम् | कक्षा ७