हिंदी · मल्हार · अध्याय 7
जलाते चलो
कविता — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी · संपूर्ण पाठ्य-प्रश्नों के हल एक ही स्थान पर
जलाते चलो
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरीजलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।
भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी,
मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में
घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो
बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।।
जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी,
तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने
बना दीप की नाव तैयार की थी।
बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।।
युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर
दिये अनगिनत है निरंतर जलाए,
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे
उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।।
दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।
— द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
कवि से परिचय — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
यह कविता हिंदी के प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने लिखी है। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी रचनाएँ लिखी हैं। उनके द्वारा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।
🌤️ मेरी समझ से
🔗 मिलकर करें मिलान
| शब्द | सही अर्थ / संदर्भ |
|---|---|
| 1. अमावस | अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
| 2. पूर्णिमा | पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| 3. विद्युत-दिये | विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 4. युग | समय, काल; युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। |
💬 पंक्तियों पर चर्चा
🤔 सोच-विचार के लिए
🖋️ कविता की रचना
- कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं — पहले 2 पंक्तियों की एक टेक (refrain), फिर 4 पंक्तियों का विस्तार।
- प्रत्येक पंक्ति को बोलने/गाने में लगभग समान समय लगता है, जिससे कविता में एक लयबद्ध प्रवाह (rhythm) बना रहता है।
- कविता में "मिलेगा" शब्द का बार-बार प्रयोग (जैसे "मिटेगा", "मिलेगा") तुकांत (rhyme) पैदा करता है।
- कविता में "दीये" व "तिमिर/अंधकार" के बीच प्रतीकात्मक (symbolic) तुलना की गई है।
- कविता में आशा और सकारात्मकता का भाव पूरी कविता में एक समान बना रहता है।
📎 मिलान
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (भाव) |
|---|---|
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
💭 अनुमान या कल्पना से
🔤 शब्दों के रूप
| शब्द 1 (कविता में) | शब्द 2 (मिलता-जुलता रूप) |
|---|---|
| दिया | दीप (दोनों का अर्थ 'दीपक/लैंप') |
| उजेला | उजाला (दोनों का अर्थ 'प्रकाश') |
| अनगिन | अनगिनत (दोनों का अर्थ 'बहुत सारे, जिन्हें गिना न जा सके') |
| धरा | धरती (दोनों का अर्थ 'पृथ्वी') |
💡 अर्थ की बात
| पंक्ति | दिए गए विकल्प | सबसे उपयुक्त शब्द |
|---|---|---|
| बहाते चलो ___ तुम वह निरंतर | नैया, नाव, नौका | नाव |
| कभी तो तिमिर का ___ मिलेगा।। | तट, तीर, किनारा | किनारा |
| रहेगा ___ पर दिया एक भी यदि | धरा, धरती, भूमि | धरा |
| कभी तो निशा को ___ मिलेगा।। | प्रात:, सुबह, सवेरा | सवेरा |
| जला दीप पहला तुम्हीं ने ___ की | अंधकार, तिमिर, अँधेरे | तिमिर |
| चुनौती ___ बार स्वीकार की थी। | प्रथम, अव्वल, पहली | प्रथम |
🌓 प्रतीक
निशा जैसे शब्द: अंधकार, सन्नाटा, धुंध, मुरझाना, कालिमा (जैसे— अंधकारमय पर्वत, सुनसान किला, मुरझाया गुलाब, धुंधला चाँद)।
✍️ पंक्ति से पंक्ति
🔠 सा/सी/से का प्रयोग
- उसकी आँखें झील-सी गहरी हैं।
- आज आकाश आग-सा लाल दिख रहा है।
- वह परी-सी सुंदर लगती है।
- उसकी आवाज़ कोयल-सी मीठी है।
- बच्चे का चेहरा चाँद-सा चमक रहा था।
🗣️ आपकी बात
🌗 अमावस्या और पूर्णिमा
📅 तिथिपत्र
| रविवार | सोमवार | मंगलवार | बुधवार | गुरुवार | शुक्रवार | शनिवार |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1दशमी (शुक्ल) | 2एकादशी (शुक्ल) | 3द्वादशी (शुक्ल) | 4त्रयोदशी (शुक्ल) | 5चतुर्दशी (शुक्ल) | 6पूर्णिमा | 7प्रतिपदा (कृष्ण) |
| 8द्वितीया (कृष्ण) | 9द्वितीया (कृष्ण) | 10तृतीया (कृष्ण) | 11चतुर्थी (कृष्ण) | 12पंचमी (कृष्ण) | 13षष्ठी (कृष्ण) | 14सप्तमी (कृष्ण) |
| 15अष्टमी (कृष्ण) | 16नवमी (कृष्ण) | 17दशमी (कृष्ण) | 18एकादशी (कृष्ण) | 19द्वादशी (कृष्ण) | 20त्रयोदशी (कृष्ण) | 21अमावस्या |
| 22प्रतिपदा (शुक्ल) | 23द्वितीया (शुक्ल) | 24तृतीया (शुक्ल) | 25चतुर्थी (शुक्ल) | 26वसंत पंचमी (शुक्ल) | 27षष्ठी (शुक्ल) | 28सप्तमी (शुक्ल) |
| 29अष्टमी (शुक्ल) | 30नवमी (शुक्ल) | 31दशमी (शुक्ल) |
🧩 आज की पहेली
| बा | द | ल | ई | ब |
| प | अ | नि | ल | या |
| व | क | स | मी | र |
| न | ह | वा | यु | ब |
| मा | रु | त | स | ड़ |
🔎 खोजबीन के लिए