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NCERT Solution

Chapter 7 : जलाते चलो (Jalate Chalo) (NCERT Solution) class 6th hindi

Class 6 · Hindi (Malhar) · Chapter 7 : जलाते चलो (Jalate Chalo) · All Board · All Medium · 6 views

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हिंदी · मल्हार · अध्याय 7

जलाते चलो

कविता — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी · संपूर्ण पाठ्य-प्रश्नों के हल एक ही स्थान पर

✍️ कवि: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) 📖 विषय: आशा व प्रेरणा की कविता 🎯 सभी गतिविधियों के हल सहित
दीये जलाते बच्चे — मूल पाठ्यपुस्तक का चित्र
📜 मूल कविता

जलाते चलो

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।

भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी,
मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में
घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो
बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।।

जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी,
तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने
बना दीप की नाव तैयार की थी।
बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।।

युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर
दिये अनगिनत है निरंतर जलाए,
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे
उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।।

दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।

— द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

कवि से परिचय — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

(1916 – 1998)

यह कविता हिंदी के प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने लिखी है। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी रचनाएँ लिखी हैं। उनके द्वारा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।

1️⃣ पाठ से — In-text Questions10 गतिविधियाँ

🌤️ मेरी समझ से

(क) 1. निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
⭐ भलाई के कार्य करते रहना दीपावली के दीपक जलाना बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
सही उत्तर: भलाई के कार्य करते रहना। यह कविता एक प्रतीकात्मक (symbolic) कविता है — यहाँ "दीये" भलाई, प्रेम और अच्छाई के कार्यों के प्रतीक हैं तथा "तिमिर/अंधेरा" बुराई व कठिनाइयों का प्रतीक है। कविता हमें प्रेरित करती है कि चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, हमें निरंतर अच्छे कार्य (दीये जलाना) करते रहना चाहिए — यह कोई शाब्दिक दीपावली के दीये जलाने या बल्ब जलाने की बात नहीं है।
2. "जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" — यह वाक्य किससे कहा गया है?
तूफ़ान से ⭐ मनुष्यों से दीपकों से तिमिर से
सही उत्तर: मनुष्यों से। कवि पूरी कविता में मनुष्यों को ही संबोधित करते हुए "तुम्हीं ने" कहकर बार-बार पुकार रहे हैं — यह मनुष्य ही हैं जिन्होंने सबसे पहले अंधकार (तिमिर) की चुनौती स्वीकार करके ज्ञान, प्रेम व अच्छाई के दीये जलाने शुरू किए थे।
(ख) अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
कक्षा में चर्चा करते समय बताया जा सकता है कि कविता में "दीये", "तिमिर", "तूफ़ान" जैसे शब्दों का प्रयोग शाब्दिक (literal) अर्थ में नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक अर्थ में हुआ है, इसलिए इसका मुख्य भाव भलाई के कार्य निरंतर करते रहना है। दूसरे प्रश्न में "तुम्हीं" शब्द सीधे पाठक/मनुष्यों को संबोधित करता प्रतीत होता है, क्योंकि पूरी कविता मनुष्यों को ही प्रेरित करने के लिए लिखी गई है। (यह एक मौखिक चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी अपने शब्दों में तर्क दे सकते हैं।)

🔗 मिलकर करें मिलान

कविता में से चुने गए शब्दों को उनके सही अर्थ/संदर्भ से मिलाइए —
शब्दसही अर्थ / संदर्भ
1. अमावसअमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
2. पूर्णिमापूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
3. विद्युत-दियेविद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।
4. युगसमय, काल; युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग।
मिलान हल: 1 → अमावस (अमावस्या)  |  2 → पूर्णिमा (पूर्णमासी)  |  3 → विद्युत-दिये (बिजली से जलने वाले उपकरण)  |  4 → युग (काल विभाजन)। ऊपर तालिका में मिलान सही क्रम में दिखाया गया है।

💬 पंक्तियों पर चर्चा

"दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी, जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।। रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।" — इसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
इन पंक्तियों में कवि कह रहे हैं कि अच्छाई (दीये) और बुराई/बाधाओं (तूफ़ान) के बीच का यह संघर्ष सदियों से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा — यह कोई नई बात नहीं। जो पहला दीप जलाया गया था, उसकी सुनहरी (स्वर्ण-सी) लौ आज भी जल रही है और सदा जलती रहेगी, अर्थात् अच्छाई और सत्य कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होते। कवि आशा व्यक्त करते हैं कि यदि धरती पर एक भी दीया (अर्थात् एक भी अच्छा, नेक इंसान) बचा रहेगा, तो एक दिन अंधकार (निशा) अवश्य समाप्त होकर उजाला (सवेरा) आएगा।

🤔 सोच-विचार के लिए

(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
कविता में अँधेरे/तिमिर के लिए इन उदाहरणों/बिंबों (images) का प्रयोग हुआ है — अमावस निशा (अमावस्या की काली रात), तिमिर की सरित (अंधकार की नदी), तिमिर की शिला (अंधकार की चट्टान), और तूफ़ान (जो दीयों को बुझाने का प्रयास करता है)।
(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
कविता में यह आशा की गई है कि एक दिन धरती से अंधकार (तिमिर) पूरी तरह मिट जाएगा और चारों ओर उजाला (सवेरा) फैल जाएगा — "कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा", "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" जैसी पंक्तियों में यह भाव बार-बार दोहराया गया है। यह आशा इसलिए की गई है क्योंकि जब तक धरती पर एक भी दीया (यानी एक भी नेक इंसान, एक भी अच्छा कार्य) जलता रहेगा, अंधकार उस पर पूर्ण विजय नहीं पा सकता — निरंतर प्रयास और भलाई के कार्यों से अंततः उजाले की जीत निश्चित है।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
कविता में दीयों (स्नेह व भलाई के प्रतीक) को निरंतर जलाते रहने की बात कही गई है, जबकि तूफ़ान/पवन (बुराई, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ) द्वारा इन दीयों को बार-बार बुझाने की बात कही गई है — फिर भी कवि कहते हैं कि दीये जलाना कभी न रुके।

🖋️ कविता की रचना

(क) इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए (जैसे — इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है आदि)।
कविता की विशेषताएँ:
  • कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं — पहले 2 पंक्तियों की एक टेक (refrain), फिर 4 पंक्तियों का विस्तार।
  • प्रत्येक पंक्ति को बोलने/गाने में लगभग समान समय लगता है, जिससे कविता में एक लयबद्ध प्रवाह (rhythm) बना रहता है।
  • कविता में "मिलेगा" शब्द का बार-बार प्रयोग (जैसे "मिटेगा", "मिलेगा") तुकांत (rhyme) पैदा करता है।
  • कविता में "दीये" व "तिमिर/अंधकार" के बीच प्रतीकात्मक (symbolic) तुलना की गई है।
  • कविता में आशा और सकारात्मकता का भाव पूरी कविता में एक समान बना रहता है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
यह एक सामूहिक चर्चा गतिविधि है — विद्यार्थी अपने समूह में बनाई गई सूची को कक्षा के सामने प्रस्तुत करके अन्य समूहों की खोजी गई विशेषताओं से भी सीख सकते हैं।

📎 मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को मिलाइए —
स्तंभ 1स्तंभ 2 (भाव)
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।
मिलान हल: 1↔3, 2↔4, 3↔2, 4↔1 (क्रम अनुसार) — ऊपर तालिका में सही मिलान दिखाया गया है।

💭 अनुमान या कल्पना से

(क) "दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी" — दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
यह अच्छाई (दीये/प्रकाश) और बुराई या बाधाओं (तूफ़ान/अंधकार) के बीच सदियों से चले आ रहे शाश्वत संघर्ष की कहानी हो सकती है — जैसे सच्चाई व झूठ, ज्ञान व अज्ञान, न्याय व अन्याय के बीच का संघर्ष, जो हर युग में किसी न किसी रूप में चलता रहा है, फिर भी अच्छाई कभी हारी नहीं।
(ख) "जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी" — दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
यह सत्य, ज्ञान, मानवता या अच्छाई की वह लौ हो सकती है जो सदियों से महापुरुषों, समाज-सुधारकों और नेक लोगों के माध्यम से निरंतर जलती आ रही है और आगे भी कभी बुझने वाली नहीं है।

🔤 शब्दों के रूप

'अमावस' का अर्थ है 'अमावस्या' — इन दोनों शब्दों का अर्थ समान है, पर लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर है। ऐसे ही मिलते-जुलते शब्द कविता से खोजकर लिखिए।
कविता में मिलने वाले ऐसे मिलते-जुलते शब्द-युग्म:
शब्द 1 (कविता में)शब्द 2 (मिलता-जुलता रूप)
दियादीप (दोनों का अर्थ 'दीपक/लैंप')
उजेलाउजाला (दोनों का अर्थ 'प्रकाश')
अनगिनअनगिनत (दोनों का अर्थ 'बहुत सारे, जिन्हें गिना न जा सके')
धराधरती (दोनों का अर्थ 'पृथ्वी')

💡 अर्थ की बात

(क) "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" — यदि 'चलो' के स्थान पर 'रहो' रखा जाए तो पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आएगा?
"चलो" शब्द एक गतिशील (dynamic) भाव देता है — यह निरंतर आगे बढ़ते हुए, चलते-चलते दीये जलाते रहने की प्रेरणा देता है, यानी एक सतत यात्रा और प्रयास का भाव। जबकि "रहो" शब्द एक स्थिर (static) भाव देता है — यह केवल एक ही स्थान पर बने रहकर दीये जलाते रहने का भाव देगा। "रहो" शब्द रखने से पंक्ति में गति और आगे बढ़ने की प्रेरणा का भाव कमज़ोर हो जाएगा, इसलिए कवि ने "चलो" शब्द को चुना है।
(ख) नीचे दी गई पंक्तियों में सबसे उपयुक्त शब्द चुनिए —
पंक्तिदिए गए विकल्पसबसे उपयुक्त शब्द
बहाते चलो ___ तुम वह निरंतरनैया, नाव, नौकानाव
कभी तो तिमिर का ___ मिलेगा।।तट, तीर, किनाराकिनारा
रहेगा ___ पर दिया एक भी यदिधरा, धरती, भूमिधरा
कभी तो निशा को ___ मिलेगा।।प्रात:, सुबह, सवेरासवेरा
जला दीप पहला तुम्हीं ने ___ कीअंधकार, तिमिर, अँधेरेतिमिर
चुनौती ___ बार स्वीकार की थी।प्रथम, अव्वल, पहलीप्रथम
📌 ये शब्द इसलिए सबसे उपयुक्त हैं क्योंकि यही मूल कविता में प्रयुक्त हुए हैं और इनसे कविता की लय (rhythm) व तुक (rhyme) सही बनी रहती है।

🌓 प्रतीक

(क) "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" — निशा का शाब्दिक अर्थ है रात, सवेरा का शाब्दिक अर्थ है सुबह। पर कविता में इनका प्रयोग किस अन्य अर्थ में हुआ है?
कविता में 'निशा' और 'सवेरा' का प्रयोग केवल शाब्दिक 'रात' और 'सुबह' के लिए नहीं हुआ है, बल्कि प्रतीकात्मक रूप में हुआ है। यहाँ 'निशा' का अर्थ है अंधकार, बुराई, दुख या कठिन समय, और 'सवेरा' का अर्थ है उजाला, अच्छाई, सुख या खुशहाली भरा समय। (संकेतानुसार — निशा से जुड़ा है 'अँधेरा' और सवेरे से जुड़ा है 'उजाला'।)
(ख) कविता में से चुने गए शब्दों को 'सवेरा' और 'निशा' के अंतर्गत उपयुक्त स्थान पर रखिए — (दिये, अँधेरा, अमावस, पूर्णिमा, दिवस, तिमिर, नाव, किनारा, शिला, ज्योति, उजेला, तूफ़ान, लौ, स्वर्ण, जलना, बुझना)
☀️ सवेरा (उजाले से जुड़े शब्द):
दियेपूर्णिमादिवसज्योतिउजेलालौस्वर्णजलना
🌑 निशा (अंधकार व संघर्ष से जुड़े शब्द):
अँधेराअमावसतिमिरनावकिनाराशिलातूफ़ानबुझना
(ग) 'निशा' और 'सवेरा' के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए।
सवेरा जैसे शब्द: उजाला, रोशनी, चमक, खिलना, प्रकाश, चमकता (जैसे— रोशन पर्वत, खिलता गुलाब, चमकता चाँद)।
निशा जैसे शब्द: अंधकार, सन्नाटा, धुंध, मुरझाना, कालिमा (जैसे— अंधकारमय पर्वत, सुनसान किला, मुरझाया गुलाब, धुंधला चाँद)।

✍️ पंक्ति से पंक्ति

"जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" को वाक्य रूप में लिखा जा सकता है — "तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।" अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए —
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
वाक्य रूप: तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
वाक्य रूप: तुम ये दिये स्नेह से भर-भर कर जलाते चलो।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
वाक्य रूप: यदि तुम इन्हें बुझाओगे, तो इस तरह रास्ता नहीं मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
वाक्य रूप: परंतु आज विश्व पर दिन में ही अमावस्या की रात जैसा अंधकार क्यों घिरता जा रहा है?

🔠 सा/सी/से का प्रयोग

"घिरी आ रही है अमावस निशा-सी, स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी" — यहाँ 'सी' शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग हुआ है, और इससे पहले योजक चिह्न (-) लगता है। विभिन्न शब्दों के साथ 'सा/सी/से' का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य लिखिए।
नमूना वाक्य:
  • उसकी आँखें झील-सी गहरी हैं।
  • आज आकाश आग-सा लाल दिख रहा है।
  • वह परी-सी सुंदर लगती है।
  • उसकी आवाज़ कोयल-सी मीठी है।
  • बच्चे का चेहरा चाँद-सा चमक रहा था।
2️⃣ पाठ से आगे — Exercise Questions3 गतिविधियाँ

🗣️ आपकी बात

(क) यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
नमूना उत्तर: मैं प्रतिदिन अपने बड़ों का सम्मान करने की कोशिश करता/करती हूँ, ज़रूरतमंद दोस्तों की पढ़ाई में मदद करता/करती हूँ, घर के छोटे-छोटे कामों में माता-पिता का हाथ बँटाता/बँटाती हूँ, और पेड़-पौधों को पानी देकर पर्यावरण की रक्षा में योगदान देता/देती हूँ। (विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभवों के आधार पर उत्तर लिख सकते हैं।)
(ख) यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे?
नमूना उत्तर: मैं अपने मित्र को समझाऊँगा/समझाऊँगी कि हार मानना समस्या का हल नहीं है — जैसे कविता में कहा गया है, चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, कोशिश करते रहने से एक दिन सफलता ज़रूर मिलती है। मैं उसे कहूँगा/कहूँगी, "थोड़ा और प्रयास करो, कभी तो अंधेरा मिटेगा और सवेरा ज़रूर होगा" — और उसकी मदद के लिए साथ खड़ा/खड़ी रहूँगा/रहूँगी।
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
नमूना उत्तर: हाँ, एक बार जब मैं किसी प्रतियोगिता में हार गया/गई था/थी और निराश हो गया/गई था/थी, तब मेरे शिक्षक/माता-पिता ने मुझे समझाया कि हार से सीखना चाहिए, हार मानना नहीं चाहिए। उनकी बातों से मुझे फिर से मेहनत करने की प्रेरणा मिली और अगली बार मैंने बेहतर प्रदर्शन किया। (विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर उत्तर लिख सकते हैं।)

🌗 अमावस्या और पूर्णिमा

(क) अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जबकि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता — वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। चंद्रमा की कला (आकार) धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा दिखने लगता है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद बिल्कुल दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों को 'कृष्ण पक्ष' कहते हैं ('कृष्ण' का एक अर्थ काला भी है), और कलाओं के बढ़ने के दिनों को 'शुक्ल पक्ष' कहते हैं ('शुक्ल' का एक अर्थ 'उजला' भी है)।
(ख) नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए —
चंद्रमा की कलाओं का चक्र — पूर्णिमा, शुक्लपक्ष, अमावस्या, कृष्णपक्ष — मूल पाठ्यपुस्तक का चित्र
चंद्रमा की बदलती कलाओं की वास्तविक तस्वीरें — मूल पाठ्यपुस्तक का चित्र
पहचान: ऊपर दिए गए चक्र (wheel) में — सबसे ऊपर पूर्णिमा (चंद्रमा पूरी तरह चमकीला/गोल), दाईं ओर कृष्ण पक्ष (चंद्रमा धीरे-धीरे घटता हुआ), सबसे नीचे अमावस्या (चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य/काला), और बाईं ओर शुक्ल पक्ष (चंद्रमा धीरे-धीरे बढ़ता हुआ) दिखाया गया है। नीचे दी गई वास्तविक तस्वीरों की पट्टी में भी यही चक्र दोहराया गया है — अमावस्या (पूर्ण अंधकार) से शुरू होकर चंद्रमा प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा बढ़ता (शुक्ल पक्ष) हुआ पूर्णिमा (पूर्ण चमक) तक पहुँचता है, फिर दोबारा घटते-घटते (कृष्ण पक्ष) अमावस्या पर वापस आ जाता है — यह चक्र लगभग हर 29-30 दिनों में दोहराता रहता है।

📅 तिथिपत्र

नीचे तिथिपत्र (कैलेंडर) के जनवरी 2023 माह का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए —
रविवारसोमवारमंगलवारबुधवारगुरुवारशुक्रवारशनिवार
1दशमी (शुक्ल) 2एकादशी (शुक्ल) 3द्वादशी (शुक्ल) 4त्रयोदशी (शुक्ल) 5चतुर्दशी (शुक्ल) 6पूर्णिमा 7प्रतिपदा (कृष्ण)
8द्वितीया (कृष्ण) 9द्वितीया (कृष्ण) 10तृतीया (कृष्ण) 11चतुर्थी (कृष्ण) 12पंचमी (कृष्ण) 13षष्ठी (कृष्ण) 14सप्तमी (कृष्ण)
15अष्टमी (कृष्ण) 16नवमी (कृष्ण) 17दशमी (कृष्ण) 18एकादशी (कृष्ण) 19द्वादशी (कृष्ण) 20त्रयोदशी (कृष्ण) 21अमावस्या
22प्रतिपदा (शुक्ल) 23द्वितीया (शुक्ल) 24तृतीया (शुक्ल) 25चतुर्थी (शुक्ल) 26वसंत पंचमी (शुक्ल) 27षष्ठी (शुक्ल) 28सप्तमी (शुक्ल)
29अष्टमी (शुक्ल) 30नवमी (शुक्ल) 31दशमी (शुक्ल)
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
31 दिन (जनवरी माह में 31 दिन होते हैं)।
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनांक और वार को पड़ रही है?
पूर्णिमा: 6 जनवरी, शुक्रवार।   अमावस्या: 21 जनवरी, शनिवार।
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
कृष्ण पक्ष की सप्तमी = 14 जनवरी; शुक्ल पक्ष की सप्तमी = 28 जनवरी। अंतर = 28 − 14 = 14 दिन
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
कृष्ण पक्ष 7 जनवरी (प्रतिपदा) से 21 जनवरी (अमावस्या) तक चलता है, अर्थात् 15 दिन (7 से 21 तक कुल 15 तिथियाँ)।
(ङ) 'वसंत पंचमी' की तिथि बताइए।
26 जनवरी, गुरुवार (पंचमी, शुक्ल पक्ष)।

🧩 आज की पहेली

"समय साक्षी है कि जलते हुए दीप, अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।" — 'पवन' शब्द का अर्थ है हवा। नीचे दिए गए अक्षर-जाल में 'पवन' के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग शब्द छिपे हैं। एक उदाहरण (हवा) पहले से घेरा हुआ है — बाकी शब्द खोजिए।
बा
निया
मी
वायु
मारुड़
पवन के लिए मिलने वाले शब्द:
हवा (दिया गया उदाहरण) वायु समीर अनिल मारुत
ये सभी शब्द 'हवा/पवन' के पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द हैं, जो अक्षर-जाल में आड़े (horizontal) क्रम में छिपे हुए हैं।
3️⃣ खोजबीन के लिए — Extra Reading

🔎 खोजबीन के लिए

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📚 इन शीर्षकों को अपने अध्यापक की सहायता से क्यू.आर. कोड द्वारा खोजें और पढ़ें:
हम सब सुमन एक उपवन के बढ़े चलो रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1 रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
यह एक स्वाध्याय (स्वयं पढ़ने की) गतिविधि है, इसमें कोई निश्चित 'उत्तर' नहीं है — विद्यार्थियों को इन रचनाओं को पढ़कर कक्षा में उन पर चर्चा करनी है।
🪔 सभी उत्तर NCERT 'मल्हार' पाठ्यपुस्तक, अध्याय 7 — 'जलाते चलो' पर आधारित हैं। @EduGrown

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