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Quick revision notes

प्रथमः पाठः: संगच्छध्वं संवदध्वम् (Sangacchadhvam Samvadadhvam) Quick revision notes Class 8th Sanskrit (दीपकम्) — एकता और सहयोग का संदेश

Class 8 · Sanskrit (दीपकम्) · Chapter 1 : संगच्छध्वं संवदध्वम् (Sangacchadhvam Samvadadhvam) · All Board · All Medium · 7 views

Ye material inke liye bhi hai: All Board BIHAR BOARD CBSE CHHATTISGARH BOARD JHARKHAND BOARD MP BOARD NIOS RAJASTHAN BOARD UP BOARD All Medium ENGLISH HINDI
📖 Class 8 Sanskrit
✦ प्रथमः पाठः ✦
संगच्छध्वं संवदध्वम्
🕊️ एकता और सहयोग का संदेश 🕊️
🏫 पाठ परिचय
Classroom Scene
@edugrown @edugrown
@edugrown @edugrown
@edugrown @edugrown
🎨 छात्र और आचार्य - संवाद (Classroom Discussion)

📌 स्रोत (Source): यह पाठ ऋग्वेद के दशम मण्डल के सूक्त १०.१९१ से लिया गया है।

📌 इसे संज्ञान-सूक्तम् या संघटन-सूक्तम् भी कहते हैं।

📌 इस पाठ में एकता, सहयोग और सामंजस्य का सन्देश दिया गया है।

📌 एक विद्यालय के पादकन्दुक-क्रीडा (Football) में विजय की कहानी से पाठ की शुरुआत होती है।

🌟 महत्त्वपूर्ण बात (Important Point)
  • जो दल मिलकर खेलता है, एकता रखता है — वही जीतता है!
  • विपक्षी दल में परस्पर द्वेष था, इसलिए वे हारे।
  • वेद का संदेश — साथ चलो, साथ बोलो, मन एक करो।
🌸
📜 तीनों मन्त्र
Students praying together
@edugrown @edugrown @edugrown
@edugrown @edugrown
🙏 समवेत प्रार्थना — एकजुट होकर मन्त्रोच्चारण
॥ मन्त्र १ ॥
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ॥ १ ॥
॥ मन्त्र २ ॥
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम् ।
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि ॥ २ ॥
॥ मन्त्र ३ ॥
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः ।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥ ३ ॥
🌸
🔵 मन्त्र १ — भावार्थ
📜 मन्त्र १ का अर्थ :
🔹 संगच्छध्वं = मिलकर चलो (Walk together)
🔹 संवदध्वं = एकस्वर से बोलो (Speak in one voice)
🔹 वः मनांसि संजानताम् = आपस में मनोभाव समझो

✏️ भावार्थ (Short Notes) :

हे मानवों! अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में मिलकर आगे बढ़ो

परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए एक स्वर से बोलो

एक-दूसरे के मनोभाव को भलीभाँति समझो, परस्पर मनोभेद मत करो।

जैसे सृष्टि के प्रारम्भ में देव-शक्तियाँ मिलकर अपना-अपना कार्य करती हैं — वैसे ही आप भी करो।

🌸
🟢 मन्त्र २ — भावार्थ
📜 मन्त्र २ का अर्थ :
🔹 समानो मन्त्रः = सबका चिन्तन एक जैसा हो
🔹 समितिः समानी = सबकी लक्ष्यसिद्धि समान हो
🔹 समानं मनः = मन एकजुट हो
🔹 सह चित्तम् = बुद्धि भी एक हो

✏️ भावार्थ (Short Notes) :

एक साथ काम करने वालों का सोचना समान हो, लक्ष्य समान हो।

घर, कक्षा और समाज में बिना द्वेष के सब मिलकर सुखपूर्वक जीएँ।

ऋषि कहते हैं — "मैं आप सबके संकल्पों को दिव्यभाव से जोड़ता हूँ, एकता के यज्ञ में आहुति देता हूँ।"

Teacher explaining
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@edugrown @edugrown
🎓 आचार्य वेद-मन्त्रों का अर्थ समझा रहे हैं
🌸
🔴 मन्त्र ३ — भावार्थ
📜 मन्त्र ३ का अर्थ :
🔹 आकूतिः समानी = संकल्प एक जैसे हों
🔹 हृदयानि समाना = हृदय एक जैसे हों (प्रेम भरे)
🔹 मनः समानम् = मन एकरूप हो
🔹 सु सह असति = मिलकर अच्छे से रहें

✏️ भावार्थ (Short Notes) :

हे मानवों! तुम्हारे संकल्प समान हों, हृदय प्रेमपूर्ण हों।

जिससे तुम्हारा संघटन सुन्दर और उत्कृष्ट हो — उसके अनुसार मन एकरूप रखो।

इसी से परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में सुख, शान्ति और मैत्री बनी रहती है।

Unity and harmony
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@edugrown @edugrown
@edugrown @edugrown
🌈 एकता और सहयोग — प्रकृति के साथ सामंजस्य
🌸
📖 महत्त्वपूर्ण शब्दार्थ
✏️ परीक्षा में ये शब्द ज़रूर आते हैं — याद करो!
संगच्छध्वम्मिलकर चलोWalk together
संवदध्वम्एकस्वर से बोलोSpeak in unison
मनांसिमनों को / चित्तMinds
जानताम्जानेंMay you know
देवाःब्रह्माण्डीय शक्तियाँCosmic forces
संजानानाःएकमन होकरBeing amicable
अभ्युदयम्लौकिक उन्नतिProsperity
समितिःसमान सिद्धिCommon resolution
आकूतिःसंकल्पResolution/Intention
हविषाप्रार्थनापूर्वकBy oblatory prayers
जुहोमिज्ञान-यज्ञ करता हूँPerforming Yajña
समवेतस्वरेणसम्मिलित ध्वनि सेBy chanting in unison
🌸
💡 पाठ का मुख्य संदेश
🌟 मन्त्रों से मिलने वाले फल
  • एकजुट होने से प्रसन्नता, सौमनस्य और उत्साह मिलता है।
  • संगठन से आयु, आरोग्य, विजय और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • ऐक्यभाव से धर्म, ज्ञान और आत्मतृप्ति होती है।
  • वेद का संदेश — वैमनस्य त्यागकर ऐक्यभाव से जीओ!
🔴 एकता (Unity) 🔵 सहयोग (Cooperation) 🟢 सामंजस्य (Harmony) 🟣 प्रेम (Love) 🟠 शान्ति (Peace)

🌟 याद रखो: यह पाठ हमें सिखाता है कि परिवार, विद्यालय, समाज और राष्ट्र — सब में एकता से ही सफलता मिलती है। वेद की यही शिक्षा है जो हज़ारों साल पहले भी सत्य थी और आज भी है!

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✏️ व्याकरण बिंदु
📌 लोट्-लकार (आज्ञार्थ / Imperative Mood)

🔹 आज्ञार्थे (आदेश देने के लिए) — छात्राः! उत्तिष्ठत।

🔹 आमन्त्रणार्थे (निमंत्रण के लिए) — भवन्तः आगच्छन्तु।

🔹 आशीर्वादार्थे (आशीर्वाद के लिए) — आयुष्मान् भव।

📌 गम् धातु — खास नियम

🔹 सामान्यतः गम् धातु परस्मैपदी है।

🔹 परंतु जब सम् उपसर्ग लगता है तो आत्मनेपद रूप बनता है।

🔹 गम् + ति = गच्छति सम् + गच्छति = सङ्गच्छते

📌 लोट्-लकार — आत्मनेपद (संगम् धातु)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम संगच्छताम् संगच्छेताम् संगच्छन्ताम्
मध्यम संगच्छस्व संगच्छेथाम् संगच्छध्वम्
उत्तम संगच्छै संगच्छावहै संगच्छामहै

💡 याद रखो: संगच्छध्वम् = मध्यम पुरुष, बहुवचन (लोट् आत्मनेपद)। यही पाठ का शीर्षक-शब्द है!

🌸
🏛️ वेद की जानकारी

📌 वेद चार हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेदः, सामवेदः, अथर्ववेदः

📌 इस पाठ का स्रोत — ऋग्वेद

📌 ऋग्वेद में १०,५५२ मन्त्र, १० मण्डल, १०२८ सूक्त हैं।

📌 यह पाठ दशम मण्डल, सूक्त १९१ से है।

ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद
🏛️ वेदांग (6 अंग याद करो!)
  • शिक्षा, व्याकरण, छन्दः, निरुक्त, ज्योतिष, कल्पः
📚 षड्-दर्शन (6 दर्शन)
  • न्यायः, वैशेषिकं, साङ्ख्यं, योगः, पूर्व-मीमांसा, उत्तर-मीमांसा (वेदान्तः)

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